एक के बाद एक क़ानून में लगातार संशोधन क्यों किए जा रहे हैं। आरटीआई, एनआईए, यूएपीए क़ानून में संशोधन से पहले क्या पूरी चर्चा हो रही है? इमर्जेंसी तो नहीं लगी है, लेकिन लोग क्यों कह रहे हैं कि यह उससे कम भी नहीं है। ऐसे ज्वलंत हालात पर देखिए 'रिटायर्ड आईएएस राजू शर्मा से शीतल के सवाल'।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।


















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