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सोशल मीडिया, ओटीटी के लिए नए नियमों का एलान, 3 महीने में लागू होंगे

ओटीटी (ओवर द टॉप) प्लेटफ़ॉर्म को लेकर मोदी सरकार ने नए नियमों का एलान किया है। सूचना मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों का भारत में व्यापार करने के लिए स्वागत है लेकिन इनके प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल नफ़रत फैलाने और फ़ेक न्यूज़ के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार इस बात के पूरी तरह ख़िलाफ़ है कि सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल हिंसा भड़काने या किसी अन्य ग़लत काम के लिए हो। 

नए नियमों की अहम बातें - 

  1. सोशल मीडिया कंपनियों को भारत के किसी शख़्स को कम्प्लायंस अफ़सर के रूप में तैनात करना होगा।  
  2. अगर सोशल मीडिया कंपनियां किसी कंटेंट को हटाती हैं तो उन्हें यूजर्स को इसकी वजह बतानी होगी। 
  3. सोशल मीडिया कंपनियों को यह बताना होगा कि कोई भ्रामक या शरारतपूर्ण मैसेज कहां से शुरू हुआ यानी इसे उनके प्लेटफ़ॉर्म पर किसने पोस्ट किया। 
  4. सरकार संयुक्त सचिव या इससे ऊंचे स्तर के किसी अफ़सर को नियुक्त करेगी जो कंटेंट को ब्लॉक करने के बारे में निर्देश देगा। 
  5. दर्शकों की उम्र के हिसाब से कंटेंट दिखाना होगा। 13 साल की उम्र से ज़्यादा, 16 साल की उम्र से ज़्यादा और व्यस्कों के लिए लिंग, हिंसा और न्यूडिटी के आधार पर तीन कैटेगेरी में कंटेंट तय करना होगा। 
  6. इस बात के लिए मैकेनिज्म बनाना होगा कि बच्चे किसी ऐसे कंटेंट को न देख सकें जो उनके लिए नहीं है। 
  7. इन नियमों के दायरे में फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम जैसे बाक़ी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स और हॉटस्टार, नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम जैसे बड़े ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म्स भी आएंगे। 
  8. डिजिटल न्यूज मीडिया को भी प्रेस काउंसिल के नियमों का पालन करना होगा। 

काफी शिकायतें मिलीं

प्रसाद ने कहा कि हमें सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म के ग़लत इस्तेमाल को लेकर काफी शिकायतें मिली थीं। प्रसाद ने कहा कि कई न्यूज़ चैनलों ने भी फ़ैक्ट चैक का काम शुरू किया है और इसके पीछे कारण यही है कि सोशल मीडिया पर फर्जी ख़बरें फैलाई जाती हैं। उन्होंने कहा, “कई साल से सोशल मीडिया के ग़लत इस्तेमाल के ख़िलाफ़ चिंता जताई जा रही थी और सुप्रीम कोर्ट ने भी हिंसा और अश्लीलता फैलाने वाले कंटेंट को लेकर नियम बनाने को कहा था।” इसके बाद संसद में भी इसे लेकर चिंता जताई गई और उनके मंत्रालय ने इसे लेकर व्यापक विचार-विमर्श किया। 

प्रसाद ने कहा, “सोशल मीडिया पर डबल स्टैंडर्ड नहीं होना चाहिए। अगर अमेरिका के कैपिटल हिल में हिंसा होती है तो सोशल मीडिया पर वहां की पुलिस कार्रवाई का स्वागत होता है लेकिन जब दिल्ली के लाल क़िले पर हिंसा होती है तो वहां पर दूसरा स्टैंडर्ड होता है।”

हर महीने देनी होगी रिपोर्ट

उन्होंने कहा कि नए नियमों के मुताबिक़ सोशल मीडिया कंपनियों को चीफ़ कम्प्लायेंस अफ़सर, नोडल कांटेक्ट अफ़सर और भारत में रहने वाले ऐसा व्यक्ति जो समस्याओं को देखने वाला हो उसे भी अफ़सर के रूप में नियुक्त करना होगा और हर महीने सरकार को रिपोर्ट देनी होगी। 

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मैकेनिज्म बनाना होगा 

प्रसाद ने कहा कि नए नियमों के मुताबिक़, कंपनियों को ग्रीवांस रिड्रेसल मैकेनिज्म बनाना होगा और अफ़सर की भी नियुक्ति करनी होगी। यह अफ़सर 24 घंटे में किसी परेशानी को रजिस्टर करेगा और 15 दिन में उसे इसका निस्तारण करना होगा। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया, ओटीटी के लिए बने नए नियम तीन महीने में लागू हो जाएंगे। 

प्रसाद ने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों को यह बताना होगा कि सबसे पहले खुराफ़ात किसने शुरू की। यानी पहला ग़लत ट्वीट या मैसेज किसने पोस्ट किया है। यूजर्स के लिए वालियंट्री वैरिफ़िकेशन मैकेनिज्म भी बनाना होगा। इसके अलावा अगर कोई ग़ैर क़ानूनी सूचना आपके प्लेटफ़ॉर्म पर है तो उसे आपको हटाना होगा। 

ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म्स को मानने होंगे नियम

प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि टीवी को केबल नेटवर्क एक्ट और अख़बार को प्रेस काउंसिल के नियम फ़ॉलो करने होते हैं जबकि ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म के लिए ऐसे कोई नियम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल और ओटीटी तक सभी को नियमों का पालन करना पड़ेगा। जावड़ेकर ने कहा कि हम मीडिया की आज़ादी का सम्मान करते हैं लेकिन डिजिटल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स को झूठ फैलाने का अधिकार नहीं है। 

पैरेंटल लॉक की सुविधा देनी होगी

उन्होंने कहा कि ओटीटी के लिए किसी तरह का कोई सेंसर नहीं है लेकिन अब इसमें काम कर रही कंपनियों को ऐसा मैकेनिज्म बनाना होगा कि बच्चे किसी अश्लील या ग़लत कंटेंट को न देख सकें। उन्होंने कहा कि दर्शकों की उम्र के हिसाब से कंटेंट दिखाना होगा और पैरेंटल लॉक की सुविधा देनी होगी। 

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