जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रों के आंदोलन को दबाने की कोशिश जारी है। आंदोलन के 13वें दिन आज छात्रों को डिटेन किया गया। जामिया के छात्र यहां छात्रसंघ चुनाव की मांग कर रहे हैं। जामिया प्रशासन ने कक्षाएं ऑनलाइन कर दी हैं।
जामिया में छात्रों को डिटेन करती पुलिस
दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर जारी आंदोलन ने शनिवार, 24 अक्टूबर को नया मोड़ ले लिया। प्रदर्शनकारी छात्रों और विश्वविद्यालय के सुरक्षा गार्डों के बीच टकराव के बाद प्रशासन ने सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं ऑनलाइन करने का फैसला किया। छात्र 12 अक्टूबर से छात्र संघ की बहाली और चुनाव कराने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रोफेसर महताब आलम रिजवी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के दो सांसदों के शुक्रवार को परिसर में आने से छात्रों का माहौल प्रभावित हुआ और तनाव बढ़ा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दोनों नेता दीवार फांदकर परिसर में दाखिल हुए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले में दिल्ली पुलिस को शिकायत दी है।
सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं ऑनलाइन, अगले आदेश तक व्यवस्था लागू
विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर की मौजूदा स्थिति और छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऑफलाइन कक्षाओं को ऑनलाइन माध्यम में स्थानांतरित कर दिया है। यह व्यवस्था सभी पाठ्यक्रमों पर लागू की गई है और अगले आदेश तक जारी रहेगी। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बावजूद पढ़ाई जारी रहनी चाहिए। इसलिए शिक्षकों और संबंधित विभागों को ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल परिसर में नियमित कक्षाएं दोबारा कब शुरू होंगी, इसकी कोई तारीख घोषित नहीं की गई है।छात्र संघ की बहाली मुख्य मांग
जामिया में आंदोलन की शुरुआत 12 अक्टूबर को हुई थी। छात्र विश्वविद्यालय में जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) को फिर से बहाल करने और छात्र संघ चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग कर रहे हैं। विश्वविद्यालय का छात्र संघ वर्ष 2006 में परिसर में हिंसा और पढ़ाई बाधित होने की घटनाओं के बाद भंग कर दिया गया था। उसके बाद से छात्र संघ की बहाली का मुद्दा समय-समय पर उठता रहा है।
इस बार आंदोलन के तहत छात्रों ने गेट नंबर-7 के पास अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांगें हैं:
- - छात्र संघ को बहाल किया जाए।
- - छात्र संघ चुनाव की तारीख घोषित की जाए।
- - चीफ प्रॉक्टर असद मलिक को पद से हटाया जाए।
- - आंदोलन के दौरान छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस ली जाए।
छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
सुरक्षा गार्डों पर छात्रों को जबरन हटाने का आरोप
आंदोलन के दौरान छात्रों और विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मियों के बीच तनाव पहले भी सामने आया था। एनडीटीवी की हिंदी रिपोर्ट के अनुसार, 16 अक्टूबर को छात्रों ने आरोप लगाया कि सुबह करीब 5:30 बजे लगभग 60 सुरक्षा गार्ड चीफ प्रॉक्टर और सुरक्षा सलाहकार के साथ प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। छात्रों का आरोप था कि उनके बिस्तर और तिरपाल हटाए गए और उन्हें जबरन वहां से हटाया गया। इसके बाद छात्रों ने दोबारा गेट नंबर-7 पर प्रदर्शन शुरू किया।रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में लगभग 300 छात्रों ने परिसर में मार्च करने की कोशिश की। कुछ छात्र गेट के अंदर पहुंचे और कुलपति तथा रजिस्ट्रार के खिलाफ पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों ने कुछ छात्रों को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। छात्रों ने सुरक्षाकर्मियों पर मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोप भी लगाए। कुछ छात्रों को मामूली चोटें आने का दावा किया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों के आरोपों को खारिज किया है।
24 अक्टूबर को भी छात्रों पर एक्शनः 16 अक्टूबर की तरह जामिया प्रशासन ने 24 अक्टूबर को भी कार्रवाई की। जामिया प्रशासन ने पुलिस बुलाई और पुलिस आकर छात्र-छात्राओं का जिला, स्टेट का नाम पूछ रही है। पुलिस ने काफी छात्रों को डिटेन किया है।
प्रशासन ने बनाई सात सदस्यीय समिति
