हल्द्वानी में 'शुद्धिकरण' कर कथित दलित अपमान के मामले में खड़गे ने जेपी नड्डा को लिखे पत्र में कहा है, 'यह मुद्दा मेरे या कांग्रेस अध्यक्ष पद से परे करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा है, जो इस क्रूर वास्तविकता से रोज रूबरू होते रहते हैं।'
जेपी नड्डा और मल्लिकार्जुन खड़गे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में उनकी सभा के बाद 'शुद्धिकरण' करने वालों पर तुरंत एफ़आईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा को पत्र लिखा है। उन्होंने सवाल उठाया कि घटना के 24 दिन बीत जाने के बाद भी शुद्धिकरण करने वाले लोगों और संगठनों के खिलाफ अब तक कोई एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई है।
हल्द्वानी में 'शुद्धिकरण' कर कथित तौर पर दलितों का अपमान करने वालों पर कार्रवाई की मांग करने वाले राहुल गांधी पर तो एफ़आईआर हो गई, लेकिन शुद्धिकरण करने वालों के ख़िलाफ़ अब तक एफ़आईआर दर्ज नहीं की गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ जब ऐसा दुर्व्यवहार हो सकता है तो आम लाखों दलितों के साथ क्या क्या होता होगा! खड़गे ने भी जेपी नड्डा को ख़त लिखकर यही सवाल उठाया है। खड़गे ने अपने पत्र में कहा कि यह मामला केवल उनका या कांग्रेस अध्यक्ष के पद का नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों दलितों की भावनाओं और सम्मान से जुड़ा हुआ है।
यह विवाद 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की एक रैली के बाद शुरू हुआ। कांग्रेस की जनसभा ख़त्म होने के बाद कुछ दक्षिणपंथी संगठनों के सदस्यों ने उसी मैदान में कथित तौर पर 'शुद्धिकरण' अनुष्ठान किया। इस घटना के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद कांग्रेस ने इसे दलित समाज का अपमान बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई। कांग्रेस का आरोप है कि यह शुद्धिकरण इसलिए किया गया क्योंकि सभा को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने संबोधित किया था, जो दलित समुदाय से आते हैं।
खड़गे ने पत्र में क्या लिखा?
जेपी नड्डा को लिखे पत्र में खड़गे ने कहा कि राज्यसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान उन्हें कार्रवाई का भरोसा दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
उन्होंने लिखा, 'यह मुद्दा निजी तौर पर मेरे या भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद से परे करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा है, जो इस क्रूर वास्तविकता का हर दिन सामना करते हैं। ऐसे गलत लोगों को सबक सिखाना जरूरी है।'
खड़गे ने नड्डा से मांग की है कि वे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को निर्देश दें कि रामलीला मैदान में कथित शुद्धिकरण करने वाले व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कराई जाए।
दलित सम्मान का मुद्दा
कांग्रेस का कहना है कि यह घटना केवल एक राजनीतिक विवाद नहीं बल्कि सामाजिक भेदभाव का मामला है। पार्टी का आरोप है कि यदि देश के एक प्रमुख दलित नेता और कांग्रेस अध्यक्ष के साथ इस तरह का व्यवहार हो सकता है तो आम दलितों को रोजमर्रा के जीवन में किस तरह के भेदभाव का सामना करना पड़ता होगा।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और इस तरह की घटनाएँ संविधान की मूल भावना के ख़िलाफ़ हैं।
'यह छुआछूत का दूसरा नाम': राहुल
इससे पहले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी हल्द्वानी की घटना को लेकर बीजेपी और राज्य सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने कथित शुद्धिकरण को 'छुआछूत का दूसरा नाम' बताया था और कहा था कि यह संविधान और सामाजिक समानता के मूल्यों का अपमान है। राहुल गांधी ने भी मांग की थी कि शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
इस मामले में नया मोड़ तब आया जब 30 अगस्त को राहुल गांधी के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर ली गई। यह एफआईआर वाल्मीकि समाज से जुड़े अमित कुमार की शिकायत पर दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी के बयान से अनुसूचित जाति समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं।
पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की कुछ धाराओं के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 के तहत मामला दर्ज किया है।
कांग्रेस का कहना है कि यह विरोधाभासी स्थिति है कि शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन उसके विरोध में आवाज उठाने वाले राहुल गांधी पर एफआईआर दर्ज कर दी गई।
बीजेपी ने आरोपों को किया खारिज
बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि इस घटना का जाति से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस हिंदू समाज को बांटने की कोशिश कर रही है और राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को जातीय रंग दे रही है।
दलितों का अपमान कैसे-कैसे
भारत में दलितों के साथ जातिगत भेदभाव और अपमान के कई रूप में देखने को मिलते रहे हैं। इनमें छुआछूत की प्रथा प्रमुख है- मंदिर, कुएँ या सार्वजनिक स्थानों पर प्रवेश रोकना, बर्तन अलग रखना, या दलित व्यक्ति के संपर्क के बाद स्थान का ‘शुद्धिकरण’ करना। यही आरोप हल्द्वानी की घटना में लगा, जहाँ खड़गे की रैली के बाद रामलीला मैदान में यज्ञ-हवन कर शुद्धिकरण किया गया। कांग्रेस इसे दलित पहचान के कारण अपमान और अस्पृश्यता का प्रतीक मानती है।
अन्य रूपों में जातिसूचक गालियाँ, सामाजिक बहिष्कार, शादी-ब्याह में घोड़ी चढ़ने पर रोक, भूमि विवाद में हिंसा, और चोरी, गंदगी फैलाने जैसे आरोप शामिल हैं। महिलाओं के साथ यौन हिंसा भी अक्सर जाति से जुड़ी होती है। संविधान और एससी, एसटी एक्ट के बावजूद ये प्रथाएँ कुछ क्षेत्रों में बनी हुई हैं, जो समानता के आदर्श के विपरीत हैं।बहरहाल, हल्द्वानी की यह घटना अब उत्तराखंड की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गई है। एक ओर कांग्रेस इसे दलित सम्मान और सामाजिक न्याय का मुद्दा बता रही है तो दूसरी ओर बीजेपी इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बता रही है।
अब सबकुछ इस बात पर टिका है कि उत्तराखंड सरकार कथित शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करती है या नहीं, क्योंकि कांग्रेस इस मामले में लगातार कार्रवाई की मांग कर रही है।