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असहमति को राष्ट्रविरोधी बताना संवैधानिक मूल्यों पर चोट: जस्टिस चंद्रचूड़ 

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने लोकतंत्र में असहमति की महता पर फिर से ज़ोर दिया है। उन्होंने कहा कि असहमति लोकतंत्र के लिए सेफ़्टी वॉल्व है और असहमति रखने वालों को राष्ट्रविरोधी या लोकतंत्र विरोधी बताना संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता पर चोट करती है। इससे पहले 2018 में भी जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा था, ‘असहमति लोकतंत्र के लिए सेफ़्टी वॉल्व है। अगर आप इन सेफ़्टी वॉल्व को नहीं रहने देंगे तो प्रेशर कुकर फट जाएगा।'

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार देश के बहुसंख्यक समाज को परिभाषित करने वाले "मूल्यों और पहचान पर एकाधिकार" का दावा नहीं कर सकती है।

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बहुसंख्यक बहुल राजनीति को केंद्र में रखने के लिए सत्तारूढ़ दल की आलोचना बढ़ती ही जा रही है। अब न्यायपालिका के लोग भी मुखर हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के जज डी. वाई. चंद्रचूड़ ने किसी दल या व्यक्ति का नाम लिए बग़ैर कहा कि संविधान निर्माताओं ने ‘हिन्दू भारत’ या ‘मुसलिम भारत’ बनाने के बारे में कभी नहीं सोचा था, बल्कि वे ‘भारत गणराज्य’ बनाना चाहते थे। 

उन्होंने गुजरात के अहमदाबाद में ‘द ह्यूज़ दैट मेक इंडिया : फ्रॉम प्लूरलिटी टू प्लूरलिज़म’ विषय पर व्याख्यान देते हुए यह कहा। वह 15वें जस्टिस पी. डी. देसाई मेमोरियल लेक्चर में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि संविधान में बहुलतावाद की मूल अवधारण है, कोई व्यक्ति या संस्था भारत के विचार पर एकाधिकार होने का दावा नहीं कर सकता। चंद्रचूड़ ने कहा :

‘संविधान बनाने वालों ने हिन्दू भारत और मुसलमान भारत की अवधारणा को खारिज कर दिया था। उन्होंने सिर्फ भारतीय गणराज्य को स्वीकार किया था।’


डी. वाई. चंद्रचूड़, जज, सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के जज ने कहा कि संविधान बनाने वालों ने भरोसा किया था कि आने वाली पीढ़ियाँ एक साझा रिश्ता बनाएंगी, वे एकरूपता के बजाय बहुलतावाद को अपनाएंगी और यही भारत होने का विचार है।
चंद्रचूड़ ने यह भी कहा कि असहमति को देशद्रोह कहना या लोकतंत्र विरोधी क़रार देना लोकतंत्र पर हमला है।
उन्होंने कहा, एक वैध सरकार बातचीत के प्रति समर्पित रहती है, वह राजनीतिक विरोध का स्वागत करती है, उसे दबाती नहीं है। उन्होंने कहा : 

‘नियम-क़ानून पर चलने वाला राज्य यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल वैध विरोध को कुचलने में न हो, बल्कि बातचीत के लिए उपयुक्त वातावरण बनाने में हो।’


डी. वाई. चंद्रचूड़, जज, सुप्रीम कोेर्ट

चंद्रचूड़ ने कहा कि उदार लोकतांत्रिक देश नागरिकों को हर तरीके से अपनी असहमति व्यक्त करने देता है, इसमें विरोध प्रदर्शन भी शामिल है। 

चंद्रचूड़ की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब उत्तर प्रदेश समेत कई राज्य सरकारों ने ऐसे कई लोगों के ख़िलाफ़ राजद्रोह के मामले दर्ज कर दिए हैं जो उनकी नीतियों का विरोध करते हैं। नागरिकता  संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ हुए आन्दोलन में ऐसे कई उदाहरण आए हैं, इनमें मानवाधिकार अधिकारों के लिए काम करने वाले और राजनीतिक कार्यकर्ता भी शामिल हैं। 

केंद्र सरकार और सत्तारूढ़ बीजेपी का भी यही रवैया है। मीडिया का एक बड़ा वर्ग इसमें शामिल है। प्रधानमंत्री या सरकार का विरोध करने वालों को पाकिस्तान-परस्त, देशद्रोही और टुकड़े-टुकड़े गैंग का सदस्य माना जाता है। चंद्रचूड़ की टिप्पणी ऐसे में बेहद अहम है।
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