अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस ने ही जंतर-मंतर प्रोटेस्ट को देश की व्यवस्थागत विफलता का नतीजा बताया है। इसने कहा है कि वह प्रोटेस्ट सिर्फ़ भ्रष्टाचार की वजह से नहीं था। युवाओं की नाराजगी केवल किसी एक परीक्षा या एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यवस्था में मौजूद कई कमियों की ओर इशारा करती है।

'युवाओं में नाराजगी सिर्फ़ एक परीक्षा से नहीं'

आरएसएस की तीन दिन चली समन्वय समिति की बैठक के समापन पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में संघ के वरिष्ठ नेता सी.आर. मुकुंद ने जंतर-मंतर आंदोलन पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि बैठक में इस आंदोलन को एक बड़े सामाजिक और प्रशासनिक संकट के संकेत के रूप में देखा गया। मुकुंद ने कहा कि युवाओं की नाराजगी केवल किसी एक परीक्षा या एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यवस्था में मौजूद कई कमियों की ओर इशारा करती है।
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एक सवाल के जवाब में सी.आर. मुकुंद ने कहा कि जंतर-मंतर प्रदर्शन को केवल भ्रष्टाचार का मामला मानना सही नहीं होगा। उन्होंने कहा, 'यह केवल भ्रष्टाचार का प्रश्न नहीं है। इसमें व्यवस्था की कुछ कमियां और कई स्तरों पर सिस्टम की विफलताएं भी शामिल हैं।' उन्होंने कहा कि संघ चाहता है कि देश की सभी व्यवस्थाएं बेहतर तरीके से काम करें। इसके लिए सरकार को ज़रूरी क़दम उठाने होंगे और समाज को भी जागरूक होकर अपनी भूमिका निभानी होगी।

'युवाओं की चिंताओं को समझना ज़रूरी'

आरएसएस नेता ने कहा कि आज का युवा अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। उनके अनुसार, केवल नीट ही नहीं, बल्कि कई अन्य क्षेत्रों में भी युवाओं को व्यवस्था पर भरोसा कम होता दिखाई दे रहा है। 

आरएसएस ने कहा कि शिक्षा, रोजगार और बदलते सामाजिक माहौल से जुड़े मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और युवाओं की चिंताओं को समय रहते दूर करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि सरकार को इन सवालों का समाधान निकालना चाहिए ताकि युवाओं का विश्वास व्यवस्था में बना रहे। सी.आर. मुकुंद ने यह भी कहा कि किसी भी व्यवस्था में सुधार हिंसा, तोड़फोड़ या अराजकता से नहीं लाया जा सकता। उन्होंने कहा, 'बदलाव रचनात्मक और सकारात्मक सोच से आना चाहिए। हमें व्यवस्था को तोड़ने नहीं, बल्कि सुधारने का प्रयास करना चाहिए।'

ऐसा ही आरोप विपक्ष मोदी सरकार पर लगातार लगा रहा है और कहता रहा है कि 12 साल की सत्ता के बाद मोदी सरकार हर मोर्चे पर विफल रहा है। जंतर मंतर पर जब जेन ज़ी प्रदर्शन करने पहुँचा तो उसका भी ऐसा ही आरोप था कि पूरी शिक्षा व्यवस्था चौपट हो गई है और इसको तुरंत सुधारने की ज़रूरत है। शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के आश्वासन के बाद जंतर मंतर प्रोटेस्ट तो बंद हो गया, लेकिन अब जंतर मंतर प्रोटेस्ट करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी ने देश भर के स्कूलों में जर्जर हालत को दुरुस्त करने के लिए अभियान छेड़ रखा है।

राहुल भी आरोप लगाते रहे हैं व्यवस्थागत नाकामी का

राहुल गांधी ने पेपर लीक को 'सिस्टेमैटिक फेल्योर' का नतीजा बताया। उन्होंने कहा कि यह लाखों छात्रों को प्रभावित कर रहा है। यह बयान शिक्षा व्यवस्था में बार-बार होने वाले पेपर लीक, एनटीए की नाकामी और छात्रों के भविष्य पर इसके असर के संदर्भ में था। उनका आरोप है कि यह कोई आकस्मिक गलती नहीं, बल्कि व्यवस्था की व्यवस्थित नाकामी है, जिसमें जवाबदेही नहीं तय होती।

राहुल गांधी ने हाल में कहा था कि पिछले 10 वर्षों में 152 पेपर लीक हुए, 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए, लेकिन कोई दोषी सजा नहीं पाया। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था की सिस्टेमैटिक नाकामी बताया और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। उन्होंने पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराया और मोदी को 'सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री' बताया। विपक्ष ने इसे युवाओं के भविष्य, रोजगार और शिक्षा में खामियों से जोड़ा। हालाँकि, सरकार ने इन आरोपों को राजनीतिक बताया। अब आरएसएस ने भी प्रदर्शनों को सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का नतीजा कहा।

लेकिन इसके साथ ही आरएसएस ने कहा कि केवल सरकार पर जिम्मेदारी डालने से समस्या का समाधान नहीं होगा। संघ नेता मुकुंद ने कहा कि 'सरकार को व्यवस्था सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, समाज को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सभी पक्षों को मिलकर काम करना चाहिए।
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जंतर-मंतर आंदोलन

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जून से आंदोलन शुरू किया था। यह आंदोलन नीट समेत विभिन्न भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के विरोध में था। आंदोलन के दौरान छात्रों ने तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। इस प्रदर्शन को कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का समर्थन भी मिला। करीब 36 दिन तक चले आंदोलन के बाद सीजेपी ने 25 जुलाई 2026 को अपना धरना समाप्त किया। पार्टी ने दावा किया कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और सरकार द्वारा अन्य मांगें स्वीकार किए जाने के बाद आंदोलन खत्म किया गया।

बहरहाल, आरएसएस के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है। क्योंकि अब संघ ने भी यह स्वीकार किया है कि जंतर-मंतर का आंदोलन केवल भ्रष्टाचार का मुद्दा नहीं था, बल्कि इसके पीछे शिक्षा, रोजगार और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी बड़ी समस्याएं थीं। इससे पहले मोहन भागवत ने जेन ज़ी से जोड़ने का अभियान शुरू किया है। जबकि भागवत के बयान से पहले जंतर मंतर प्रोटेस्ट को संघ के ही कई नेताओं ने देश विरोधी बता दिया था। अब यही संघ सिस्टेमैटिक फेल्योर के लक्षण की बात कह रहा है।