राजधानी दिल्ली समेत देशभर में पेपर लीक मामले को लेकर हो रहे छात्र प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई के बीच, बृहस्पतिवार 23 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट परिसर में जमा होकर संविधान की प्रस्तावना (Preamble) का पाठ किया। यह आयोजन "लोकतंत्र बचाओ, संविधान बचाओ" (Save Democracy, Save Constitution) अभियान के तहत किया गया। लेकिन इस संविधान की प्रस्तावना के पाठ का समय महत्वपूर्ण है। वकीलों ने अभी 22 जुलाई को जंतर मंतर पर छात्रों को बेरहमी से पीटे जाने की घटनाओं की निन्दा की थी। 22 जुलाई को इससे जुड़ी एक जनहित याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी की थी- हमारा समय बर्बाद मत कीजिए। हमारे पास वीडियो देखने का समय नहीं है। याचिकाकर्ता के वकील ने पुलिस की बेरहमी के वीडियो देखने की अपील सीजेआई सूर्यकांत से सुनवाई के दौरान की थी।
गुरुवार को दोपहर के भोजन के अवकाश (Lunch Recess) के दौरान वकील सुप्रीम कोर्ट के लॉन में इकट्ठा हुए। उन्होंने न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे संवैधानिक मूल्यों को दोहराते हुए एक स्वर में प्रस्तावना पढ़ी। इस कार्यक्रम का नेतृत्व वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह और पूर्व जज व वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एस. मुरलीधर ने किया। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह भी मौजूद रहे। वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर, अंजाना प्रकाश, संजय घोष, शादान फरासत, अरुंधति काटजू, महालक्ष्मी पावणी, नंदिता राव, पी.वी. सुरेन्द्रनाथ, मनाली सिंघल, संगीता भारती, पी.वी. दिनेश, जयंत ठाकुर, अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर सहित कई युवा वकील भारतीय तिरंगा और संविधान की प्रतियां हाथ में लिए नजर आए।
पिछले कुछ दिनों में दिल्ली के जंतर-मंतर पर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्र विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान 20 जुलाई को पुलिस द्वारा छात्रों पर किए गए बल प्रयोग (लाठीचार्ज) के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया था। उस दिन अनगिनत घटनाएं हुई थीं।
ताज़ा ख़बरें
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA), सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) और लगभग 650 से अधिक वकीलों ने अलग-अलग बयान जारी कर छात्रों पर पुलिसिया हिंसा की कड़े शब्दों में निंदा की है। दोनों प्रमुख वकील निकायों ने पुलिस अधिकारियों की इस हिंसक कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध (time-bound) जांच की मांग की है।

पुलिस जुल्म की इंतेहा

जंतर मंतर पर 20 जुलाई को पुलिस एक्शन की चारों तरफ निन्दा हो रही है। इस एक्शन में जिस तरह छात्रों को बेरहमी से पीटा गया, उसने पुलिस ज़ुल्म के इंतेहा की कहानियों के वीडियो को वायरल किया। दिल्ली पुलिस के एक बहादुर अधिकारी डीसीपी संदीप लांबा महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारते नज़र आए। उनका यह एक्शन वीडियो में रिकॉर्ड हुआ। वायरल हुआ तो पुलिस ने इज्जत बचाने के लिए संदीप लांबा का सिर्फ ट्रांसफर किया। नेता विपक्ष राहुल गांधी ने इस तरह की कई वीडियो क्लिप 22 जुलाई को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाई थी।लेकिन पेलेट गन का इस्तेमाल झकझोरने वाली घटना साबित हुई। द हिन्दू ने एक रिपोर्ट प्रकाशित कर बताया कि दो लोगों को पेलेट गन के छर्रे लगे हैं। लेकिन दिल्ली पुलिस ने पेलेट गन के इस्तेमाल से ही इनकार कर दिया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में बताया गया कि एक प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि उस पर सामने से पेलेट गन चलाई गई। एक लड़की को एम्स में भर्ती कराया गया है। रिपोर्ट में कहा गया कि लड़की आंख जा सकती है। इन्हीं घटनाओं ने सुप्रीम कोर्ट के वकीलों को आज गुरुवार को संविधान की प्रस्तावना पढ़ने को मजबूर किया।

