पश्चिम एशिया में तनाव के कारण सप्लाई में आई कमी की वजह से आपके अगले एलपीजी सिलेंडर में सामान्य 14.2 किलोग्राम के बजाय केवल 10 किलोग्राम गैस ही आ सकती है। हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय इन खबरों को "बहुत अनुमानित" बता रहा है।
गैस सिलेंडर के लिए लंबी लाइनें । फ्ाइल फोटो
घरेलू एलपीजी सिलेंडर का अगला रिफिल अब 14.2 किलोग्राम के बजाय 10 किलोग्राम का हो सकता है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने इस खबर को 'अत्यधिक अनुमानित' (highly speculative) बताते हुए खारिज कर दिया है, लेकिन तेल रिफाइनरों ने पुष्टि की है कि सरकार के सामने ऐसा प्रस्ताव लंबित है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ट्रांसपोर्ट बाधित होने से भारत के तेल और गैस आयात पर असर पड़ा है। इससे घरेलू एलपीजी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ गया है। तेल मार्केटिंग कंपनियां (ओएमसी) अधिक समान वितरण के लिए कम वजन वाले सिलेंडर देने पर विचार कर रही हैं।
एक सरकारी तेल कंपनी के अधिकारी ने कहा, "यह प्रस्ताव वाकई विचाराधीन है, लेकिन फैसला सरकार को लेना है।" वहीं, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने इसे अफवाह करार दिया। उन्होंने कहा, "14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर में 10 किलोग्राम गैस भरने की खबरें अत्यधिक अनुमानित हैं। किसी भी अटकल पर टिप्पणी नहीं की जा सकती... कृपया अफवाहों पर विश्वास न करें।"
सुजाता शर्मा ने बताया कि घरेलू सिलेंडर रिफिलिंग की बुकिंग अब लगभग 50 लाख तक कम हो गई है, जबकि आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है। रिफाइनरों द्वारा एलपीजी उत्पादन बढ़ाने से अब मांग का 50-60 प्रतिशत हिस्सा घरेलू उत्पादन से पूरा हो रहा है, जो पहले 40 प्रतिशत था।
देश में कुल 33.2 करोड़ एलपीजी कनेक्शन हैं। पिछले 10 दिनों में लगभग दो लाख उपभोक्ता पाइप्ड गैस (पीएनजी) पर स्विच कर चुके हैं, जबकि 3.5 लाख नए पीएनजी कनेक्शन जारी किए गए हैं।
सरकार ने ईंधन सूखने (fuel dry-out) की रिपोर्टों को भी खारिज किया है और कहा है कि आपूर्ति सामान्य बनी हुई है।
उपभोक्ताओं पर संभावित असर
सामान्य घरेलू 14.2 किलोग्राम सिलेंडर एक औसत परिवार के लिए 35-40 दिनों तक चलता है। अगर 10 किलोग्राम वाला रिफिल दिया गया तो यह लगभग एक महीने तक चल सकता है। इससे सीमित स्टॉक को अधिक घरों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। यदि लागू होता है तो कीमतें अनुपातिक रूप से कम की जा सकती हैं।
हालांकि, डीलरों में चिंता है कि मात्रा में बदलाव से जटिलताएं बढ़ सकती हैं और चोरी के आरोप लग सकते हैं। उपभोक्ता भी वजन कम होने से चिंतित हैं। वर्तमान में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह केवल अटकलें हैं और आपूर्ति स्थिति पर नजर रखी जा रही है।