शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई है। छात्रों की सभी मांगों और सुझावों को गंभीरता से सुना गया है और सरकार आगे की कार्रवाई से पहले इन पर विचार करेगी।
झारखंड के छात्रों का आंदोलन जारी है। आइसा की नेहा अनशन पर बैठे छात्रों के बीच
झारखंड में सरकारी नौकरियों की प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित धांधली, पेपर लीक और भ्रष्टाचार के खिलाफ पिछले 14 दिनों से चल रहा छात्रों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। 7 अगस्त 2026 को रांची स्थित मोराबादी स्टेट गेस्ट हाउस में झारखंड सरकार के मंत्रियों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल और प्रदर्शनकारी छात्रों के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के बीच 2 घंटे तक चली पहले दौर की बातचीत बेनतीजा (inconclusive) रही।
प्रमुख मांगों पर सहमति न बनने के कारण छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
रांची के मोराबादी स्टेट गेस्ट हाउस में 5 सदस्यीय सरकारी समिति और 'JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच' के 10 छात्र प्रतिनिधियों के बीच दो घंटे लंबी बातचीत हुई। इस समिति में राज्य के शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार, मंत्री चंपाई सोरेन/चमरा लिंडा, दीपिका पांडे सिंह, संजय सिंह तथा विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह (IAS) शामिल थे। छात्र नेता रवींद्र पासवान ने बैठक के बाद कहा, "सरकार के साथ यह पहली आधिकारिक वार्ता थी। सरकार ने हमारी बातें सुनीं, लेकिन हमारी मुख्य मांगों (14वीं JPSC PT परीक्षा रद्द करने और CBI जांच) पर कोई ठोस निर्णय या सहमति नहीं बन सकी। इसलिए हमारा आंदोलन फिलहाल जारी रहेगा।"
शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई है। छात्रों की सभी मांगों और सुझावों को गंभीरता से सुना गया है और सरकार आगे की कार्रवाई से पहले इन पर विचार करेगी।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बयान
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार छात्रों की समस्याओं का व्यावहारिक और ठोस समाधान निकालने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल रांची ही नहीं, बल्कि राज्य के सभी जिलों के युवाओं, शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं से सुझाव एकत्रित किए जाएंगे ताकि एक व्यापक और सर्वसमावेशी नीति बनाई जा सके। उन्होंने आश्वासन दिया कि समयबद्ध तरीके से आवश्यक सुधार और व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव किए जाएंगे।झारखंड के छात्रों को किसने मजबूर किया
छात्रों के इस व्यापक आक्रोश के पीछे कई वर्षों से लंबित परीक्षाएं, लगातार हो रहे पेपर लीक और रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप हैं:
- 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (PT): जुलाई में घोषित हुए परीक्षा परिणामों के बाद अभ्यर्थियों ने OMR शीट में गड़बड़ी, धांधली और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए।
- JSSC-CGL परीक्षा विवाद: 2023 की JSSC-CGL परीक्षा में बड़े पैमाने पर पेपर लीक हुआ था (CID जांच में पाया गया कि 150 में से 135 प्रश्नों के उत्तर लीक हो चुके थे)। परीक्षा रद्द कर दोबारा कराई गई, लेकिन अभ्यर्थियों का आरोप है कि दोबारा हुई परीक्षा के प्रश्न भी पहले से वायरल सामग्री से मिलते-जुलते थे।
- एजेंसी और अधिकारियों पर कार्रवाई: CID जांच के तहत परीक्षा कराने वाली लखनऊ की निजी एजेंसी TDPL (TSR Data Processing Private Limited) के निदेशकों, कर्मचारियों और उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता सहित अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि, छात्र इस जांच से संतुष्ट नहीं हैं।
छात्रों की प्रमुख मांगें
'JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच' के बैनर तले रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में एकत्र हुए हजारों अभ्यर्थी निम्नलिखित मांगें रख रहे हैं:
- 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा (PT) को तुरंत रद्द किया जाए और पारदर्शी तरीके से दोबारा परीक्षा कराई जाए।
- पिछले 7 वर्षों में JPSC और JSSC द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं की CBI और ED से स्वतंत्र जांच कराई जाए।
- परीक्षाओं में शामिल निजी एजेंसियों (जैसे TDPL) और परीक्षा माफियाओं के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो।
- OMR शीट की कार्बन कॉपी, श्रेणीवार कट-ऑफ (UR, EWS, BC-I, BC-II, SC, ST) और उत्तर कुंजी सार्वजनिक की जाए।
- UPSC/SSC की तर्ज पर झारखंड में एक पारदर्शी और निश्चित भर्ती कैलेंडर (Recruitment Calendar) लागू किया जाए।
भूख हड़ताल, विधानसभा मार्च और घटिया राजनीति की घटनाएं
छात्र नेता की भूख हड़ताल: आंदोलन का चेहरा बने छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो और उनके साथियों (ब्राह्मानंद मंडल, महेंद्र प्रसाद मंडल आदि) की भूख हड़ताल का स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। सोनम वांगचुक की अपील के बाद उन्होंने पानी-नमक लेना शुरू किया था, लेकिन अन्न का त्याग जारी है।
अस्पताल में भर्ती: भूख हड़ताल के कारण छात्र नेता राहुल क्रांति और ब्रज किशोर की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें रांची सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने उनसे मुलाकात कर कुशलक्षेम जाना।
स्याही फेंकने की घटना: झारखंड विधानसभा की ओर मार्च के दौरान बिरसा मुंडा चौक के पास AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर एक व्यक्ति ने स्याही फेंक दी। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया। नेहा बोरा ने कहा कि वह ऐसे हमलों से डरने वाली नहीं हैं। आइसा और छात्र नेताओं का कहना है कि बीजेपी इस आंदोलन को खराब करना चाहती है। वो इस आंदोलन में घुसपैठ का प्रयास कर रही है। जंतर मंतर पर छात्रों के हाथों मात खाने के बाद वो अब यहां उसका बदला लेना चाहते हैं।झारखंड में युवाओं का यह आंदोलन अब केवल एक परीक्षा के विरोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे राज्य की परीक्षा व चयन प्रणाली में अमूलचूल सुधार की मांग बन चुका है।