ईरान युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत में एलपीजी सिलेंडर बुकिंग का न्यूनतम वेटिंग पीरियड 21 से बढ़ाकर 25 दिन क्यों कर दिया गया है? जानें वजह। पेट्रोल और डीजल की क़ीमतों का क्या होगा?
ईरान युद्ध और मध्य पूर्व में तनाव के बीच भारत में एलपीजी सिलेंडर बुक करने की न्यूनतम वेटिंग पीरियड को 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। हालाँकि, सरकार ने कहा है कि जमाखोरी से निपटने के लिए यह क़दम उठाया गया है। मीडिया रिपोर्टों में सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि डीजल और पेट्रोल का काफ़ी स्टॉक है और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतें बढ़ने के बावजूद भारत में इनके दाम नहीं बढ़ाए जाएंगे।
सरकार की ओर से यह प्रतिक्रिया तब आई है जब ईरान युद्ध के बीच लोगों में तरह तरह की चिंताएँ हैं और एलपीजी को लेकर सोशल मीडिया पर तरह तरह की रिपोर्टें आ रही हैं। कई जगहों पर एलपीजी सिलेंडर के लिए लाइनें लगी हैं और ब्लैक मार्केटिंग की भी ख़बरें हैं।
एलपीजी की कैसी स्थिति?
खाना पकाने के गैस यानी एलपीजी सिलेंडर के बारे में डीजल और पेट्रोल से अलग स्थिति है। एलपीजी का स्टॉक पेट्रोल-डीजल से कम है, और वैकल्पिक सप्लायर दूर-दूर जैसे उत्तर अमेरिका में हैं। घरेलू उपभोक्ताओं को बिना रुकावट गैस मिले, इसके लिए सरकार कदम उठा रही है। सरकार का कहना है कि इसी के तहत सिलेंडर बुक कराने के लिए न्यूनतम वेटिंग पीरियड पर फ़ैसला लिया गया है।एलपीजी सिलेंडर बुक करने की न्यूनतम वेटिंग पीरियड को 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। इसका मक़सद जमाखोरी रोकना और बाजार में कृत्रिम कमी न बनने देना बताया गया है। कहा गया है कि घरों में औसतन हर 6 हफ्ते में एक सिलेंडर लगता है, इसलिए 25 दिन की लिमिट सही है।
इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल
सरकार ने एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट के तहत इमरजेंसी पावर इस्तेमाल की है। रिफाइनरियों को निर्देश दिए गए हैं कि ज्यादा से ज्यादा एलपीजी बनाएं और सिर्फ घरेलू उपभोक्ताओं को दें, पेट्रोकेमिकल्स के लिए न इस्तेमाल करें। घरेलू सप्लाई को कमर्शियल यूजर्स से ऊपर प्राथमिकता दी जा रही है। इससे कुछ इलाकों में कमर्शियल एलपीजी की कमी हो सकती है।
कई जगहों से कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूजर्स को गैस की कमी की खबरें आई हैं। गुजरात के मोरबी में कई सिरेमिक यूनिट्स बंद हो गई हैं क्योंकि प्रोपेन और एलएनजी नहीं मिल रहा। बैंगलोर होटल एसोसिएशन ने कहा कि कमर्शियल सिलेंडर सप्लाई रुक गई है, जिससे मंगलवार से रेस्त्रां बंद हो सकती हैं।
पेट्रोल, डीजल के दाम नहीं बढ़ेंगे: रिपोर्ट
सरकार ने पेट्रोल और डीजल की क़ीमतें अभी नहीं बढ़ाने का फ़ैसला किया है, भले ही अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। यह तीन साल से ज्यादा समय में सबसे ऊंचा स्तर है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की वजह से तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।एएनआई ने सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतें स्थिर रहेंगी। पिछले कुछ सालों से सरकार की नीति यही रही है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद पंप पर कीमतें नहीं बढ़ाई जाएं। भारत में ईंधन बाजार पर सरकारी कंपनियां इंडियन ऑयल यानी आईओसी, भारत पेट्रोलियम यानी बीपीसीएल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम यानी एचपीसीएल का 90% से ज्यादा कंट्रोल है।
अप्रैल 2022 से पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगभग स्थिर हैं। जब वैश्विक कीमतें बढ़ती हैं तो ये कंपनियां घाटा उठाती हैं और जब गिरती हैं तो मुनाफा कमाती हैं।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'ओएमसी (ऑयल मार्केटिंग कंपनियां) पिछले सालों में अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। वे थोड़ा घाटा उठाकर भी उपभोक्ताओं को महंगे ईंधन से बचा सकती हैं। आने वाले समय में कीमतें बढ़ने की संभावना कम है।'
रिपोर्टों में कहा गया है कि देश में कच्चे तेल, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक है। कोई घबराने की जरूरत नहीं। पिछले हफ्ते सूत्रों ने कहा था कि 6-8 हफ्तों का स्टॉक है, और दूसरे इलाकों से सप्लाई बढ़ाकर इसे बनाए रखा जा रहा है।
मध्य पूर्व में तनाव का असर
पश्चिम एशिया में संघर्ष 28 फरवरी से चल रहा है और खत्म होने के आसार नहीं दिख रहे। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से टैंकर मूवमेंट रुक गया है। यह रास्ता दुनिया के 20% कच्चे तेल और एलएनजी के लिए जरूरी है। रोजाना 15 मिलियन बैरल तेल यहां से गुजरता है। भारत के आधे से ज्यादा तेल आयात इसी रास्ते से आते हैं। एलपीजी में 80% से ज्यादा आयात इसी रास्ते से होता है।कीमतें सोमवार को 30% तक बढ़कर 120 डॉलर के करीब पहुंचीं, लेकिन बाद में थोड़ी गिरकर 100 डॉलर से ऊपर बनी रहीं। G7 देशों के 40 करोड़ बैरल स्ट्रैटेजिक रिजर्व से रिलीज की चर्चा से थोड़ी राहत मिली।
सरकार और भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय सप्लायरों से संपर्क में हैं। ज्यादा तेल और एलपीजी खरीद रहे हैं। रूस से पहले से टैंकर में तेल आ रहा है। पश्चिम एशिया के अलावा 60% आयात वाले इलाकों से खरीद बढ़ाई जा रही है। फिलहाल कोई बड़ी कमी नहीं है, लेकिन कीमतें ऊंची रह सकती हैं।