भारत ने शुक्रवार को अमेरिका के नेतृत्व वाले रणनीतिक गठबंधन 'पैक्स सिलिका' में शामिल होने के लिए घोषणा पर हस्ताक्षर किए। यह कदम आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) और क्रिटिकल मिनरल्स की मजबूत सप्लाई चेन को मजबूत करने के मकसद से उठाया गया है, साथ ही चीन की रेयर अर्थ मिनरल्स में प्रभुत्व को चुनौती देने का प्रयास है।

यह घोषणा नई दिल्ली में चल रहे इंडिया AI इम्पैक्ट समिट के दौरान हुई, जिससे भारत इस फ्रेमवर्क में औपचारिक रूप से शामिल हो गया। यह पहल क्रिटिकल मिनरल्स और AI के लिए सुरक्षित, लचीली तथा खोज आधारित सप्लाई चेन विकसित करने पर केंद्रित है। इसका लक्ष्य अगली पीढ़ी के उद्योगों के लिए आवश्यक प्रमुख संसाधनों तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करना और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना है।

यह कदम नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने तथा द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने के अन्य प्रयासों के बीच आया है, जो हाल के तनावपूर्ण दौर के बाद संबंधों को मजबूत करने की दिशा में है।

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इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद कहा, "भारत पैक्स सिलिका का हिस्सा बन गया है। इससे भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को बहुत फायदा होगा। भारत में पहले से ही दस प्लांट स्थापित हो चुके हैं और कई स्थापित होने की प्रक्रिया में हैं। बहुत जल्द ही पहला सेमीकंडक्टर प्लांट वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करेगा। भारत में एक पूरा इकोसिस्टम उभर रहा है। पैक्स सिलिका इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और भारत के युवाओं को इससे लाभ होगा।"

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस पहल को भारत और अमेरिका के बीच 21वीं सदी के आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था को आकार देने वाली रणनीतिक साझेदारी करार दिया। उन्होंने कहा कि भारत की भागीदारी "रणनीतिक और आवश्यक" है, क्योंकि भारत के पास इंजीनियरिंग प्रतिभा, मिनरल प्रोसेसिंग में प्रगति और अमेरिका-भारत तकनीकी सहयोग को मजबूत करने में भूमिका है। उन्होंने जोर दिया कि साझेदारी वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय AI को बढ़ावा देगी। 
यह पहल दिसंबर 2025 में वाशिंगटन में आयोजित पैक्स सिलिका समिट में शुरू की गई थी। इसमें ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इसराइल, जापान, कतर, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और यूनाइटेड किंगडम जैसे साझेदार देश शामिल हैं। घोषणा में कच्चे माल से लेकर सेमीकंडक्टर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर तक की सप्लाई चेन में गहन आर्थिक और तकनीकी सहयोग की साझा दृष्टि है, साथ ही आपसी समृद्धि और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता है। पैक्स सिलिका का एक प्रमुख स्तंभ साझेदार देशों में AI-संचालित विकास को बढ़ावा देने वाला मजबूत आर्थिक ढांचा बनाना है।

पिछले महीने राजदूत गोर ने नई दिल्ली को इस रणनीतिक गठबंधन में शामिल होने का निमंत्रण दिया था।

पैक्स सिलिका क्या है?

पैक्स सिलिका अमेरिका के नेतृत्व वाला रणनीतिक गठबंधन है, जिसका उद्देश्य एआई और सेमीकंडक्टर के लिए वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना है। यह 20वीं सदी के तेल और स्टील पर निर्भरता से 21वीं सदी की सिलिकॉन और क्रिटिकल मिनरल्स आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बदलाव को दर्शाता है।

'पैक्स' लैटिन शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ शांति है, जो सुरक्षित और विश्वसनीय तकनीक के माध्यम से वैश्विक स्थिरता की दृष्टि को बताता है। 'सिलिका' उस खनिज को संदर्भित करता है जो कंप्यूटर चिप्स और AI सिस्टम के मूल निर्माण में शामिल है।

अमेरिकी अंडर सेक्रेटरी फॉर इकोनॉमिक अफेयर्स जैकब हेलबर्ग के नेतृत्व में यह गठबंधन चीन के वर्चस्व वाली वर्तमान व्यवस्था का "विश्वसनीय" विकल्प बनाने का लक्ष्य है। चीन वर्तमान में रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE) प्रोसेसिंग का बड़ा हिस्सा नियंत्रित करता है। गठबंधन का एक प्रमुख उद्देश्य चीन पर वैश्विक निर्भरता कम करना है।

यह सप्लाई चेन में व्यवधानों को रोकने पर भी फोकस करता है, जैसे भू-राजनीतिक संकटों या खनिजों के "हथियारीकरण" से ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में देखे गए। पैक्स सिलिका तकनीकी जीवन चक्र के पूरे हिस्से को कवर करता है - खनिज दोहन और रिफाइनिंग से सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म और फ्रंटियर AI मॉडल तक।

भारत के लिए कैसे महत्वपूर्ण

भारत को पैक्स सिलिका में महत्वपूर्ण नोड माना जा रहा है, क्योंकि यहां विशाल प्रतिभा पूल और काफी हद तक अनुपयोगी खनिज संसाधन हैं। भागीदारी से भारत चीन पर अपनी भारी निर्भरता कम कर सकता है, जहां से वर्तमान में उसकी लगभग 93 प्रतिशत रेयर अर्थ आयात होती है।

यह पहल जापान और नीदरलैंड्स जैसे तकनीकी नेताओं के साथ एडवांस मिनरल प्रोसेसिंग और चिप निर्माण में साझेदारी को आसान बनाएगी। यह भारत के नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन से भी जुड़ती है, जो घरेलू उत्पादन और तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने पर केंद्रित हैं। यह कदम भारत-अमेरिका संबंधों में नई मजबूती लाएगा और वैश्विक तकनीकी व्यवस्था में भारत की भूमिका को भी मजबूत करेगा।