अडानी समूह में कथित बेनामी निवेश का मामला फिर तूल पकड़ रहा है। अब कथित तौर पर कारोबारी चांग चुंग-लिंग और नासिर अली शबान अहली द्वारा 2023 तक 3 अरब डॉलर के गुप्त निवेश का खुलासा हुआ है। कांग्रेस ने मोदी सरकार पर हमला बोला है।
उद्योगपति गौतम अडानी और पीएम मोदी
अडानी समूह की कंपनियों में कथित बेनामी निवेश का मामला पुख्ता तथ्यों के साथ सामने आया है। फाइनेंशियल टाइम्स ने इस मामले की जांच रिपोर्ट प्रकाशित की है। कांग्रेस पार्टी ने संगठित अपराध और भ्रष्टाचार रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि अडानी ग्रुप के करीबी सहयोगियों ने बेनामी फंड्स का इस्तेमाल कर समूह में बड़े पैमाने पर हिस्सेदारी हासिल की। यह मनी लॉन्ड्रिंग का सीधा मामला है। कांग्रेस ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कथित "घोटाले" के सभी पहलुओं की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की मांग को "रोक" दिया है।
क्या है अडानी समूह के बारे में नई रिपोर्ट
फाइनेंशियल टाइम्स और अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसी ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) ने एक विस्तृत जांच में खुलासा किया है कि अडानी परिवार के दो करीबी सहयोगियों ने अडानी ग्रुप की कंपनियों में लगभग 3 अरब डॉलर (करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये) के शेयर गुप्त रूप से निवेश किए थे। यह जानकारी REYL Intesa Sanpaolo नामक स्विस बैंकिंग ग्रुप के आंतरिक बैंक दस्तावेजों से सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, यूएई के नागरिक नासिर अली शबान अहली (Nasser Ali Shaban Ahli) और ताइवान के नागरिक चांग चुंग-लिंग (Chang Chung-Ling) ने 2023 तक अडानी ग्रुप के शेयरों में यह भारी निवेश बनाए रखा था। ये निवेश बर्मूडा स्थित तीन हेज फंड्स-Gleneagles Investment Fund, Pangea Fund और Oyster Bay Fund के जरिए किए गए थे, जिनका प्रशासन Apex Fund Services द्वारा किया जाता था। इनमें से दो फंड्स (Pangea और Oyster Bay) का प्रबंधन Elara Capital Ltd द्वारा किया जाता था, जो मॉरीशस रजिस्टर्ड Elara India Opportunities Fund और Vespera Fund Ltd का भी प्रबंधन करती है। इन फंड्स में अडानी शेयरों में केंद्रित निवेश थे। एक संबंधित Global Opportunities Fund में अडानी शेयरों में 43 करोड़ डॉलर का निवेश था।
दस्तावेजों के मुताबिक, अहली ने ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (BVI) स्थित Gulf Asia Trade & Investment Ltd के माध्यम से 2.02 अरब डॉलर का निवेश किया, जबकि चांग ने BVI स्थित Lingo Investment Ltd के जरिए 1.02 अरब डॉलर का। ये राशियां लगभग पूरी तरह हेज फंड्स में निवेशित थीं, जो अडानी ग्रुप की कंपनियों में लगी हुई थीं। अडानी के भाई विनोद अडानी ने UAE रजिस्टर्ड Kommerce Trade & Services के माध्यम से 65 लाख डॉलर का निवेश किया था, जो मुख्य रूप से एक फार्मास्युटिकल कंपनी में था, साथ ही चांग की कंपनी से कुछ लोन संबंधी लेनदेन भी थे।
