पश्चिम एशिया (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य टकराव अब पूर्ण युद्ध का रूप ले चुका है। नतीजा वैश्विक समुद्री व्यापार और निर्दोष नाविकों को भुगतना पड़ रहा है। ओमान के तट पर पिछले चार दिनों के भीतर भारतीय क्रू सदस्यों वाले तीसरे वाणिज्यिक जहाज पर हमला हुआ है। वहीं, अमेरिकी नौसेना द्वारा इस सप्ताह की शुरुआत में किए गए एक हमले में लापता हुए तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सामने इस मामले को उठाते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। भारत ने अमेरिकी राजनयिक को भी सुबह तलब किया था।

चार दिनों में तीसरे भारतीय जहाज जलवीर पर हमला

ताजा घटनाक्रम में, गुरुवार (11 जून, 2026) को ओमान के शिनास पोर्ट (Shinas Port) के पास टैंकर एमवी जलवीर (MV Jalveer) पर हमला किया गया। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, इस जहाज पर लगभग 20 भारतीय चालक दल (क्रू) सदस्य सवार थे। भारतीय दूतावास और स्थानीय अधिकारी इस जहाज की स्थिति और क्रू को सुरक्षित निकालने के लिए मस्कट में लगातार तालमेल कर रहे हैं। चार दिनों के भीतर भारतीय नाविकों की मौजूदगी वाले जहाजों पर यह लगातार तीसरा हमला है।

3 भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि

इससे पहले, ओमान तट के पास ही पलाऊ (Palau) के झंडे वाले तेल टैंकर एमटी सेटेबेलो (MT Settebello) पर अमेरिकी सेना द्वारा किए गए हवाई हमले के बाद लापता हुए तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि हो गई है। इससे पहले दो के मारे जाने की सूचना आई थी।
केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा, "यह हमारे समुद्री परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है। दो शव बरामद होने के बाद शुरुआती तौर पर लापता घोषित किए गए तीनों भारतीय नाविकों के मृत होने की पुष्टि हो गई है। मोदी सरकार दुख की इस घड़ी में शोक संतप्त परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है और सुरक्षित बचाए गए 21 नाविकों की तत्काल वतन वापसी और मृतकों के पार्थिव शरीरों को लाने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं।" इस जहाज पर कुल 24 भारतीय नागरिक सवार थे, जिनमें से 21 को ओमान के अधिकारियों के सहयोग से सुरक्षित बचा लिया गया था।

भारत ने अमेरिका से भी दर्ज कराया विरोध

भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने बुधवार को नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के उप-प्रमुख (Chargé d'Affaires) जेसन मीक्स (Jason Meeks) को तलब किया और इन हमलों पर 'कड़ा विरोध' (Strong Protest) दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (अमरीका) नागराज नायडू और प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अमेरिकी पक्ष को स्पष्ट शब्दों में कहा कि वाणिज्यिक जहाजों पर ऐसे हमले, जिससे भारतीय नाविकों की जान खतरे में पड़ती है, पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं।

मैरीवेक्स (M/T Marivex) पर भी हुआ था हमला 

इससे ठीक दो दिन पहले 8 जून को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पलाऊ के झंडे वाले एक अन्य टैंकर 'एम/टी मैरीवेक्स' को भी निशाना बनाया था, जिस पर 24 भारतीय नाविक सवार थे। अमेरिकी सेना का दावा था कि यह जहाज अमेरिकी नाकेबंदी (Blockade) का उल्लंघन कर ईरान की ओर जा रहा था और निर्देश न मानने पर विमानवाहक पोत 'यूएसएस अब्राहम लिंकन' से एफ/ए-18 सुपर हॉरनेट फाइटर जेट के जरिए इसके इंजीनियरिंग और स्टीयरिंग स्पेस पर सटीक निशाना साधा गया था।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत का कड़ा रुख

इस भीषण संकट के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में समुद्री सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश पर्वथनेनी ने UNSC की खुली बहस में कहा: भारत वाणिज्यिक जहाजों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर हो रहे सैन्य हमलों का कड़ा विरोध करता है। वैश्विक शिपिंग इंडस्ट्री में भारतीय नाविक एक रीढ़ की हड्डी की तरह हैं और उनकी सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में लगभग 1 करोड़ (10 million) भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं। इस युद्ध का उन पर सीधा असर पड़ रहा है। भारत की ऊर्जा आपूर्ति (Energy Supply) और व्यापारिक श्रृंखला पूरी तरह से इस क्षेत्र की स्थिरता पर निर्भर है। इस युद्ध के कारण बढ़ती तबाही और सामान्य जीवन का ठप होना चिंताजनक है। भारत ने ग़ज़ा में तुरंत स्थायी युद्धविराम और लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों (UN Peacekeepers) पर हो रहे हमलों की निंदा की। साथ ही भारत ने लेबनान को डॉक्टरी सहायता भेजने की भी घोषणा की।

ईरान ने 'होर्मुज' समुद्री रास्ते को फिर बंद किया

अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों के जवाब में ईरान के नवगठित समुद्री निकाय 'पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' (PGSA) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर घोषणा की कि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के आदेश के बाद होर्मुज (Strait of Hormuz) को अगली सूचना तक पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। बयान में कहा गया, "क्षेत्र में अमेरिकी सेना की आक्रामकता और तनाव के कारण यह कदम उठाया गया है। जिन जहाजों को ट्रांजिट परमिट मिला हुआ था, वे भी धैर्य रखें और अगले आदेश का इंतजार करें।" हालांकि, अमेरिका ने ईरान के इस दावे को खारिज करने की कोशिश की है, लेकिन जमीनी स्तर पर तनाव चरम पर है।

कई देशों ने शांति की अपील की

अमेरिका और ईरान के बीच लगातार दूसरे दिन हुए हवाई हमलों और युद्ध की विभीषिका पर दुनिया के अन्य देशों ने गहरी चिंता जताई है:
रूस: प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने दोनों पक्षों से तुरंत वार्ता की मेज पर लौटने की अपील की और चेतावनी दी कि इस युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था को भयानक परिणाम भुगतने होंगे।
सऊदी अरब: सऊदी विदेश मंत्रालय ने बहरीन, जॉर्डन और कुवैत पर हुए ईरानी हमलों की निंदा की और पाकिस्तान तथा कतर की मध्यस्थता के तहत शांति वार्ता को फिर से शुरू करने का आह्वान किया।
तुर्की: तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि दो दिन पहले शुरू हुए ये जवाबी हमले पूरे पश्चिम एशिया को अपनी चपेट में ले सकते हैं, इसलिए दोनों देशों को तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकनी चाहिए।
रमजान के पवित्र महीने में शुरू हुआ यह संघर्ष अब बेकाबू हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने तेहरान को चेतावनी दी है कि यदि वे शांति समझौते पर तुरंत सहमत नहीं होते हैं, तो और घातक हमले किए जाएंगे। वहीं भारत जैसे निकटतम पड़ोसी देश कूटनीति, संवाद और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में बिना किसी बाधा के आवागमन की स्वतंत्रता की मांग कर रहे हैं ताकि निर्दोष नाविकों की जान बचाई जा सके।