केंद्र सरकार ने बढ़ते खर्च और ईंधन सब्सिडी को नियंत्रित करने के लिए प्रधानमंत्री उज्जवला योजना (PMUY) के तहत मिलने वाले रियायती (subsidised) एलपीजी सिलेंडरों की संख्या को घटा दिया है।

मोदी सरकार ने उज्जवला योजना में मुख्य बदलाव क्या किया

सरकार ने गरीब परिवारों को मिलने वाले रियायती रसोई गैस सिलेंडरों की संख्या को सालाना 9 से घटाकर 4 कर दिया है। यह फैसला तब सामने आया जब रविवार को 14.2 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹29 की बढ़ोतरी की गई थी, और इसके बाद जारी एक बयान में इस कटौती का जिक्र किया गया। सरकार के इस फैसले का असर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं पर सबसे ज्यादा पड़ेगा। उन्हें चूल्हे से होने वाले प्रदूषण से बचाने के लिए इस योजना की घोषणा मोदी सरकार ने की थी। सरकार ने इसका बहुत प्रचार भी किया था।

उज्जवला पर सब्सिडी का नया गणित समझिए

पेट्रोलियम मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार:

  • देश के करीब 10.5 करोड़ (105 मिलियन) उज्ज्वला लाभार्थियों को अब साल में केवल पहले 4 रिफिल (सिलेंडर) पर ही ₹300 प्रति सिलेंडर की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) सब्सिडी मिलेगी।
  • पेट्रोलियम मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण एम. खनूजा ने स्पष्ट किया कि देश के सभी रसोई गैस उपभोक्ताओं (लगभग 33.37 करोड़) को अभी भी बाजार दरों की तुलना में करीब ₹700 प्रति सिलेंडर सस्ता एलपीजी रिफिल मिल रहा है।
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सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?

तेल कंपनियों का घाटा: मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियां अभी भी हर 14.2 किलोग्राम के एलपीजी रिफिल पर ₹700, पेट्रोल पर ₹6 प्रति लीटर और डीजल पर ₹30 प्रति लीटर का नुकसान (under-recovery) उठा रही हैं।

बढ़ता सब्सिडी बिल: पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रहे युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भारी अस्थिरता है। साल 2025-26 में घरेलू एलपीजी पर कुल घाटा ₹60,000 करोड़ तक पहुंच गया था, जो उससे पिछले साल ₹41,338 करोड़ था। इस घाटे की भरपाई के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने तेल कंपनियों को ₹30,000 करोड़ के मुआवजे की मंजूरी दी थी। इसी बढ़ते बजटीय बोझ को संभालने के लिए सरकार ने सब्सिडी का दायरा समेटा है।

उज्ज्वला योजना और औसत खपत के आंकड़े का तर्क

सरकार का तर्क है कि साल में 4 सिलेंडर की सीमा उज्ज्वला परिवारों की औसत खपत के बिल्कुल करीब है। कैबिनेट के आंकड़ों के अनुसार, उज्ज्वला उपभोक्ताओं की सालाना औसत खपत इस प्रकार रही है: 2019-20 में लगभग 3 सिलेंडर लाभार्थियों ने लिए थे। 2022-23 में लाभार्थियों ने 3.68 सिलेंडर उठाए। इसी तरह 2024-25 में लाभार्थियों ने 4.47 सिलेंडर उठाए। इसी तर्क के आधार पर सरकार ने अब उज्जवला में 4 सिलेंडर सालाना कर दिए हैं।

गरीबों के लिए उज्जवला की क्रोनोलॉजी समझिए

  • 2016 (शुरुआत): यूपी के बलिया से मुफ्त कनेक्शन और बिना किसी इंस्टॉलेशन चार्ज के इस योजना को शुरू किया गया था।
  • 2021 (उज्ज्वला 2.0): पहला सिलेंडर और चूल्हा भी मुफ्त दिया जाने लगा। कोविड के समय सरकार ने 3 मुफ्त सिलेंडर दिए थे।
  • मई 2022: सालाना 12 सिलेंडरों तक ₹200 की लक्षित (targeted) सब्सिडी शुरू हुई।
  • अक्टूबर 2023: इस सब्सिडी को बढ़ाकर ₹300 (अधिकतम 12 सिलेंडर) कर दिया गया। क्योंकि 2024 में लोकसभा चुनाव थे।
  • अगस्त 2025: केंद्रीय कैबिनेट ने साल 2025-26 के लिए ₹300 की सब्सिडी को अधिकतम 9 सिलेंडरों तक सीमित करने को मंजूरी दी थी।
  • जून 2026 (वर्तमान स्थिति): अब इसे और घटाकर सालाना अधिकतम 4 सिलेंडरों तक सीमित कर दिया गया है।