ये निवेश दुबई स्थित REYL Intesa Sanpaolo की सहायक कंपनी Reyl Finance (MEA) Ltd के खातों से होकर गुजरे। हिंडनबर्ग रिसर्च की जनवरी 2023 की रिपोर्ट के बाद, जिसमें अडानी ग्रुप पर स्टॉक मैनिपुलेशन का आरोप लगाया गया था, बैंक ने जांच की और फरवरी 2023 में अहली और चांग से निजी बैठक में उन्होंने लिखित रूप से इन निवेशों की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि निवेश अडानी परिवार से व्यक्तिगत और व्यावसायिक संबंधों तथा उनकी क्षमता पर भरोसे के कारण किए गए थे।
अहली और चांग का अडानी परिवार से लंबा जुड़ाव रहा है। वे अडानी से जुड़ी कंपनियों में डायरेक्टर रहे हैं। 2007 में भारतीय राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) की हीरे की अवैध ट्रेडिंग जांच में चांग तीन अडानी कंपनियों के डायरेक्टर थे और विनोद अडानी के साथ सिंगापुर में एक ही पता साझा करते थे। 2014 में DRI की पावर इक्विपमेंट ओवर-इनवॉइसिंग जांच (1 अरब डॉलर तक के अवैध फंड आउटफ्लो) में दोनों विनोद अडानी की UAE और मॉरीशस कंपनियों के डायरेक्टर थे।
स्विस जांच में अगस्त 2024 में अदालत ने चांग के 31.1 करोड़ डॉलर (करीब 2600 करोड़ रुपये) की संपत्ति फ्रीज कर दी, उन्हें अडानी निवेशों के "फ्रंट मैन" मानते हुए मनी लॉन्ड्रिंग और दस्तावेजों में जालसाजी का संदेह जताया। जांच 2021 से चल रही है। REYL बैंक ने 2022 में स्विस अधिकारियों से जानकारी मांगी और दिसंबर 2022 में अहली, चांग तथा विनोद अडानी के निष्क्रिय खाते बंद कर दिए।
अडानी ग्रुप ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उसके प्रवक्ता ने कहा, "भारतीय कानून के तहत लिस्टेड कंपनी सार्वजनिक शेयरों की खरीद को नियंत्रित या निर्देशित नहीं करती, न ही पब्लिक शेयरधारकों के फंड्स के स्रोत की जिम्मेदारी लेती है, सिवाय रेगुलेटरी खुलासों के।" उन्होंने कहा कि कोई भी "फ्रंट मैन" वास्तव में "पब्लिक शेयरधारक" हैं और प्रमोटर शेयरहोल्डिंग में कुछ भी छिपा नहीं है।
SEBI ने सितंबर 2025 में दो अंतिम आदेश जारी किया और कहा कि आरोपों में कोई उल्लंघन नहीं पाया। हालांकि अडानी समूह के खिलाफ दर्जन भर से अधिक मामले लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2024 में अतिरिक्त जांच की मांग खारिज की थी। नवंबर 2024 में अमेरिका में गौतम अडानी और उनके भतीजे पर रिश्वत के आरोप लगे, जिसे ग्रुप ने "बेबुनियाद" कहा है।
अहली और चांग ने OCCRP के ईमेल पर अपना पक्ष नहीं रखा और न कोई जवाब दिया। REYL Intesa Sanpaolo ने कानूनी प्रतिबंधों का हवाला देते हुए कमेंट से इनकार किया। Elara Capital और Apex Fund Services ने भी जवाब नहीं दिया। अडानी समूह तमाम घरेलू जांच में क्लीन चिट पा चुका है।
कांग्रेस के महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने बुधवार को इस संबंध में ट्वीट किया है। उन्होंने असली कारोबार और राजनीतिक संरक्षण से प्रेरित कारोबार के बीच के अंतर को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, "वास्तविक एंटरप्रन्योरशिप का कांग्रेस पार्टी स्वागत, समर्थन करती रही है, लेकिन राजनीतिक संबंधों के जरिए कारोबारी विस्तार की बात अलग है।" रमेश ने OCCRP की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि रिपोर्ट में सबूत मिले हैं, जिसमें चांग चुंग-लिंग और नासिर अली शाबान अहली द्वारा एक स्विस बैंक में जमा किए गए फंड शामिल हैं। इन व्यक्तियों ने अडानी कंपनियों में पहले से ज्ञात से कहीं अधिक बड़ी हिस्सेदारी रखी थी। उन्होंने विभिन्न हेज फंड्स के माध्यम से 2023 तक अडानी स्टॉक में लगभग 3 अरब अमेरिकी डॉलर को नियंत्रित किया।
