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साम्प्रदायिक हिंसा की रिपोर्टिंग में संयम बरतें पत्रकारः एडिटर्स गिल्ड

साम्प्रदायिक दंगों की रिपोर्टिंग के मामले में एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (ईजीआई) ने संपादकों और पत्रकारों से अत्यधिक संयम बरतने को कहा है। गिल्ड ने पत्रकारों से उच्चस्तरीय प्रोफेशनल स्टैंडर्ड (उच्चतम पेशेवर मानक) का पालन करने का आग्रह किया है।एडिटर्स गिल्ड की यह सलाह ऐसे समय आई है, जब कई राज्यों में साम्प्रदायिक हिंसा की घटनाएं हुई हैं। दिल्ली की जहांगीरपुरी हिंसा को लेकर तमाम मीडिया रिपोर्ट पर सवाल उठ रहे हैं। खासतौर पर अल्पसंख्यकों का पक्ष मीडिया में ठीक से पेश न किए जाने और सिर्फ एक ही समुदाय की बातों को बार-बार बताने के आरोप मीडिया पर लगे हैं। इसी तरह खरगोन, करोली, हुबली आदि की घटनाओं पर मीडिया ने सरकार से सवाल पूछने की हिम्मत नहीं जुटाई।

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गिल्ड ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि जबकि एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया दंगा जैसी स्थितियों में ऑन-ग्राउंड पत्रकारों के सामने आने वाले खतरों से अवगत है। लेकिन इस पर ध्यान दिया जाए कि दो समुदायों के बीच झड़पों की रिपोर्ट के मूल्यांकन और प्रस्तुति में उचित मेहनत की कमी रही है। विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और सोशल मीडिया में यह साफ दिखाई दिया। गिल्ड ने कहा कि समाचार को सबसे पहले पेश करने और दर्शकों का ध्यान खींचने के चक्कर में कई संपादक और पत्रकार निष्कर्ष पर बहुत जल्द पहुंच जाते हैं और बिना सोचे समझे दूसरे समुदाय पर घटना की जिम्मेदारी डालने लगते हैं। जिनमें न तथ्य होते हैं और न संदर्भ होते हैं।

गिल्ड ने कहा कि इसके नतीजे दूरगामी निकलेंगे। जैसा कि देश में लंबे समय से चल रही साम्प्रदायिक हिंसा के मामलों से पता चलता है, ज्यादातर घटनाएं वैसी नहीं होतीं, जैसी वो दिखाई देती हैं यानी उनकी सच्चाई कुछ और होती हैं। ऐसे तमाम मामलों में राजनेताओं, पुलिस, अधिकारियों और अन्य गैर सरकारी लोगों की भूमिका के दस्तावेज मौजूद हैं। इसलिए, संपादकों के लिए यह आवश्यक है कि वे उत्तेजना के इस माहौल में अपने अनुभव और दृष्टिकोण को न्यूज़ रूम में लाएं।
एडिटर्स गिल्ड ने कहा कि हर पत्रकार को निष्पक्षता, तटस्थता और संतुलन बनाए रखने के लिए अतिरिक्त प्रयास करना चाहिए। उन्हें ध्रुवीकरण के बड़े खेल में खुद को मोहरा नहीं बनने देना चाहिए।

गिल्ड ने कहा, पत्रकारिता के कई महान उद्देश्य हैं और साथ ही पेशेवर दायित्व भी हैं। अफवाहों को हवा न देकर सामाजिक शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को बनाए रखने में मदद करना, पक्षपातपूर्ण न होने से; नागरिक को नागरिक के खिलाफ नहीं खड़ा करना - एक योग्य पेशेवर दायित्व है।

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