IDBI बैंक को बेचने की कोशिश बड़ा स्कैंडल साबित हो रही है। Business world ने आज खुलासा किया है कि LIC डायरेक्टर जी. महालिंगम फेयरफैक्स के नियंत्रण वाली थॉमस कुक इंडिया के बोर्ड में भी रहे। ये हितों का टकराव है या खुली लूट?
आईडीबीआई बैंक को मोदी सरकार क्यों बेचना चाहती है
IDBI बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया के दौरान कनाडा के कारोबारी समूह फेयरफैक्स (Fairfax Financial Holdings) से जुड़ी भारतीय कंपनियों के बोर्ड में कई पूर्व सरकारी अधिकारियों, नियामकों और सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्तियां हुईं। Business world की एक पड़ताल के मुताबिक, इस नेटवर्क में नीति आयोग के पूर्व सीईओ, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व डिप्टी गवर्नर, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पूर्व सदस्य, पूर्व रक्षा सचिव और LIC के पूर्व अध्यक्ष समेत 17 लोग शामिल हैं।
इन नियुक्तियों में सबसे महत्वपूर्ण मामला गुरुमूर्ति महालिंगम का है। वह सात महीने तक भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) और फेयरफैक्स के नियंत्रण वाली थॉमस कुक इंडिया, दोनों के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक रहे। इस दौरान LIC IDBI बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेच रही थी, जबकि फेयरफैक्स बैंक को खरीदने के लिए बोली लगा रही थी।
Business world की रिपोर्ट के मुताबिक, इन नियुक्तियों को लेकर किसी व्यक्ति पर IDBI बैंक की बिक्री को प्रभावित करने का आरोप नहीं लगाया गया है। ऐसा कोई सार्वजनिक प्रमाण भी नहीं है कि इन अधिकारियों ने बैंक की बिक्री प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया। लेकिन नियुक्तियों की तारीखें, संबंधित संस्थानों में उनकी भूमिकाएं और फेयरफैक्स के भारतीय कारोबार में पूर्व अधिकारियों की मौजूदगी कई सवाल खड़े करती है।
LIC और थॉमस कुक के बोर्ड में एक साथ रहे महालिंगम
19 दिसंबर 2025 को गुरुमूर्ति महालिंगम फेयरफैक्स के नियंत्रण वाली थॉमस कुक इंडिया के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक नियुक्त हुए। उस समय वह LIC के स्वतंत्र निदेशक भी थे। LIC IDBI बैंक में 30.24 फीसदी हिस्सेदारी रखती थी। यह बैंक के बिक्री के लिए पेश किए गए नियंत्रणकारी हिस्से का आधा था। महालिंगम LIC के निवेश संबंधी फैसलों की निगरानी करने वाली निवेश समिति के सदस्य भी थे।रिपोर्ट के मुताबिक, महालिंगम की थॉमस कुक में नियुक्ति के महज 20 दिन बाद सरकार ने IDBI बैंक की बिक्री के लिए अंतिम बोलियां आमंत्रित कीं। अगले सात महीनों के दौरान IDBI बैंक की बिक्री प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं। पहली बोलियां सफल नहीं हुईं, आरक्षित मूल्य को दरकिनार किया गया और फेयरफैक्स ने संशोधित प्रस्ताव पेश किया। इसके बाद उस प्रस्ताव को खोला गया। इस पूरी अवधि में महालिंगम दोनों कंपनियों के बोर्ड में बने रहे। एक तरफ वह बैंक बेचने वाली LIC के निदेशक थे, तो दूसरी तरफ संभावित खरीदार फेयरफैक्स के नियंत्रण वाली कंपनी के निदेशक।
28 जुलाई 2026 को महालिंगम का LIC में कार्यकाल समाप्त हुआ। इसके 11 सप्ताह बाद कैबिनेट ने 14 अक्टूबर 2026 को IDBI बैंक की बिक्री को फेयरफैक्स के पक्ष में 81 रुपये प्रति शेयर के मूल्य पर मंजूरी दे दी। रिपोर्ट में कहा गया है कि महालिंगम ने IDBI बैंक से संबंधित LIC के किसी फैसले में हिस्सा लिया था, इसका कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड नहीं है। LIC ने भी यह स्पष्ट नहीं किया है कि महालिंगम ने थॉमस कुक में अपनी नियुक्ति की जानकारी LIC को दी थी या नहीं। यह भी स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने बैंक की बिक्री से संबंधित किसी चर्चा से खुद को अलग किया था या नहीं।
IDBI बैंक की बिक्री प्रक्रिया पर पहले भी उठे सवाल
Business world ने इससे पहले वित्त मंत्रालय के एक आंतरिक नोट के आधार पर रिपोर्ट दी थी कि अधिकारियों ने फेयरफैक्स की बोली खोलने के बाद अपने ही आरक्षित मूल्य को अलग रख दिया और फिर नए मूल्यांकन का आदेश दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, नए मूल्यांकन में बैंक का मूल्य बोली से कम निकला। सरकार का कहना है कि IDBI बैंक की बिक्री प्रक्रिया में उचित प्रक्रिया का पालन किया गया है।महालिंगम के मामले में हितों के संभावित टकराव का सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह LIC की निवेश समिति के सदस्य थे और फेयरफैक्स के नियंत्रण वाली कंपनी के बोर्ड में भी शामिल थे। हालांकि, रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि ऐसा कोई सार्वजनिक प्रमाण नहीं है कि IDBI बैंक की बिक्री से संबंधित कोई फैसला महालिंगम की समिति के सामने आया था या उन्होंने किसी निर्णय को प्रभावित किया था।
