SIR को लेकर 10 अक्टूबर को सीजेपी के प्रोटेस्ट से पहले सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने एडवाइज़री में सीजेपी प्रोटेस्ट का ज़िक्र नहीं किया है, लेकिन कहा है कि 'जारी सार्वजनिक घटनाओं' के बारे में 'गलत, गुमराह करने वाला, हेर-फेर किया गया कंटेंट' फैलाने पर कार्रवाई होगी।
दिल्ली के जंतर मंतर पर 10 अक्टूबर को सीजेपी के प्रोटेस्ट से पहले सोशल मीडिया पर 'आपत्तिजनक' कंटेंट को लेकर सरकार ने कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। इसके लिए सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय यानी MeitY ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि सरकारी अफसरों या अधिकृत सरकारी एजेंसियों की शिकायत पर हर ‘आपत्तिजनक’ या गलत कंटेंट पर तुरंत कार्रवाई करनी होगी।
यह एडवाइजरी तब आई है जब 10 अक्टूबर को सीजेपी समेत विपक्षी दलों और छात्र संगठनों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR के ख़िलाफ़ प्रोटेस्ट की तैयारी चल रही है। एडवाइजरी में सीजेपी प्रोटेस्ट का नाम सीधे नहीं लिया गया है, लेकिन 'जारी सार्वजनिक घटनाओं' के बारे में ग़लत, गुमराह करने वाला, हेरफेर किया गया या संदर्भ से हटकर कंटेंट फैलाने पर कार्रवाई की बात कही गई है।
एडवाइजरी में क्या कहा गया?
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय यानी MeitY के साइबर लॉ डिवीजन की ओर से जॉइंट सेक्रेटरी अजीत कुमार द्वारा जारी इस एडवाइजरी में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से कहा गया है कि 'अधिकृत सरकारी एजेंसियों' की शिकायतों को प्राथमिकता दें, खासकर उन कंटेंट पर जो सार्वजनिक व्यवस्था पर असर डाल सकते हैं। इसमें कहा गया है कि ग़लत, भ्रामक, हेरफेर किए गए या संदर्भ से बाहर के कंटेंट को लेबल करें या सही संदर्भ बताएँ।एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि पुरानी फोटो-वीडियो को नई घटना के रूप में पेश करने, डिजिटल रूप से बदले गए या AI से बनाए गए ऑडियो-वीडियो, अधिकारियों की नकल करने वाले कंटेंट और हिंसा भड़काने वाले पोस्ट पर विशेष ध्यान दें। इसमें कहा गया है कि गैरकानूनी जानकारी को पहचानें, रोकें और बढ़ावा न दें। यूजर्स को जागरूक करें कि वे कोई भी जानकारी शेयर करने से पहले उसकी सच्चाई, स्रोत और तारीख जांच लें। कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समय पर सहयोग करें। एडवाइजरी तुरंत लागू करने को कहा गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि यह वैध अभिव्यक्ति और सही सार्वजनिक चर्चा का सम्मान करती है।
आईटी नियम में क्या प्रावधान
इस एडवाइज़री का एक अहम पहलू यह है कि इसमें भ्रामक या संदर्भ से हटाकर पेश की गई सामग्री को लेबल करने या उसके साथ सही संदर्भ देने की बात कही गई है। यह निर्देश फ़रवरी में अधिसूचित किए गए आईटी नियमों की तुलना में अधिक बड़ी दिखाई देता है।फ़रवरी में संशोधित सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत लेबल लगाने का निर्देश सिंथेटिक यानी कृत्रिम रूप से तैयार ऑडियो, तस्वीरों और ऑडियो-विज़ुअल सामग्री तक सीमित था। उसमें टेक्स्ट यानी लिखित सामग्री को इस श्रेणी में शामिल नहीं किया गया था।
लेकिन गुरुवार की एडवाइज़री में लेबल लगाने या संदर्भ स्पष्ट करने के निर्देश के लिए ऐसी कोई सीमा तय नहीं की गई है। इसमें यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि किस तरह की सामग्री को भ्रामक माना जाएगा और उसे लेबल करने का फैसला किस आधार पर लिया जाएगा।
इसके अलावा, एडवाइज़री यह भी नहीं बताती है कि इसमें इस्तेमाल किए गए शब्द ‘अधिकृत सरकारी एजेंसियों’ का सटीक अर्थ क्या है। यह भी साफ़ नहीं है कि सोशल मीडिया कंपनियों से जिस 'अतिरिक्त सतर्कता' की अपेक्षा की गई है, वह पहले से लागू आईटी नियमों के तहत ज़रूरी सतर्कता से किस तरह अलग है।
