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सुप्रीम कोर्ट पहुंचे किसान; सोशल डिस्टेंसिंग न होने पर FIR दर्ज

मोदी सरकार किसानों तक अपनी बात पहुंचाने की लगातार कोशिश कर रही है लेकिन किसानों को डर है कि नए कृषि क़ानूनों के लागू होने से उनकी खेती ख़त्म हो जाएगी। इसे लेकर किसानों और सरकार के बीच गतिरोध जारी है। दिल्ली के टिकरी और सिंघू बॉर्डर्स पर बड़ी संख्या में किसान इकट्ठा हो चुके हैं और सरकार के सामने कोई विकल्प नहीं बचा है कि वह कैसे किसानों को समझाए। हालांकि सरकार ने कहा है कि वह किसी भी वक़्त बातचीत करने के लिए तैयार है। 

किसान अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। भारतीय किसान यूनियन (भानू) की ओर से कोर्ट में याचिका दायर कर तीनों कृषि क़ानूनों को चुनौती दी गई है। इस याचिका में अदालत से इस मामले में दख़ल देने का अनुरोध किया गया है। अदालत में कृषि क़ानूनों को लेकर छह याचिकाएं पहले से लंबित हैं। अक्टूबर में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर उसका जवाब मांगा था। अब इन सभी याचिकाओं पर दिसंबर के अंतिम सप्ताह में सुनवाई होगी। 

दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने सिंघु बॉर्डर पर धरना दे रहे किसानों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कर ली है। यह एफ़आईआर किसानों द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन किए जाने को लेकर महामारी क़ानून के अंतर्गत अलीपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई है। 

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इससे पहले गुरूवार को एक ओर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कृषि क़ानूनों को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेन्स की तो दूसरी ओर किसानों ने भी सरकार को प्रेस कॉन्फ्रेन्स कर जवाब भेजा। 

किसान नेताओं ने गुरूवार शाम को कहा कि ये बात सरकार ने मान ली है कि ये क़ानून व्यापारियों के लिए बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि कृषि राज्य का विषय है, इसलिए केंद्र सरकार को इसके लिए क़ानून बनाने का कोई अधिकार नहीं है। 

किसान नेता बूटा सिंह ने कहा कि किसानों ने 10 दिसंबर तक का अल्टीमेटम दिया था। अगर प्रधानमंत्री हमारी बात नहीं सुनते हैं और इन कृषि क़ानूनों को वापस नहीं लेते हैं तो हम रेलवे ट्रैक ब्लॉक कर देंगे। उन्होंने कहा कि किसानों की आज हुई बैठक में यह फ़ैसला लिया गया है कि देश भर में लोग रेलवे ट्रैक पर कब्जा करेंगे और इसकी तारीख़ जल्दी तय की जाएगी। 

किसान नेताओं ने कहा कि वे पूरी तरह एकजुट हैं और सरकार को उनके पक्ष में जल्दी फ़ैसला लेना चाहिए। भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि जब तक ये बिल वापस नहीं होंगे, एमएसपी पर क़ानून नहीं बनेगा तब तक किसान यहां से नहीं जाएंगे। 

किसानों को मनाने में भले ही मोदी सरकार ने पूरी ताक़त झोंक दी हो लेकिन किसान टस से मस होने के लिए तैयार नहीं हैं।
किसानों और सरकार के बीच कई दौर की बातचीत फ़ेल होने के बाद हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। क्योंकि ठंड के दिनों में बड़ी संख्या में बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर मौजूद हैं और कोरोना का भी ख़तरा मंडरा रहा है। मोदी लगातार अपने कृषि क़ानूनों की ख़ूबियों को गिना रही है और इन्हें किसान के हित में बता रही है। लेकिन किसानों का कहना है कि ये क़ानून डेथ वारंट की तरह हैं। 

सुनिए, किसान आंदोलन पर चर्चा- 

'एमएसपी पर देंगे लिखित आश्वासन'

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने प्रेस कॉन्फ्रेन्स में कहा, ‘किसानों के मन में शंका थी कि एमएसपी पर ख़रीद नहीं होगी लेकिन प्रधानमंत्री और मैंने स्वयं कहा कि एमएसपी पर ख़रीद होती रहेगी। हमारी सरकार की प्रतिबद्धता एमएसपी को लेकर बनी रहेगी और हम इसके लिए लिखित आश्वासन देने के लिए तैयार हैं।’  

‘बातचीत के लिए तैयार हैं’

तोमर ने कहा कि सरकार लगातार बातचीत कर रही है और किसानों द्वारा उठाए गए सवालों को लेकर सरकार की ओर से उनके पास प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार आगे भी बातचीत के लिए तैयार है। तोमर ने मोदी सरकार द्वारा किसानों के लिए चलाई जा रही कई योजनाओं का जिक्र भी किया। 

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तोमर ने कहा, ‘देश में 86 फ़ीसदी छोटे किसान हैं। छोटे किसान के पास निवेश करने कोई नहीं जाता। उसके पास इतना पैसा नहीं होता कि निवेश कर सके। वह अच्छी खेती करना चाहता है, टेक्नॉलॉजी का उपयोग करना चाहता है। इसलिए नए क़ानून बनाए गए जिससे उसे फ़ायदा मिले।’ 

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खारिज कर दिया था प्रस्ताव

इससे पहले बुधवार शाम को किसान नेताओं ने केंद्र सरकार की ओर से भेजा गया प्रस्ताव खारिज कर दिया था और आंदोलन तेज़ करने की बात कही थी। किसान नेताओं ने कहा था कि जियो के जितने भी प्रोडक्ट हैं, देश भर में उनका बहिष्कार किया जाएगा। 14 दिसंबर को पूरे देश में जिला मुख्यालयों का घेराव किया जाएगा। देंगे। इसके अलावा सभी राज्यों में धरने-प्रदर्शन जारी रहेंगे। 

किसान अपनी मांग को लेकर डटे हुए हैं और पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। दूसरी ओर, केंद्र सरकार भी कृषि क़ानूनों को वापस लेने के लिए तैयार नहीं दिखती। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और किसानों के बीच टकराव बढ़ेगा, इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
किसान नेताओं ने कहा था कि वे 12 दिसंबर तक दिल्ली-जयपुर हाईवे को जाम कर देंगे। इसके अलावा अडानी-अंबानी के प्रोडक्ट्स का बहिष्कार करेंगे और बीजेपी के मंत्रियों-नेताओं का घेराव करने की बात कही थी। 12 दिसंबर को पूरे देश में एक दिन के लिए टोल प्लाजा को फ्री करने की बात भी किसान नेताओं ने कही थी।

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