एनडीए ने कर्नाटक के चुनाव अधिकारी को ज्ञापन देकर कहा है कि बीएलओ घर घर जाकर फॉर्म का सत्यापन नहीं कर रहे हैं। जबकि इसके लिए सख्त आदेश है। कांग्रेस ने इसका जवाब देते हुए उन्हें बिहार, बंगाल के एसआईआर की याद दिलाई है।
कर्नाटक एनडीए के नेता सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में
कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision - SIR) को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। एनडीए (NDA) नेताओं ने इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। इसके जवाब में कांग्रेस के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने एनडीए नेताओं को बिहार और बंगाल के एसआईआर में विपक्ष के आरोपों को याद दिलाया है।
एनडीए का आरोप: चुनावी प्रक्रिया में नियमों की धज्जियां उड़ीं
सोमवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) वी. अनबुकुमार से मुलाकात की और एक औपचारिक शिकायत सौंपी। एनडीए नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के संशोधन में जुटे अधिकारी स्वीकृत नियमों और दिशानिर्देशों की पूरी तरह अनदेखी कर रहे हैं। शिकायत में कहा गया कि बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) को घर-घर जाकर सत्यापन (Door-to-Door Verification) करने का सख्त निर्देश है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पालन नहीं किया जा रहा है।
सामुदायिक स्थानों पर शिविर क्यों
विपक्ष का कहना है कि घर घर जाने के बजाय समुदाय भवनों, मस्जिदों और बीएलओ के निजी आवासों पर मतदाता फॉर्म भरे जा रहे हैं। इसके लिए बकायदा व्हाट्सएप (WhatsApp) ग्रुप बनाकर लोगों को इन जगहों पर आने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जो कि निर्वाचन आयोग के नियमों का सीधा उल्लंघन है। विपक्षी दलों ने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि वह इन सामूहिक नामांकन शिविरों के जरिए "अवैध प्रवासियों (जैसे बांग्लादेशी प्रवासियों)" के नाम मतदाता सूची में जुड़वाने का काम कर रही है। उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कुछ वीडियो भी जारी किए हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि इस पूरी प्रक्रिया की तुरंत जांच कराई जाए, अब तक भरे गए सभी फॉर्म का दोबारा घर-घर जाकर अनिवार्य रूप से सत्यापन हो और दोषी अधिकारियों व राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
कांग्रेस के रणदीप सुरजेवाला का एनडीए पर जवाबी हमला
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने एनडीए नेताओं को एक्स पर जवाब दिया। उन्होंने लिखा- कर्नाटक में "स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न" (SIR) का विरोध करने वाले कर्नाटक के पूरी तरह से बंटे हुए और निराश BJP नेताओं (जिनके साथ निश्चित रूप से एचडी कुमारस्वामी भी शामिल हैं) का अजीब पाखंड। हम, कांग्रेस और कर्नाटक कांग्रेस के लोग, SIR के प्रति उनके विरोध का स्वागत करते हैं और कर्नाटक के BJP और JD-S नेताओं को चुनौती देते हैं कि वे हिम्मत दिखाएं और ये बातें कहें -
- 1. कि विधानसभा चुनावों से पहले बिहार में SIR के तहत 47 लाख वोट हटाना गलत था और पिछले बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों को रद्द कर दिया जाना चाहिए।
- 2. कि विधानसभा चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल में SIR के तहत 84 लाख वोट हटाना गलत था और पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजों को रद्द कर दिया जाना चाहिए।
- 3. कि विधानसभा चुनावों से पहले असम में SIR के तहत 11 लाख वोट हटाना गलत था और पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजों को रद्द कर दिया जाना चाहिए।
- 4. कि SIR प्रक्रिया गलत और लोकतंत्र-विरोधी है, साथ ही यह लोकतंत्र और संविधान पर हमला है और पूरे भारत में SIR प्रक्रिया को तुरंत खत्म कर दिया जाना चाहिए।
- 5. कि ECI का SIR शुरू करने का कदम पूरी तरह गलत है और असल में यह वोट हटाने की एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका मकसद गणतंत्र और उसके लोगों को कमजोर करना है।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने आरोपों को खारिज किया
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने विपक्ष के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इस चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं कर रही है। शिवकुमार ने कहा, "सरकार इस प्रक्रिया को लेकर बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चला रही है और विपक्ष इसी बात से घबराया हुआ है। हमारी सरकार ने सुनिश्चित किया है कि करीब 4.5 करोड़ लोगों को जाति और आय प्रमाण पत्र ऑनलाइन डाउनलोड करने की सुविधा मिले। विपक्ष बस यह चाहता है कि गरीब और अल्पसंख्यक समुदाय के लोग दिक्कतों का सामना करें।"
बांग्लादेशी प्रवासियों के आरोपों पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "हमें बताएं कि बांग्लादेशी प्रवासी कहां हैं? अगर वे यहां हैं, तो जब आपकी (भाजपा/एनडीए) सरकार सत्ता में थी, तब आपने उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की? उन्हें जितनी चाहे आलोचना करने दें। आलोचनाएं मिट जाती हैं, लेकिन अच्छा काम हमेशा याद रहता है।" उन्होंने साफ किया कि सरकार हर नागरिक के मतदान के अधिकार को सुरक्षित कर रही है। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भी इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पूरी तरह सतर्क (Alert) रहने के निर्देश दिए हैं।
कर्नाटक में मतदाता सूची के इस विशेष गहन संशोधन (SIR) के तहत घर-घर जाकर गणना करने का यह चरण 30 जून से शुरू हो चुका है और यह 29 जुलाई तक जारी रहेगा।