IDBI बैंक की बिक्री शुरू होने के बाद फेयरफैक्स में 17 पूर्व अधिकारियों की नियुक्तियां
सरकार ने 7 अक्टूबर 2022 को IDBI बैंक के निजीकरण के लिए रुचि-पत्र (Expression of Interest) आमंत्रित किए थे। इसके बाद के चार वर्षों में, जब सरकार बैंक में नियंत्रणकारी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही थी, फेयरफैक्स समूह की भारतीय कंपनियों में पूर्व सरकारी अधिकारियों और नियामकों की नियुक्तियां भी होती रहीं। Business world की पड़ताल में फेयरफैक्स फाइनेंशियल, फेयरफैक्स इंडिया और उनकी भारतीय कंपनियों से जुड़े 17 पूर्व सार्वजनिक अधिकारियों का विवरण सामने आया है।
इनमें:
- - आठ पूर्व नौकरशाह या नियामक अधिकारी हैं।
- - आठ सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी हैं।
- - एक विदेशी सरकार का पूर्व प्रमुख है।
इन 17 लोगों में से 10 ने 7 अक्टूबर 2022 को IDBI बैंक की बिक्री प्रक्रिया शुरू होने के बाद फेयरफैक्स समूह में पद संभाले। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ नियुक्तियां बैंक की बिक्री प्रक्रिया शुरू होने के बाद हुईं, जबकि कुछ वित्तीय बोलियों और मूल्यांकन की प्रक्रिया के दौरान हुईं।
RBI के पूर्व अधिकारियों को फेयरफैक्स से जुड़ी कंपनियों में महत्वपूर्ण पद
फेयरफैक्स के भारतीय कारोबार में RBI के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्तियां भी हुईं।
RBI के पूर्व डिप्टी गवर्नर बी. पी. कानूनगो 16 जून 2025 को IIFL फाइनेंस के स्वतंत्र निदेशक बने। 19 दिसंबर 2025 को उन्हें IIFL फाइनेंस का चेयरपर्सन नियुक्त किया गया।
RBI के पूर्व कार्यकारी निदेशक बिस्वमोहन महापात्र 16 अप्रैल 2025 को CSB बैंक के बोर्ड में शामिल हुए। 9 मई 2025 को उन्हें बैंक का अंशकालिक चेयरमैन नियुक्त किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन दोनों नियुक्तियों के जरिए RBI के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी उन वित्तीय संस्थानों के बोर्ड या नेतृत्व में पहुंचे, जिनमें फेयरफैक्स की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी थी।
नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत फेयरफैक्स के सलाहकार बने: नीति आयोग के पूर्व सीईओ और भारत के G20 शेरपा अमिताभ कांत को 26 जून 2025 को फेयरफैक्स फाइनेंशियल का वरिष्ठ सलाहकार नियुक्त किया गया। कांत 2016 से 2022 तक नीति आयोग के सीईओ रहे थे। इसके बाद उन्होंने भारत के G20 शेरपा के रूप में काम किया। फेयरफैक्स की घोषणा में भारत में कारोबारी अवसरों का उल्लेख किया गया था। इसमें समूह के Go Digit और केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे में निवेश का भी जिक्र था। यह नियुक्ति उस समय हुई जब IDBI बैंक की बिक्री प्रक्रिया जारी थी।
पूर्व रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने भी फेयरफैक्स से जुड़े
भारत के पूर्व रक्षा सचिव और भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) के पूर्व कार्यकारी निदेशक गिरिधर अरमाने 1 नवंबर 2025 को Go Digit General Insurance के स्वतंत्र निदेशक बने। o Digit फेयरफैक्स के प्रमुख भारतीय निवेशों में से एक है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि IDBI बैंक के अधिग्रहण के बाद फेयरफैक्स ने Go Digit समेत अपने कुछ कारोबारों को बैंक में लाने का प्रस्ताव दिया है।IDBI बैंक की बिक्री को लेकर उठे पांच अहम सवाल
Business world की पड़ताल में सामने आए तथ्यों के आधार पर कई सवाल खड़े होते हैं।
- 1. IDBI बैंक की बिक्री प्रक्रिया के दौरान फेयरफैक्स और उसकी भारतीय कंपनियों में नियुक्त किए गए पूर्व सरकारी और नियामक अधिकारी कौन थे?
- 2. क्या इनमें से कोई अधिकारी सरकारी या सार्वजनिक संस्थान में रहते हुए IDBI बैंक की बिक्री से संबंधित फैसलों में शामिल था?
- 3. क्या हितों के संभावित टकराव की जानकारी संबंधित बोर्ड और नियामकों को दी गई थी?
- 4. क्या सरकार ने IDBI बैंक की बिक्री का मूल्यांकन करते समय फेयरफैक्स के मौजूदा संस्थागत नेटवर्क की जांच की थी?
- 5. क्या फेयरफैक्स IDBI बैंक की बिक्री के दौरान नियुक्त अपने सभी सलाहकारों और परामर्शदाताओं का विवरण सार्वजनिक करेगी?
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि फेयरफैक्स से जुड़े पूर्व अधिकारियों की नियुक्तियां सार्वजनिक हैं और उनकी तारीखें भी सार्वजनिक हैं। लेकिन यह सवाल अब भी बना हुआ है कि IDBI बैंक की बिक्री में शामिल सरकार और संबंधित संस्थानों ने इन नियुक्तियों और संभावित हितों के टकराव की जांच की थी या नहीं।