सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए जाने से ठीक एक दिन पहले जोधपुर हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन ने CJI को पत्र लिखकर उनके तबादले की मांग की थी।
राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा
राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता ने ही आरोप नहीं लगाए हैं, बल्कि वहाँ के वकील काफ़ी पहले से ही उनसे बेहद नाराज़ थे। जस्टिस संदीप मेहता द्वारा उन पर गंभीर आरोप लगाए जाने से एक दिन पहले ही जोधपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर राजस्थान से बाहर उनके तबादले की मांग की थी।
वकीलों का कहना था कि वर्तमान हालात में बार और बेंच यानी वकील व न्यायपालिका के बीच बेहतर तालमेल नहीं बन पा रहा है। ऐसे में अदालत का माहौल सामान्य रखने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट में जल्द स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की जाए और कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का दूसरे राज्य में तबादला किया जाए।
CJI को भेजे गए पत्र में क्या कहा गया?
25 अगस्त को राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन जोधपुर के अध्यक्ष रणजीत जोशी ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा। पत्र में कहा गया कि वर्तमान परिस्थितियों में बार और बेंच के बीच अपेक्षित सौहार्दपूर्ण संबंध नहीं बन पा रहे हैं। वकीलों के साथ संवाद की कमी और उनके साथ व्यवहार को लेकर लगातार मतभेद पैदा हो रहे हैं।
पत्र में यह भी कहा गया कि छोटे चैंबर या बैठने की जगह उपलब्ध कराने की वकीलों की बुनियादी ज़रूरतों जैसे मामलों में भी अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। इससे अधिवक्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है।
एडवोकेट्स एसोसिएशन ने अपने पत्र में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा का राजस्थान से बाहर किसी अन्य हाईकोर्ट में तबादला करने की भी मांग की, ताकि बार और बेंच के बीच बेहतर माहौल दोबारा बन सके।
साथ ही उन्होंने कहा कि अदालत की गरिमा बनाए रखने, न्यायिक कार्य सुचारु रूप से चलाने और स्वस्थ माहौल बनाने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट में जल्द से जल्द स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट जज ने लगाए गंभीर आरोप
वकीलों के इस पत्र के अगले ही दिन यानी बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संदीप मेहता द्वारा लिखे गए पत्रों की जानकारी सामने आई, जिनमें उन्होंने भी कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के तबादले की मांग की थी। जस्टिस मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के अन्य सदस्यों को लिखे तीन अलग-अलग पत्रों में आरोप लगाया कि उन्हें एक्टिंग चीफ जस्टिस के खिलाफ कई शिकायतें मिली हैं, जिनसे उनकी ईमानदारी और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं।
लिस्टिंग में कथित हेरफेर का आरोप
जस्टिस मेहता ने आरोप लगाया है कि कार्यवाहक चीफ जस्टिस के रूप में जस्टिस शर्मा ने ‘मास्टर ऑफ रोस्टर’ की अपनी प्रशासनिक शक्ति का इस्तेमाल करते हुए कुछ मामले दूसरे बेंचों से हटाकर अपनी अध्यक्षता वाली बेंच के सामने सूचीबद्ध कराए। उनका कहना है कि कुछ मामले बिना साफ़ या सही कारण के दूसरी बेंचों से वापस लेकर जस्टिस शर्मा की अदालत में भेजे गए।
जस्टिस मेहता ने दावा किया कि उन्होंने पहले भी CJI को ऐसे मामलों की जानकारी दी थी। उनके मुताबिक CJI ने शुरू में मामलों की सूची मांगी थी और बाद में उन्हें आश्वासन दिया था कि सही कार्रवाई की जाएगी, लेकिन उनके पत्रों के अनुसार अब तक राजस्थान हाईकोर्ट के लिए किसी दूसरे राज्य से नियमित चीफ जस्टिस नियुक्त करने की उनकी मांग पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई।
'शक्तियों के दुरुपयोग' का आरोप
जस्टिस संदीप मेहता ने अपने पत्रों में आरोप लगाया कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश द्वारा अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया गया है।उन्होंने लिखा कि यदि उन्हें तुरंत राजस्थान से ट्रांसफर नहीं किया गया तो यह न्यायपालिका और संस्थान के हित में नहीं होगा। उन्होंने आग्रह किया कि संजीव प्रकाश शर्मा का तत्काल किसी अन्य हाईकोर्ट में तबादला किया जाए और राजस्थान हाईकोर्ट में बाहर के किसी हाईकोर्ट से नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की जाए।यह पूरा मामला न्यायपालिका के प्रशासनिक कामकाज से जुड़ा है। फिलहाल इस पर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम या भारत के मुख्य न्यायाधीश की ओर से कोई सार्वजनिक निर्णय सामने नहीं आया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कॉलेजियम इन शिकायतों और मांगों पर क्या फैसला लेता है।
मामला क्यों अहम है?
जोधपुर के वकीलों ने पहले ही कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के तबादले की मांग की थी। अगले ही दिन सुप्रीम कोर्ट के जज ने भी गंभीर आरोप लगाते हुए तबादले की सिफारिश की। दोनों घटनाओं के सामने आने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट के प्रशासनिक माहौल को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम और भारत के मुख्य न्यायाधीश के स्तर पर होना है।