सीजेआई का रुख

सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और कथित बर्बरता के खिलाफ दायर याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से कल 22 जुलाई को साफ इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष जब इस याचिका को जल्द सूचीबद्ध (urgent listing) करने का उल्लेख किया गया, तो अदालत ने इसे खारिज करते हुए सख्त टिप्पणी की।
मुख्य न्यायधीश सूर्यकांत ने याचिका पेश करने पर याचिकाकर्ता के वकील से कहा- "ना अपना समय बर्बाद करें, ना हमारा समय बर्बाद करें।" जब याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उनके पास पुलिस की कथित बर्बरता और धक्का-मुक्की को दर्शाने वाले वीडियो मौजूद हैं, तो CJI ने स्पष्ट लहजे में कहा, "हमें वीडियो देखने में कोई दिलचस्पी नहीं है; हमारे पास वीडियो देखने का समय नहीं है।" याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क दिया था कि छात्र नीट (NEET) परीक्षा के पारदर्शी और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) में सुधार किए जाने जैसे कदमों की गंभीर मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। वकील के तर्कों को बीच में ही रोकते हुए CJI सूर्यकांत ने सिर्फ इतना कहा, "थैंक यू वेरी मच (आपका बहुत-बहुत धन्यवाद)" और याचिका की अर्जेंट लिस्टिंग से मना कर दिया।

चर्चा में रहते हैं सीजेआई

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की पैदाइश 15 मई को सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान एक टिप्पणी से हुई थी, जिसमें CJI सूर्य कांत ने इस बात पर चिंता जताई थी कि बेरोजगार युवा सोशल मीडिया और RTI एक्टिविज़्म की ओर भटक रहे हैं। CJI सूर्यकांत ने अपनी मौखिक टिप्पणी में कहा कि ऐसे युवा समाज में "कॉकरोच" की तरह परजीवी बन रहे हैं। बाद में CJI कांत ने स्पष्ट किया कि उनका इशारा उन लोगों की ओर था जिनके पास फ़र्ज़ी डिग्रियां हैं और जो ऐसी गतिविधियों में शामिल रहते हैं। सीजेआई सूर्यकांत की इस टिप्पणी की देशभर में निन्दा हुई। तमाम जनसंगठनों, राजनीतिक दलों, छात्र समूहों ने डटकर सीजेआई की टिप्पणी का विरोध किया था। आज भी सीजेपी की पैदाइश को लेकर जोक में सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणियों का उल्लेख सोशल मीडिया पर लोग करते हैं।

ताजा घटनाक्रम

- जंतर मंतर पर भारी पुलिस बल तैनात। अभी तक करीब 15,000 से ज्यादा जवान तैनात
- आज गुरुवार शाम 6.30 बजे तक कनॉट प्लेस में सभी दुकानें बंद करने का पुलिस आदेश
-जंतर मंतर को प्रदर्शनकारियों से देर रात खाली कराया जा सकता है
-संसद में छात्रों के मुद्दे पर भारी गतिरोध बना हुआ है। लगातार चौथे दिन भी हंगामा, संसद परिसर में प्रदर्शन
-कॉकरोच जनता पार्टी ने कल शुक्रवार को देशभर में प्रदर्शन का आह्वान किया है
-सीजेपी ने सरकार से बातचीत का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। सरकार का दावा है कि वो अब तक 4 बार उन्हें बातचीत के लिए बुला चुकी है
-पीएम मोदी ने आज गुरुवार को युवकों को भरोसा दिया कि फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर पेपर लीक करने वालों को सजा दिलाई जाएगी
-नेता विपक्ष राहुल गांधी ने मोदी की घोषणा को खारिज करते हुए कहा कि सबसे पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा कराया जाए
-सीजेपी ने भी पीएम मोदी की घोषणा को ठुकराते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा
-विपक्षी दलों ने साफ कहा है कि बिना धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुए संसद में गतिरोध खत्म नहीं होगा