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महाराष्ट्र: बीजेपी नेताओं से जुड़े दो केस CBI को ट्रांसफर क्यों?

महाराष्ट्र सरकार ने बीजेपी नेताओं से जुड़े दो मामलों की जांच सीबीआई को ट्रांसफर करने का आदेश दिया है। अब तक इनकी जांच महाराष्ट्र पुलिस कर रही थी। द इंडियन एक्सप्रेस ने यह खबर दी है। 

एक मामला कॉल रिकॉर्डिंग का है और इसे लेकर मुंबई पुलिस महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बयान भी दर्ज कर चुकी है। जबकि दूसरा बीजेपी के नेता गिरीश महाजन और 28 अन्य लोगों से जुड़ा है। इन सभी पर जबरन वसूली और आपराधिक साजिश रचने का आरोप है। 

महाराष्ट्र में चूंकि अब सरकार बदल चुकी है और महा विकास आघाडी की जगह एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना और बीजेपी की सरकार सत्ता में आ चुकी है, इसलिए इन मामलों को केंद्र सरकार के तहत आने वाली जांच एजेंसी सीबीआई को सौंपा जाना सवाल जरूर खड़े करता है। 

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मुंबई पुलिस ने मार्च, 2021 में कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की थी। इससे कुछ दिन पहले ही विपक्ष के तत्कालीन नेता देवेंद्र फडणवीस ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन महा विकास आघाडी सरकार में मनचाही पोस्टिंग पाने के लिए आईपीएस अफसरों ने राजनेताओं को पैसा दिया था। 

फडणवीस ने कहा था कि उनके पास बहुत सारी कॉल रिकॉर्ड हैं और इन कॉल रिकॉर्ड का पूरा डाटा 6.3 जीबी का है। इसे लेकर महाराष्ट्र की सियासत में बवाल भी काफी हुआ था।

रिपोर्ट लीक कैसे हुई?

देवेंद्र फडणवीस ने उस वक्त राज्य की खुफिया विभाग की आयुक्त रहीं रश्मि शुक्ला की रिपोर्ट के हवाले से कई आरोप लगाए थे। शुक्ला के नेतृत्व वाली खुफिया एजेंसी द्वारा 2020 में अगस्त से अक्टूबर के बीच कुछ दलालों के फ़ोन नंबर सर्विलांस पर रखकर टैप किए गए थे। टैप किए गए नंबरों से खुलासा हुआ था कि महाराष्ट्र के लगभग दो दर्जन से ज़्यादा पुलिस अधिकारियों ने ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए दलालों से संपर्क किया था और ये दलाल महाराष्ट्र के कई बड़े नेताओं से संपर्क में थे। 

 

रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा हुआ था कि कुछ पुलिस अधिकारियों के तबादले और पोस्टिंग इस रिपोर्ट के अनुसार ही हुए थे। तब सवाल यह उठा था कि रश्मि शुक्ला के द्वारा तैयार यह सीक्रेट रिपोर्ट लीक कैसे हो गई?

एनसीपी ने आरोप लगाया था कि रश्मि शुक्ला ने बीजेपी की एजेंट की तरह काम किया। एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा था कि रश्मि शुक्ला की रिपोर्ट में किसी तरह का तथ्य नहीं है और ठाकरे सरकार को बदनाम करने के लिए यह खेल चल रहा है।

तत्कालीन ठाकरे सरकार ने इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने पर आपत्ति जताई थी और इसकी जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया था।
तत्कालीन महा विकास आघाडी सरकार में उस वक्त के गृह विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी सीताराम कुंटे से फोन टैपिंग को लेकर जांच करने को कहा था। 
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गिरीश महाजन के खिलाफ मामला

दूसरा मामला जिसमें बीजेपी नेता गिरीश महाजन और अन्य 28 नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज थी। यह मामला वकील विजय पाटिल की शिकायत पर दर्ज किया गया था। विजय पाटिल जलगांव में जिला मराठा विद्या प्रसारक सहकारी समाज के निदेशक हैं। यह आरोप है कि विजय पाटिल को धमकाया गया और उनसे इस्तीफा देने के लिए कहा गया। उन्हें एक घर में बंद करके रखा गया और उनसे पैसे भी मांगे गए। 

इस मामले में आरोप था कि जनवरी 2018 से दिसंबर 2020 तक जबरन वसूली और आपराधिक साजिश रचने का काम किया गया। 

आने वाले दिनों में महाराष्ट्र में पिछली आघाडी सरकार के द्वारा किए गए तमाम फैसलों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं जैसे इन मामलों में राज्य पुलिस से जांच को लेकर इसे सीबीआई के हवाले किया गया है।

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