बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी के चेयरमैन तारिक रहमान के प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री मोदी नहीं, बल्कि लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला जाएँगे। शपथ ग्रहण 17 फ़रवरी को ढाका में है। भारत के विदेश मंत्रालय ने रविवार को आधिकारिक बयान जारी कर इसकी पुष्टि की।

बीएनपी ने अंतरिम सरकार के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शपथ ग्रहण में शामिल होने का न्योता दिया था। लेकिन मोदी 17 फरवरी को मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से द्विपक्षीय बैठक करेंगे। मैक्रों भारत में एआई इंपैक्ट समिट 2026 में हिस्सा लेने आ रहे हैं। इसलिए मोदी नहीं जा पाएंगे। इसके बजाय ओम बिड़ला को भेजा जा रहा है। कुछ रिपोर्टों में विदेश सचिव विक्रम मिश्री के भी उनके साथ जाने की बात कही गई है।

शपथ ग्रहण कब?

17 फरवरी को सुबह बांग्लादेश की नई संसद के सदस्य शपथ लेंगे। शाम को तारिक रहमान और उनके कैबिनेट सदस्यों की शपथ होगी। यह समारोह राष्ट्रीय संसद के साउथ प्लाजा में होगा। अंतरिम सरकार के चीफ एडवाइजर प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस ने 13 देशों के सरकार प्रमुखों या उनके प्रतिनिधियों को न्योता दिया है। इनमें चीन, सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्की, यूएई, कतर, मलेशिया, ब्रुनेई, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव, भूटान और भारत शामिल हैं।

भारत-बांग्लादेश संबंधों में नया दौर

विदेश मंत्रालय ने कहा, 'ओम बिड़ला का इस अहम कार्यक्रम में शामिल होना भारत और बांग्लादेश के लोगों के बीच गहरी और लंबे समय से चली आ रही दोस्ती को दिखाता है। यह दोनों देशों को बांधने वाले लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दोहराता है।' 

मंत्रालय ने आगे कहा,
साझा इतिहास, संस्कृति और आपसी सम्मान से जुड़े पड़ोसी देश के रूप में भारत तारिक रहमान के नेतृत्व में चुनी हुई सरकार का स्वागत करता है। लोगों ने उन्हें भारी बहुमत दिया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय

मोदी ने सबसे पहले बधाई दी

12 फरवरी को हुए चुनाव में बीएनपी ने 300 सीटों वाली संसद में 209 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया। 13 फरवरी को मोदी ने सबसे पहले तारिक रहमान को फोन किया और बधाई दी। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, 'तारिक रहमान को बीएनपी की निर्णायक जीत पर गर्मजोशी से बधाई।' मोदी ने कहा कि भारत लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश का समर्थन करता रहेगा। उन्होंने दोनों देशों के विकास लक्ष्यों पर काम करने की इच्छा जताई।

पीएम मोदी

बीएनपी ने भी मोदी को धन्यवाद दिया और कहा कि वे भारत के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना चाहते हैं। दोनों तरफ से सम्मान और चिंताओं का ध्यान रखने की बात कही गई।

भारत-बांग्लादेश संबंध

पिछले डेढ़ साल से भारत-बांग्लादेश संबंध तनावपूर्ण थे। 2024 में छात्र आंदोलन से शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। उसके बाद यूनुस की अंतरिम सरकार चली। अवामी लीग को चुनाव में हिस्सा नहीं लेने दिया गया। हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा भारत के लिए बड़ा मुद्दा रहा। लेकिन मोदी की जल्दी बधाई और अब ओम बिड़ला का जाना संबंध सुधारने की शुरुआत दिखाता है।

तारिक रहमान का भारत पर रुख

तारिक रहमान ने 'बांग्लादेश फर्स्ट' का नारा दिया है, जो अमेरिका के 'अमेरिका फर्स्ट' जैसा है। वे भारत, चीन और पाकिस्तान से बराबर दूरी रखना चाहते हैं। उन्होंने पहले कहा था, 'न दिल्ली, न पिंडी, बांग्लादेश सबसे पहले।' वे रिश्ते सुधारने की बात करते हैं, लेकिन सीमा विवाद, हत्याओं और तीस्ता पानी पर सख्त हैं। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल में ढाका जाकर तारिक से मुलाकात की, जो सकारात्मक संकेत है। तारिक की विचारधारा राष्ट्रवादी है, जो बांग्लादेश की संप्रभुता पर जोर देती है। वे अर्थव्यवस्था-आधारित विदेश नीति चाहते हैं और भारत से 'सम्मान और बराबरी' पर रिश्ते। उनके संकेत बताते हैं कि वे हसीना के समय की 'निर्भरता' से दूर रहेंगे, लेकिन संघर्ष नहीं चाहते।

चुनाव में जीत के बाद शनिवार को ढाका के इंटरकॉन्टिनेंटल होटल में तारिक रहमान ने पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की विदेश नीति बांग्लादेश और उसके लोगों के हितों पर आधारित होगी। कोई देश-केंद्रित नीति नहीं होगी। उन्होंने कहा, 'चीन विकास के मामले में दोस्त है, लेकिन अगर कुछ बांग्लादेश के हित में नहीं होगा तो हम उसे नहीं मानेंगे। बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव को देखेंगे कि क्या यह हमारी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा है।'

हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा

शेख हसीना के प्रत्यर्पण के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह क़ानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। अवामी लीग समर्थकों पर केस और परेशानी के बारे में कहा कि कानून का राज चलेगा। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से एकता की अपील की और कहा कि राष्ट्र निर्माण में सबकी ज़रूरत है। चुनाव के बाद कोई बदला या हिंसा नहीं होगी। उन्होंने बीएनपी कार्यकर्ताओं से शांति बनाए रखने को कहा और विजय जुलूस नहीं निकालने का निर्देश दिया।

बहरहाल, बांग्लादेश के पीएम का शपथ ग्रहण का यह समारोह दक्षिण एशिया में बड़ा राजनीतिक बदलाव है। तारिक रहमान 17 साल के लंदन निर्वासन के बाद वापस आए और अब प्रधानमंत्री बन रहे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि नई सरकार के साथ भारत-बांग्लादेश के रिश्ते मज़बूत होंगे।