मंत्रालय ने कहा है कि एडवाइज़री का मक़सद कानूनी अभिव्यक्ति और वैध सार्वजनिक चर्चा का सम्मान करते हुए कार्रवाई करना है। हालाँकि, सामग्री को भ्रामक बताने और उस पर लेबल लगाने के मानक साफ़ नहीं होने से यह सवाल बना हुआ है कि इन निर्देशों को व्यवहार में किस तरह लागू किया जाएगा।
MeitY की एडवाइज़री में पुरानी तस्वीरों और वीडियो को मौजूदा घटनाओं के रूप में पेश करने पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। इससे पहले 26 सितंबर को दिल्ली पुलिस ने भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए इसी तरह की बात कही थी। नई एडवाइज़री में भी पुराने या संग्रहित फोटो और वीडियो को मौजूदा घटनाओं के रूप में पेश करने पर ध्यान देने को कहा गया है। हालांकि, मंत्रालय ने अपनी एडवाइज़री में दिल्ली पुलिस की उस पोस्ट या किसी खास वीडियो का उल्लेख नहीं किया है।
CJP का अकाउंट पहले ब्लॉक हुआ था
केंद्र सरकार इससे पहले भी सीजेपी के ऑनलाइन अकाउंट के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर चुकी है। 21 मई को सीजेपी का एक्स अकाउंट रोक दिया गया था। बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने 7 जुलाई को इसे बहाल कर दिया। उस समय सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया था कि अकाउंट को 21 जून को होने वाली NEET दोबारा परीक्षा से पहले ब्लॉक किया गया था।नए निर्देश तब आए हैं जब SIR और चुनाव आयोग को लेकर विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। हालाँकि, मौजूदा एडवाइज़री में सीजेपी के अकाउंट या 10 अक्टूबर के प्रदर्शन का सीधा उल्लेख नहीं है।
इससे पहले नवंबर 2025 में लाल क़िले में हुए विस्फोट के बाद और दिसंबर 2025 में अश्लील सामग्री को लेकर जारी एडवाइज़री में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को नियमों का पालन नहीं करने पर होने वाले क़ानूनी नतीजे भुगतने की याद दिलाई गई थी। गुरुवार को जारी एडवाइज़री में ऐसी किसी कार्रवाई या दंड का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
SIR विवाद के बीच क्यों अहम है यह एडवाइज़री?
SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला 23 सितंबर को प्रकाशित द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद तेज हुआ था। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में कहा गया था कि कुछ फैसले उनकी जानकारी के बिना लिए गए थे। इनमें नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 में बदलाव और मतदाता सूची के डेटाबेस को केंद्रीय स्तर पर एक जगह केंद्रित करने से जुड़े मुद्दे भी शामिल थे। चुनाव आयोग ने इसके जवाब में कहा था कि SIR से जुड़े उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।24 सितंबर को सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देने के लिए 48 घंटे का समय दिया था। इसके बाद विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और अन्य समूहों ने इस मुद्दे पर प्रदर्शन किए।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सवाल
MeitY की एडवाइज़री में एक ओर गलत सूचना, डिजिटल हेर-फेर और हिंसा भड़काने वाली सामग्री को रोकने पर जोर दिया गया है तो दूसरी ओर कानूनी अभिव्यक्ति और वैध सार्वजनिक चर्चा का सम्मान करने की बात भी कही गई है। लेकिन ‘भ्रामक’ सामग्री की पहचान के स्पष्ट मानक, अधिकृत सरकारी एजेंसियों की परिभाषा और अतिरिक्त सतर्कता की सीमा तय नहीं होने से इसके क्रियान्वयन को लेकर सवाल बने हुए हैं। खासकर तब, जब चुनाव आयोग, SIR और मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक विरोध प्रदर्शन चल रहे हों।