G7 शिखर सम्मेलन में मोदी-ट्रंप की मुलाकात से पहले दोनों देशों के बीच तनाव है। अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत की जयशंकर ने कड़ी निंदा की तो रुबियो बोले- जहाजों को उसके आदेश मानने होंगे, ईरानी तेल परिवहन बर्दाश्त नहीं होगा।
अमेरिकी हमले में 3 भारतीय नाविकों की मौत के मुद्दे का कड़ा विरोध नहीं करने के लिए आलोचना झेल रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने इस मुद्दे को उठाएँगे? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप दोनों फ्रांस के G7 समिट में शामिल हो रहे हैं और दोनों नेताओं के बीच मुलाक़ात होने वाली है। दोनों नेता कई अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
लेकिन इस मुलाक़ात से ठीक पहले भारत और अमेरिका के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। खाड़ी इलाके में व्यावसायिक जहाजों पर अमेरिकी नौसेना के मिसाइल हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। भारत ने इसकी कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से शुक्रवार शाम फोन पर बात की। जयशंकर ने कहा कि 'अमेरिकी नौसेना द्वारा खाड़ी में किए गए हमलों की भारत कड़ी निंदा करता है, जिनमें तीन भारतीय नाविक मारे गए।' उन्होंने कहा कि व्यावसायिक जहाजों पर ऐसे घातक हमले बिल्कुल सही नहीं हैं।
अमेरिका का कड़ा जवाब
कुछ घंटों बाद ही अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कड़ा जवाब दिया। डिप्टी प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि रुबियो ने जयशंकर से बात की और जोर दिया कि सभी व्यावसायिक जहाजों को अमेरिकी बलों के आदेशों का तुरंत पालन करना चाहिए। टॉमी पिगॉट ने शनिवार को कहा, 'विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कल भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर से बात की। दोनों अधिकारियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में हाल की घटनाओं पर चर्चा की। विदेश मंत्री ने ज़ोर दिया कि सभी कमर्शियल जहाजों को अमेरिकी सेना के आदेशों का तुरंत पालन करना चाहिए, क्योंकि वे इस जलडमरूमध्य में शांति और सुरक्षा बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन और ईरानी तेल की अवैध ढुलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।'
यह विवाद 10 जून को MT Settebello नाम के जहाज पर हुए हमले के बाद और तेज हो गया, जिसमें तीन भारतीय नाविक मारे गए। भारत ने पिछले दो बार अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स जेसन मीक्स को विदेश मंत्रालय में बुलाकर विरोध दर्ज कराया था। भारतीय विदेश मंत्रालय के विरोध दर्ज कराने के बाद अमेरिकी बयान में सभी कमर्शियल जहाजों से अपने आदेशों का पालन करवाकर नौसैनिक नाकेबंदी लागू करने के इरादे को साफ़ किया गया है। इस बयान से तीन भारतीयों की मौत को लेकर भारत में चल रहा राजनीतिक विवाद और बढ़ सकता है।
मोदी में सवाल करने की हिम्मत नहीं: विपक्ष
कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित विपक्षी नेता अमेरिकी हमले में तीन भारतीयों की मौत को लेकर पीएम मोदी पर चुप्पी साधने का आरोप लगा रहे हैं। भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा अमेरिकी राजनयिक को बुलाकर कड़ा विरोध जताए जाने के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर बड़े सवाल खड़े किए। राहुल ने कहा कि 'Compromised PM भारत माता के बेटों की रक्षा नहीं कर सकते, क्योंकि जिन्होंने उन बेटों की जान ली उन्हें नाराज़ करने की इनमें न हिम्मत है, न ताकत।'
राहुल ने प्रधानमंत्री पर हमला करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय जल में अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई, लेकिन प्रधानमंत्री ने अब तक एक शब्द भी नहीं बोला। राहुल गांधी ने कहा, 'जब कोई विदेशी ताकत किसी भारतीय की हत्या करे, तो प्रधानमंत्री को बोलना पड़ता है। लेकिन मजाल है जो ये एक शब्द बोल जाएं। अगले हफ्ते G7 में, हमारे नाविकों की हत्या के बस चंद दिनों बाद, मोदी जी मुस्कुराएंगे, गले मिलेंगे और समझौते करेंगे - मगर, उन तीन भारतीयों के लिए उनके पास एक शब्द भी नहीं होगा।'मोदी सरकार पर सवाल उठ रहे हैं कि अमेरिकी हमले में भारतीय नागरिकों की मौत पर आख़िर पीएम मोदी या सरकार ने खुले तौर पर अमेरिका का विरोध क्यों नहीं किया? सोशल मीडिया पर लोग लगातार सवाल उठा रहे हैं। सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं कि केंद्र में बीजेपी की सरकार है और वह खुद को 'राष्ट्रवादी' पार्टी और 'राष्ट्रवादी' सरकार होने का दावा करती रही है। राहुल गांधी ने भी संकेतों में यही सवाल करते हुए निशाना साधा है। राहुल ने साफ़ तौर पर कहा कि जब कोई विदेशी ताकत किसी भारतीय की हत्या करे, तो प्रधानमंत्री को बोलना पड़ता है।
अमेरिका ने कोई संवेदना नहीं जताई: थरूर
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को भारतीय क्रू सदस्यों की मौत को लेकर अमेरिका की आलोचना की और वॉशिंगटन के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आधिकारिक बयान में अफ़सोस या संवेदना ज़ाहिर करने जैसी कोई बात नहीं थी। थरूर ने एक्स पर लिखा, "अमेरिका का यह आधिकारिक बयान पढ़ना बेहद चौंकाने वाला है, जिसमें बेगुनाह भारतीयों की जान जाने पर अफ़सोस या संवेदना ज़ाहिर करने जैसी कोई बात नहीं है। कोई 'दोस्त' और रणनीतिक साझेदार इतना असंवेदनशील कैसे हो सकता है?"