रमेश ने इस मामले में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की जांच में देरी की आलोचना की और कहा कि 24 मामलों में से 22 में कोई प्रगति नहीं हुई है। इनमें अडानी ग्रुप कंपनियों में इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोप, न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता मानदंडों का उल्लंघन, 25 अगस्त 2023 को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किए गए 13 संदिग्ध लेनदेन, और अडानी ग्रुप में शेल कंपनियों के माध्यम से 20,000 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 3 मार्च 2023 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्देशित जांच, जो दो महीनों में पूरी होनी थी, लगभग तीन वर्षों से जारी है और अभी तक बंद नहीं हुई है।
रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी के 2014 के जी20 शिखर सम्मेलन में ब्रिस्बेन में दिए गए बयान को याद दिलाया, जहां उन्होंने आर्थिक अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने, मनी लॉन्डरर्स को ट्रैक करने और प्रत्यर्पित करने, तथा भ्रष्टाचार छिपाने वाली नियमावलियों को तोड़ने के लिए वैश्विक सहयोग की अपील की थी। उन्होंने मोदी पर पाखंड का आरोप लगाते हुए कहा कि वे अडानी ग्रुप की रक्षा कर रहे हैं।
कांग्रेस ने जनवरी से मार्च 2023 के बीच अपने 'हम अडानी के हैं कौन (HAHK)' सीरीज में सवाल उठाए थे, जिसमें कथित घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और आयकर विभाग जैसी एजेंसियों का दुरुपयोग कर कंपनियों पर दबाव डालकर महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टरों में संपत्तियों को अडानी ग्रुप के पक्ष में ट्रांसफर करने का आरोप लगाया गया था। इसके अलावा, निजीकरण के फैसलों से अडानी को एयरपोर्ट, बंदरगाहों, और संभावित रूप से सीमेंट, बिजली तथा रक्षा उपकरणों में एकाधिकार मिला है। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि कूटनीतिक संसाधनों का दुरुपयोग कर बांग्लादेश, श्रीलंका और अन्य देशों में अडानी को अनुबंध दिलाए गए।
कथित अनियमितताओं में अधिक कीमत वाले कोयले का आयात और चांग तथा अहली से जुड़ी ट्रेडिंग फर्मों के माध्यम से 2021 से 2023 के बीच भारत से 12,000 करोड़ रुपये की सिफॉनिंग शामिल है, जिससे गुजरात में अडानी पावर स्टेशनों से बिजली की कीमतें बढ़ीं। इसके अलावा, गौतम अडानी और उनके सात सहयोगियों द्वारा भारत में उच्च कीमत वाले सोलर पावर अनुबंध हासिल करने के लिए 2,000 करोड़ रुपये (250 मिलियन अमेरिकी डॉलर) की रिश्वत योजना का आरोप है, जो अमेरिकी अधिकारियों द्वारा जांच के दायरे में है।
कांग्रेस ने "मोदानी मेगा स्कैम" के सभी पहलुओं की जांच के लिए JPC की मांग की है और दावा किया है कि प्रधानमंत्री ने इस मांग को रोक दिया है। रमेश ने कहा, "कांग्रेस लगातार 'मोदानी मेगा स्कैम' के इन सभी पहलुओं की जांच के लिए JPC की मांग कर रही है," और "स्वाभाविक रूप से पीएम ने इसे रोक दिया है।" उन्होंने यह भी कहा कि अडानी ग्रुप पीएम के पूर्ण समर्थन से एक के बाद एक कारोबार में अपना विस्तार कर रहा है, जो दर्शाता है कि उसकी असली मुख्य क्षमता पीएम का संरक्षण है।