भारत की गैर-लाभकारी संस्था 'एजुकेट गर्ल्स' ने 2025 का प्रतिष्ठित रेमन मैग्सेसे पुरस्कार जीतकर इतिहास रच दिया है। यह पहली भारतीय संस्था है जिसे इस सम्मान से नवाजा गया है। इसे एशिया के नोबेल पुरस्कार के रूप में माना जाता है। संस्था की संस्थापक सफीना हुसैन लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स की स्नातक हैं। उन्होंने 2005 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में अपनी नौकरी छोड़कर भारत लौटने का फ़ैसला किया था, ताकि ग्रामीण और शैक्षणिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में लड़कियों की शिक्षा के लिए काम कर सकें।
एनजीओ 'एजुकेट गर्ल्स' को मैग्सेसे अवार्ड; यूएस छोड़ गांव में काम कर रहीं संस्थापक समीना
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- 31 Aug, 2025
ग्रामीण भारत में लड़कियों की शिक्षा को समर्पित एनजीओ Educate Girls को मिला मैग्सेसे अवार्ड। संस्थापक समीना हुसैन ने अमेरिका छोड़ गांवों में शिक्षा की अलख जगाई।

एनजीओ 'एजुकेट गर्ल्स' को मैग्सेसे अवार्ड
'एजुकेट गर्ल्स' की स्थापना 2007 में राजस्थान के सुदूर गाँवों में सफीना हुसैन ने की थी। इसका उद्देश्य उन लड़कियों को स्कूलों में लाना था, जो शिक्षा से वंचित थीं, और उन्हें ऐसी शिक्षा देना था, जो उन्हें उच्च शिक्षा और रोजगार के लिए सक्षम बनाए। रेमन मैग्सेसे पुरस्कार फाउंडेशन यानी आरएमएएफ़ ने 'एजुकेट गर्ल्स' को लड़कियों और युवतियों की शिक्षा के माध्यम से सांस्कृतिक रूढ़ियों को तोड़ने, उन्हें निरक्षरता के बंधनों से मुक्त करने और उन्हें कौशल, साहस और स्वायत्तता प्रदान करने की प्रतिबद्धता के लिए चुना।