उन्होंने कहा, "असल में इन अहम समुद्री इलाकों से गुज़रने वाले लगभग हर मर्चेंट जहाज़ पर भारतीय क्रू सदस्य होते हैं। क्या अब उन सभी को अमेरिकी मिसाइलों का निशाना माना जा रहा है? यह रवैया मंज़ूर नहीं है और मुझे उम्मीद है कि डॉ. एस. जयशंकर ने मार्को रुबियो से यह बात कही होगी।"
अमेरिकी हमले में भारतीयों की मौत को लेकर मोदी सरकार बहुत बुरी तरह घिरी है और उसपर प्रतिक्रिया देने के लिए काफ़ी ज़्यादा दबाव है।
भारतीय नाविकों की मौत पर दबाव के बीच विदेश मंत्रालय के हवाले से विरोध दर्ज कराया गया है। एस. जयशंकर और मार्को रुबियो के बीच बात भी हुई है। अब मोदी और ट्रंप की मुलाक़ात पर नज़रें टिकी हैं।
G7 समिट और मोदी-ट्रंप मुलाकात
अमेरिकी हमले में भारतीयों की मौत पर गहराते इस विवाद के बीच प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को फ्रांस पहुंच गए। वे 16-17 जून को G7 समिट में हिस्सा लेंगे। समिट के दौरान मोदी और ट्रंप के बीच मुलाकात होने की संभावना है। यह उनकी पिछले एक साल में पहली आमने-सामने मुलाकात होगी। दोनों देशों के रिश्ते 2025 में तब काफी खराब हो गए थे जब ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता का दावा किया था और अमेरिका ने भारत पर भारी टैरिफ लगा दिए थे। माना जा रहा था कि हाल में दोनों देशों के बीच रिश्ते कुछ सामान्य हुए हैं, लेकिन इसी बीच खाड़ी में अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत ने फिर से तनाव बढ़ा दिया है। इस बीच, दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर भी काम कर रहे हैं।
व्यापार समझौते पर बातचीत
G7 के बाद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर भारत आएंगे। ट्रंप-मोदी मुलाकात में व्यापार पर चर्चा होगी, लेकिन समिट में पूरा समझौता होने की उम्मीद नहीं है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा, 'हम जानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी भारत की भूमिका को बहुत अहम मानते हैं। हम एक अच्छा व्यापार समझौता कर सकते हैं।'यह विवाद अमेरिका-ईरान तनाव के बीच हुआ है। अमेरिका ईरान पर नाकाबंदी लगा रखा है। ईरानी तेल ले जा रहे जहाजों को रोकने के लिए अमेरिका सक्रिय है। भारत ने हमेशा कहा है कि व्यावसायिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सबसे अहम है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों G7 के मौके पर पश्चिम एशिया पर एक विशेष बैठक भी कर रहे हैं। सऊदी अरब, यूएई, ओमान के अलावा मोदी और ट्रंप को भी आमंत्रित किया गया है।
भारत ने अपने नाविकों की सुरक्षा पर जोर दिया है, जबकि अमेरिका अपने ब्लॉकेड को सख्ती से लागू करने पर अड़ा हुआ है। G7 समिट के दौरान मोदी-ट्रंप की मुलाकात में इस मुद्दे पर भी चर्चा होने की संभावना है। लेकिन सवाल है कि क्या पीएम मोदी उस तरह ट्रंप के सामने कड़ा रुख अपनाएँगे जिस तरह का रुख रखने का विपक्षी दल पीएम मोदी पर दबाव डाल रहे हैं?