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मोदी ने किया तीन शहरों का दौरा, वैक्सीन की तैयारियों का लिया जायजा

कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ रहे दुनिया भर के लोगों को बस वैक्सीन आने का इंतजार है। भारत में भी लोग टीवी चैनलों, अख़बारों और न्यूज़ वेबसाइट्स पर यही ख़बर सबसे पहले ढूंढते हैं कि वैक्सीन को लेकर क्या अपडेट है। हाल में यूरोप के बाद भारत में भी कोरोना संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़ने के बाद एक बार फिर कोरोना का ख़ौफ़ बढ़ा है और कई शहरों में कर्फ्यू और लॉकडाउन लगाना पड़ा है। लेकिन दूसरी ओर, एक प्रभावी वैक्सीन इजाद करने के लिए वैज्ञानिक दिन-रात जुटे हैं। 

वैक्सीन से जुड़ी तैयारियों की समीक्षा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को अहमदाबाद के जाइडस बायोटेक पार्क, हैदराबाद की भारत बायोटेक और पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट के दौरे पर रहे। मोदी ने इस दौरान कई वैज्ञानिकों से मुलाक़ात की और वैक्सीन को लेकर क्या तैयारियां हैं, इस बारे में जाना। 

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हालांकि कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच अच्छी ख़बर यह है कि फ़रवरी महीने तक कोरोना के दो टीके भारत में आ सकते हैं। एक तो ऑक्सफ़ोर्ड की वैक्सीन के आने की पूरी उम्मीद है। और दूसरा, देश में विकसित कोवैक्सीन को भी आपात मंजूरी मिलने की उम्मीद है। 

ख़बरों में कहा गया है कि ऑक्सफ़ोर्ड की वैक्सीन औसत रूप से 70 प्रतिशत प्रभावी रही है। कुछ ट्रायलों में यह 90 फ़ीसदी प्रभावी रही थी। ऑक्सफ़ोर्ड वैक्सीन बनाने के लिए क़रार करने वाली भारतीय कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट पहले ही कह चुकी है कि कोरोना वैक्सीन फ़रवरी से स्वास्थ्य कर्मियों के लिए उपलब्ध होगी। आम लोगों के लिए यह वैक्सीन अप्रैल में उपलब्ध होगी। हालाँकि, अभी आख़िरी ट्रायल के परिणाम और नियामक मंजूरी मिलना बाक़ी है। 

94.5 फ़ीसदी प्रभावी होने का दावा 

कोरोना टीके को इंसानों पर ट्रायल करने में सबसे आगे रहने वाली कंपनियों में से एक मॉडर्ना ने हाल में इसके 94.5 फ़ीसदी प्रभावी होने का दावा किया था। शोधकर्ताओं ने कहा है कि यह परिणाम उनकी कल्पनाओं से भी बेहतर रहा। कंपनी की ओर से कहा गया है कि कुछ हफ़्तों के अंदर वह विश्व भर में आपात मंजूरी के लिए आवेदन करेगी। उसे उम्मीद है कि इस साल के आख़िर तक अमेरिका को क़रीब 2 करोड़ वैक्सीन आपूर्ति करने के लिए तैयार कर ली जाएगी। कंपनी को 2021 तक विश्व भर में 50 करोड़ से 100 करोड़ तक वैक्सीन बनाने की उम्मीद है। 

सफल वैक्सीन पर प्रारंभिक आंकड़ों की रिपोर्ट का दावा करने वाली मॉडर्ना दूसरी कंपनी है। इससे पहले फाइजर ऐसी पहली कंपनी थी जिसने एक सप्ताह पहले यह बताया था कि BioNTech के सहयोग से बनाई गई उसकी वैक्सीन 90 प्रतिशत से अधिक प्रभावी थी।

लोगों तक पहुंचेगी कैसे?

कोरोना के खौफ़ के बीच वैक्सीन से लोगों की बड़ी उम्मीद बंधी है, लेकिन वैक्सीन को सुरक्षित रखने और लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था कैसी होगी? क्या इसकी तैयारी सरकार ने की है और यदि की है तो यह तैयारी कैसी है? वैक्सीन को सुरक्षित रखने के लिए फ़्रीज़िंग की ज़रूरत होगी। यह फ़्रीजिंग -80 डिग्री सेल्सियस तक होनी चाहिए। यानी ऐसी वैक्सीन को सामान्य फ़्रिज़ में रखा नहीं जा सकता है, इसके अलावा देश भर में दूर-दराज तक पहुंचाना, स्टोर करना और फिर इसका टीका लोगों को लगाना क्या बड़ी चुनौती नहीं होगी?

ऑक्सफ़ोर्ड की वैक्सीन को सामान्य रेफ़्रिजरेटर के तापमान पर भी सुरक्षित रखा जा सकता है। इसीलिए कहा जा रहा है कि भारत के लिए ऑक्सफ़ोर्ड की वैक्सीन ज़्यादा सही और दूर-दराज के क्षेत्रों में पहुंचाने के लिए आसान होगी।

डेयरी इंडस्ट्री की व्यवस्था से सीख

कोरोना वैक्सीन को लोगों तक पहुंचाने की ज़िम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों को डेयरी इंडस्ट्री से सीख मिल सकती है कि आसानी से कैसे वैक्सीन को लोगों तक पहुंचाया जाए। यह सीख दूध, दही, मक्खन, आइसक्रीम जैसे उत्पादों की व्यवस्था से तो मिल ही सकती है, पशुओं को कृत्रिम गर्भाधान के लिए वीर्य को सुरक्षित रखने और दूर-दराज के क्षेत्रों तक इसे ढोने से भी मिल सकती है। 

Modi will review corona vaccine update in india - Satya Hindi
'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 8 करोड़ कृत्रिम गर्भाधान प्रतिवर्ष किए जाते हैं। ऐसी 56 जगहों से पशुओं के वीर्य को कृत्रिम गर्भाधान के लिए पैक किया जाता है। इन्हें -196 डिग्री सेल्सियस पर रखा जाता है और इतने नीचे तापमान में ही इन्हें देश भर में दूर-दराज के क्षेत्रों में ले जाया जाता है। 
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डेयरी इंडस्ट्री की फ़्रीज़िंग की व्यवस्था के अनुरूप कोरोना वैक्सीन की व्यवस्था भी की जा सकती है। लेकिन डेयरी इंडस्ट्री की यह व्यवस्था एक दिन में नहीं बनी। इसके लिए लंबा समय लगा है। यानी कम समय में ऐसी व्यवस्था करनी हो तो इसके लिए ज़बरदस्त तैयारी होनी चाहिए। अब यह तो सरकार ही बता सकती है कि इस मामले में उसने किस स्तर की तैयारी की है। 

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