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यही वो वाहन है जो कथित तौर पर मंत्री पुत्र आशीष मिश्रा चला रहा था

लखीमपुरः किसानों पर गाड़ी चढ़ाई थी, मंत्री पुत्र के खिलाफ चार्जशीट

लखीमपुरी खीरी में किसानों पर वाहन चढ़ाने वाले आरोपी आशीष मिश्रा के खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास, दंगा और शस्त्र कानून में आरोपपत्र लोकल कोर्ट में दाखिल किया गया है। आशीष मिश्रा केंद्रीय गृहराज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी का बेटा है। इस मामले अदालत की कार्यवाही 16 दिसंबर से शुरू होगी। एडीजे प्रथम की कोर्ट में दाखिल की गई चार्जशीट में आशीष मिश्रा समेत कुल 14 आरोपी हैं। कोर्ट ने कहा कि आरोप तय करने के लिए पर्याप्त आधार हैं।
Lakhimpur kheeri case Charge sheet presented against central minister son - Satya Hindi
किसानों की हत्या का आरोपी आशीष मिश्रा, ये केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी का बेटा है

इससे पहले 13 आरोपियों ने बेगुनाह बताते हुए एडीजे प्रथम की कोर्ट में अर्जी दी थी लेकिन कोर्ट ने उसे ठुकरा दिया था। आशीष मिश्रा को 9 अक्टूबर को यूपी के लखीमपुर खीरी में 3 अक्टूबर 2021 को हुई हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। हाईकोर्ट ने इस साल 15 जुलाई को सुनवाई पूरी करने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।

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पिछले साल उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा लखीमपुर की यात्रा से पहले तीन अक्टूबर 2021 को हिंसा में आठ लोग मारे गए थे। इसमें से चार लोगों की कार से कुचलकर मौत हो गई थी और इसके बाद हुई हिंसा में कार में सवार चार अन्य लोग मारे गए थे। दावा किया जाता रहा है कि कार में सवार लोग यूपी के मंत्री का स्वागत करने आए भाजपा कार्यकर्ताओं के काफिले का हिस्सा थे। जबकि किसान विरोध प्रदर्शन का हिस्सा थे।
आशीष को बीते साल 9 अक्टूबर को भारी दबाव के बाद ही गिरफ्तार किया जा सका था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट भी बेहद सख़्त टिप्पणी कर चुका था। लेकिन फरवरी में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने आशीष को जमानत दे दी थी।

आशीष की जमानत के खिलाफ लखीमपुर हिंसा के पीड़ित परिवारों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बेहद अहम टिप्पणी करते हुए कहा था कि पीड़ितों को सुनने से इनकार कर दिया गया और हाई कोर्ट ने जल्दबाजी दिखाई जिस वजह से जमानत दिए जाने के आदेश को रद्द किया जाता है। इसके बाद आशीष मिश्रा ने 24 अप्रैल को उत्तर प्रदेश में एक स्थानीय अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बाद उसे वापस लखीमपुर जेल में भेज दिया गया। 

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