इंडिया गठबंधन के दलों की गतिविधियां तेज़ हो गई हैं। इसी के साथ पश्चिम बंगाल में दशकों से एक-दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंद्वी रहे तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPM के बीच भी चुनाव आयोग को लेकर संवाद शुरू हुआ है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग के भीतर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सामने आए मतभेदों और आयोग की कार्यप्रणाली पर विपक्ष की चिंताओं ने इन दलों को एक-दूसरे के संपर्क में ला दिया है। TMC प्रमुख ममता बनर्जी और CPM महासचिव एम ए बेबी में शुक्रवार को फोन पर बातचीत हुई। फिर ममता ने राहुल गांधी से भी बात की। 
ममता और एमए बेबी ने चुनाव आयोग, चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र की विश्वसनीयता की रक्षा के लिए विपक्षी दलों को एकजुट करने की जरूरत पर चर्चा की। ममता बनर्जी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से भी बातचीत की और उनसे INDIA ब्लॉक की बैठक जल्द बुलाने का आग्रह किया। रिपोर्ट के अनुसार, ममता चाहती हैं कि यह बैठक अगले सप्ताह सोमवार या मंगलवार को ही हो।
यह संपर्क CPM महासचिव एम ए बेबी के उस पत्र के बाद हुआ जिसमें उन्होंने INDIA ब्लॉक और अन्य गैर-BJP विपक्षी दलों से चुनाव आयोग से जुड़े हालिया घटनाक्रम पर तत्काल बैठक करने की अपील की थी। 23 सितंबर को लिखे पत्र में बेबी ने द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की जांच का हवाला देते हुए कहा था कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और लोकतंत्र दांव पर हैं। उन्होंने विपक्ष से SIR और चुनाव आयोग से जुड़े घटनाक्रम पर सामूहिक रूप से विचार करने तथा आगे की रणनीति तय करने की अपील की थी। 
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ममता बनर्जी ने गुरुवार को बेबी के पत्र का जवाब देते हुए इस बात पर सहमति जताई कि मौजूदा स्थिति “असाधारण” है और विपक्षी दलों को तत्काल साथ बैठना चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक, बेबी ने INDIA ब्लॉक के बाहर के दलों- जिनमें BRS, AAP, DMK, तमिलनाडु की TVK और BJD शामिल हैं- से भी संपर्क किया है।
इस घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग के भीतर SIR को लेकर सामने आए मतभेद हैं। इंडियन एक्सप्रेस की जांच के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 मौकों पर SIR से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। आयोग ने 23 सितंबर को इन रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए दोनों चुनाव आयुक्तों की लिखित टिप्पणियों को स्वीकार किया और उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा बताया, लेकिन उनकी उठाई गई आपत्तियों पर अलग से कोई विस्तृत जवाब नहीं दिया। 
विपक्षी दलों ने इसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र जांच कराने और SIR को रोकने की मांग की है। विपक्ष ने संसद में ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए नया नोटिस देने का भी फैसला किया है।

TMC के लिए संकट का दौरः ममता बनर्जी और एम ए बेबी की बातचीत ऐसे समय हुई है जब पश्चिम बंगाल में TMC खुद गंभीर संगठनात्मक संकट से गुजर रही है। विधानसभा चुनावों में पार्टी के सत्ता से बाहर होने के बाद उसके भीतर विभाजन सामने आया। इसके बाद TMC की विधानसभा और संसदीय इकाइयों में भी टूट की स्थिति बनी। चुनाव आयोग ने इस महीने TMC के नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिन्ह को भी फिलहाल फ्रीज कर दिया है। आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को आगामी उपचुनावों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह दिए हैं।

TMC के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर मामला अब सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर को चुनाव आयोग से पूछा था कि दोनों गुटों के दावे पर वह कितने समय में फैसला कर सकता है। अदालत ने संकेत दिया कि इस मामले में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और शिवसेना के विवाद में हुई देरी के परिणामों का उल्लेख किया। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होनी है।
SIR को लेकर पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची का विवाद भी जारी है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि SIR के दौरान पश्चिम बंगाल में हटाए गए 27.16 लाख मतदाताओं में से 22 लाख से अधिक ने दोबारा नाम शामिल कराने के लिए अपील की है। आयोग के मुताबिक कुल 38.31 लाख अपीलें दायर हुईं—इनमें 22.21 लाख नाम जोड़ने और 16.10 लाख नाम हटाने से संबंधित थीं। आयोग ने अपीलीय ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाने का सुझाव भी दिया है।
इस तरह चुनाव आयोग और SIR को लेकर बना विवाद बंगाल की राजनीति में एक असामान्य स्थिति पैदा कर रहा है। TMC और CPM, जो राज्य में लंबे समय तक एक-दूसरे के खिलाफ चुनावी संघर्ष करते रहे हैं, अब चुनाव आयोग की भूमिका और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़े मुद्दे पर संवाद कर रहे हैं। हालांकि दोनों दलों के बीच किसी औपचारिक राजनीतिक गठबंधन की घोषणा नहीं हुई है; फिलहाल बातचीत का केंद्र चुनाव आयोग, SIR और विपक्ष की साझा रणनीति है।