मणिपुर में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को अपडेट किए बिना जनगणना कराने के विरोध में आंदोलन तेज हो गया है। Campaign for Just and Fair Delimitation (JFD) की ओर से बुलाए गए 48 घंटे के बंद के दूसरे दिन बुधवार को राज्य के घाटी वाले जिलों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा। इम्फाल ईस्ट, इम्फाल वेस्ट, थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर में बाजार, शैक्षणिक संस्थान और कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे। सार्वजनिक परिवहन भी सड़कों से लगभग गायब रहा।

स्कूल-कॉलेज और बाजार बंद

बंद के दौरान कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर बांस के खंभे और पत्थर रखकर यातायात बाधित किया। जगह-जगह “No NRC, No Census” के पोस्टर और नारे दिखाई दिए। सरकारी कार्यालयों में भी उपस्थिति कम रही। हालांकि कुछ निजी वाहन सड़कों पर चलते दिखाई दिए। घाटी के मुकाबले चुराचांदपुर सहित पहाड़ी जिलों में बंद का असर अपेक्षाकृत कम रहा।
JFD का कहना है कि 2027 की जनगणना से पहले मणिपुर में NRC को अपडेट किया जाना चाहिए। संगठन का तर्क है कि पहले यह निर्धारित किया जाए कि राज्य में वास्तविक नागरिक कौन हैं और उसके बाद जनसंख्या के आंकड़े तैयार किए जाएं।
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छात्रों का आंदोलन भी तेज

इस विवाद में छात्र संगठन भी सक्रिय रूप से सामने आए हैं। JFD Student Wing ने जनगणना की तैयारियों के खिलाफ कई जगह प्रदर्शन किए। सोमवार को बड़ी संख्या में छात्रों ने क्वाकेइथेल से केइसाम्पाट की ओर मार्च किया और जनगणना के सामूहिक बहिष्कार की अपील की। छात्रों ने “No NRC, No Census” के नारे लगाए।
डीएम यूनिवर्सिटी परिसर में भी तनाव की स्थिति बनी, जहां छात्रों ने जनगणना से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम को रोकने की कोशिश की। रिपोर्टों के मुताबिक, छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हुई और कम से कम दो छात्र पुलिस लाठीचार्ज में घायल हुए। छात्रों ने आरोप लगाया कि जनगणना की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए प्रशासन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, जबकि उनका कहना है कि NRC अपडेट होने तक यह प्रक्रिया रोक दी जानी चाहिए।
इंफाल के CC Higher Secondary School में भी छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। All Manipur Students' Union (AMSU) ने आंदोलन का समर्थन करते हुए जनगणना के अलावा भारत-म्यांमार के बीच संभावित भूमि अदला-बदली की खबरों पर भी चिंता जताई और कहा कि इससे मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता प्रभावित हो सकती है।

महिला बाजार भी बंद

राज्य के सबसे बड़े व्यावसायिक केंद्र ख्वैरामबंद कीथेल में स्थित तीनों महिला बाजारों ने भी आंदोलन के समर्थन में अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। इससे राजधानी के प्रमुख बाजार क्षेत्र में सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुईं। कई नागरिक संगठनों ने भी JFD की मांग का समर्थन किया है। इनमें United Meitei Naga Committee Manipur, Federation of Naga Civil Society, Chandel Naga People's Organisation, United Meitei Pangal Committee और Native People's Committee Manipur शामिल हैं।

जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही विवादः Census 2027 की प्रक्रिया को लेकर मणिपुर में विवाद इसलिए बढ़ा है क्योंकि 17 अगस्त से self-enumeration यानी स्व-गणना का चरण शुरू हुआ है। इसके बाद मुख्य house-listing अभियान 1 सितंबर से 30 सितंबर तक चलना निर्धारित है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि इन प्रक्रियाओं से पहले NRC को अपडेट किया जाए।

प्रदर्शनकारियों की एक अन्य प्रमुख मांग यह भी है कि 2023 में शुरू हुए जातीय संघर्ष के बाद विस्थापित हुए आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (IDPs) को उनके मूल स्थानों पर पुनर्वासित किया जाए और उसके बाद जनगणना कराई जाए। छात्र संगठनों ने “No IDP Settlement, No Census” का नारा भी उठाया है।

पुलिस कार्रवाई से बढ़ा तनाव

जनगणना के खिलाफ प्रदर्शन पिछले कुछ दिनों में कई स्थानों पर हुए हैं। रविवार को इम्फाल स्थित Directorate of Census Operations के बाहर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल कर तितर-बितर किया था। इससे पहले भी जनगणना संबंधी प्रशिक्षण कार्यक्रमों को रोकने की कोशिशों के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तनाव सामने आया है।
मंगलवार को इम्फाल ईस्ट में डिप्टी कमिश्नर कार्यालय परिसर के बाहर प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इस घटना में कुछ प्रदर्शनकारियों के घायल होने की खबर है।

सरकार भी NRC के मुद्दे पर दबाव बनाने की तैयारी में

राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि NRC का मुद्दा उठाया जाएगा। राज्य सरकार के प्रवक्ता और विधायक सपम रंजन सिंह ने बताया कि विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली जाकर केंद्र सरकार के नेताओं से मुलाकात करेगा और जनगणना से पहले NRC लागू करने की मांग उनके सामने रखेगा।
इससे पहले मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद और राज्य के गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजाम ने राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से भी मुलाकात की थी। यह बैठक उस समय हुई जब JFD और नागरिक संगठनों के साथ जनगणना के मुद्दे पर सरकार की बातचीत चल रही थी। JFD की मुख्य मांग NRC के अपडेट के साथ-साथ विस्थापित लोगों के पुनर्वास की भी है।

NRC की मांग के पीछे क्या तर्क है?

मणिपुर में NRC की मांग का मुद्दा केवल जनगणना तक सीमित नहीं है। आंदोलनकारी संगठन राज्य की जनसांख्यिकीय संरचना में बदलाव और कथित अवैध प्रवासन को लेकर लंबे समय से चिंता जताते रहे हैं। JFD और उससे जुड़े संगठनों का कहना है कि NRC को अपडेट किए बिना 2027 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर भविष्य में परिसीमन किया गया तो इसका राज्य की राजनीतिक प्रतिनिधित्व व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
यही कारण है कि “पहले NRC, फिर Census” का मुद्दा अब मणिपुर में एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। फिलहाल 48 घंटे के बंद और लगातार हो रहे छात्र प्रदर्शनों ने राज्य सरकार और केंद्र के सामने एक जटिल चुनौती खड़ी कर दी है—एक ओर तय समय-सारणी के अनुसार जनगणना की प्रक्रिया आगे बढ़ानी है, वहीं दूसरी ओर NRC और विस्थापित लोगों के पुनर्वास को लेकर स्थानीय संगठनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है।