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बीजेपी के ख़िलाफ़ चार राज्यों में चुनाव क्यों लड़ेगा जदयू?

केंद्र सरकार में मनमाफ़िक हिस्सा नहीं मिलने से ग़ुस्साए जनता दल यूनाइटेड ने भारतीय जनता पार्टी पर दबाव बढ़ाने के नए-नए रास्तों पर चलने का फ़ैसला किया है। इसके तहत ही पार्टी ने कहा है कि वह चार राज्यों के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ेगी और अपने उम्मीदवार उतारेगी। पार्टी ने इस पर स्थिति साफ़ करते हुए कहा कि वह एनडीए गठबंधन में सिर्फ़ बिहार में है, पूरे देश में नहीं। लिहाज़ा दूसरे राज्यों में वह एनडीए के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ेगी। मतलब साफ़ है, बिहार में बीजेपी के साथ सरकार चलाने वाला जनता दल यूनाइटेड इन चार राज्योें में उसके ख़िलाफ़ उम्मीदवार उतारेगा।

बीजेपी के ख़िलाफ़?

जदयू कार्यकारिणी की बैठक के बाद पार्टी महासचिव के. सी. त्यागी ने कहा, ‘जनता दल यूनाइटेड एनडीए गठबंधन का हिस्सा बिहार के बाहर नहीं है, इसलिए हम चार राज्यों के चुनाव अलग लड़ेंगे।’ ज़ाहिर है, पार्टी इन राज्यों में बीजेपी के ख़िलाफ़ भी अपना उम्मीदवार उतारेगी। हालाँकि त्यागी ने इस पर अलग से कुछ नहीं कहा, पर यह साफ़ है। 
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हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड में अक्टूबर में और दिल्ली में अगले साल जनवरी में विधानसभा चुनाव होने हैंं। जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की मियाद 3 जुलाई को ख़त्म होने को है। समझा जाता है कि वहाँ इस बार राष्ट्रपति शासन को एक बार फिर बढ़ा कर निकट भविष्य में चुनाव कराए जाएँगे।

झारखंड की चुनौती

झारखंड विधानसभा की 81 सीटों पर नवंबर-दिसंबर में चुनाव होने वाले हैं। रविवार को पटना में जनता दल यूनाइटेड की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में झारखंड इकाई के सुझाव पर यह फ़ैसला लिया गया। कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को झारखंड जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष सलखान मुर्मू ने विधानसभा चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ने का प्रस्ताव दिया है।
इसी तरह हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में भी जदयू का कोई विधायक नहीं है। इन राज्यों में पार्टी के पास संगठन तक नहीं है। बिहार के बाहर अरुणाचल प्रदेश अकेला राज्य है, जहां जनता दल यूनाइटेड के सात विधायक हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में इसके सात उम्मीदवार चुनाव जीत गए। बीजेपी के अधिकतम 41 सीटों के बाद वह दूसरे नंबर पर है और इस तरह वहाँ मुख्य विपक्षी दल है। लेकिन पार्टी ने वहाँ यह कहा कि वह सरकार के साथ ही रहेगी।
तो जिन राज्यों में जनता दल यूनाइटेड का कोई जनाधार भी नहीं है, वहाँ वह क्यों अलग से चुनाव लड़ेगी। एक तर्क यह है कि ज़्यादा जगहों पर चुनाव लड़ने से उसे अधिक वोट मिलेंगे और इस आधार पर वह राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल कर सकेगी।
जनता दल यूनाइटेड सिर्फ़ बीजेपी पर दबाव डालने के लिए इन चार राज्यों में चुनाव लड़ेगा और उसके ख़िलाफ़ उम्मीदवार उतारेगा। वह बीजेपी को कितना नुक़सान पहुँचा पाएगी, इस पर संदेह है। पर वह सत्तारूढ़ दल को संकेत दे सकेगी।
एक तरह से वह बिहार में अगले होने वाले चुनाव में अकेले लड़ने का मन भी बना लेगी और अपने कार्यकर्ताओं को भी इसके लिए प्रशिक्षित कर पाएगी।

जनता दल यूनाइटेड ने इतनी बार पाला बदला है और वह इतनी बार बीजेपी के साथ रह चुकी है और उसे छोड़ चुकी है कि उसकी विश्वसनीयता ख़तरे में है। फ़िलहाल इसकी बेहद कम संभावना है कि वह बिहार में बीजेपी का साथ छोड़े। पर वह दूसरे राज्यों में चुनाव लड़ कर इसका अंदाज लगा सकेगी कि ऐसा करने पर क्या हो सकता है, उसे कितना फ़ायदा या नुक़सान हो सकता है।  

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