छात्रों के आंदोलन को समाप्त कराने और विवाद का समाधान खोजने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने 18 अक्टूबर को सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की थी। इस समिति को छात्र संघ का नया संविधान तैयार करने और छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाइयों की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है। समिति से प्रदर्शनकारी छात्रों की शिकायतों और मांगों पर विचार करने को भी कहा गया है। प्रशासन की ओर से समिति बनाने का उद्देश्य परिसर में शांति बहाल करना और सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां फिर से शुरू कराना बताया गया है। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्र चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि केवल समिति बना देना पर्याप्त नहीं है; छात्र संघ की बहाली के लिए ठोस समयसीमा और स्पष्ट निर्णय जरूरी हैं।कांग्रेस सांसदों के परिसर में आने पर विवाद
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, जामिया के रजिस्ट्रार महताब आलम रिजवी ने कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और इमरान मसूद पर आरोप लगाया कि वे शुक्रवार को दीवार फांदकर परिसर में दाखिल हुए और उनके आने से परिसर का माहौल प्रभावित हुआ। हालांकि दोनों नेता आंदोलनकारी छात्रों के समर्थन में वहां पहुंचे थे। रजिस्ट्रार ने इस संबंध में दिल्ली पुलिस को शिकायत देने की बात कही। नारों की आड़ में छात्र आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश
छात्र संघ की बहाली को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच परिसर की दीवारों पर लिखे गए कथित नारों ने भी विवाद पैदा किया है। एनडीटीवी की हिंदी रिपोर्ट के अनुसार, 22 अक्टूबर को सामने आई तस्वीरों में दीवारों पर ‘फ्री कश्मीर’, ‘फ्री शरजील इमाम’ और एबीवीपी के खिलाफ नारे लिखे होने की बात सामने आई थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन नारों को हटवा दिया। रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि इन्हें किसने लिखा था। हालांकि इन नारों को लिखने का मकसद छात्र आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश है। जामिया और जेएनयू में पहले भी छात्र आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश होती रही है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की जामिया इकाई ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। दूसरी ओर, छात्र संघ की बहाली के लिए आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि ऐसे नारों के आधार पर उनके आंदोलन को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए।
इमरान मसूद छात्रों से मिलने पहुंचे, पुलिस ने हिरासत में लिया
विवाद के बीच कांग्रेस सांसद इमरान मसूद छात्रों से मिलने जामिया पहुंचे थे। एनडीटीवी की हिंदी रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने विवादित नारों की निंदा करते हुए छात्र संघ की बहाली की मांग का समर्थन किया। रिपोर्ट के अनुसार, परिसर से बाहर निकलने के बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और बाद में छोड़ दिया।स्थापना दिवस समारोह भी रद्द
आंदोलन का असर विश्वविद्यालय के अन्य कार्यक्रमों पर भी पड़ा है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय ने अपना 106वां स्थापना दिवस समारोह ‘तालीमी मेला 2026’ रद्द कर दिया है। यह कार्यक्रम 29 अक्टूबर से 1 नवंबर तक आयोजित होना था। प्रशासन ने छात्रों, अतिथियों और प्रतिभागियों की सुरक्षा तथा परिसर में सामान्य स्थिति बहाल नहीं होने को आयोजन रद्द करने की वजह बताया।जामिया में फिलहाल तीन मुद्दे एक साथ सामने हैं- छात्र संघ की बहाली की मांग, प्रदर्शन के दौरान छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच टकराव तथा कथित नारों को लेकर विवाद। प्रशासन ने ऑनलाइन कक्षाओं और सात सदस्यीय समिति के जरिए स्थिति संभालने की कोशिश की है, लेकिन प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांग चुनाव की तारीख घोषित करना है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विश्वविद्यालय प्रशासन समिति की सिफारिशों के आधार पर छात्र संघ बहाली और चुनाव का स्पष्ट कार्यक्रम घोषित करेगा, या आंदोलन और लंबा खिंचेगा? फिलहाल ऑफलाइन कक्षाएं दोबारा शुरू करने और छात्र संघ चुनाव कराने की कोई निश्चित तारीख सामने नहीं आई है।