पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में छात्रों और युवाओं के जबरदस्त विरोध प्रदर्शनों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेताओं द्वारा दिए गए विवादित बयानों की पृष्ठभूमि में, संघ प्रमुख (सरसंघचालक) डॉ. मोहन भागवत 6 अगस्त को मुंबई में 'जन-ज़ी' (Gen Z) और 'जन-अल्फा' (Gen Alpha) के प्रतिनिधियों से सीधा संवाद करेंगे। आरसएसएस ने इस संबंध में प्रेस नोट जारी करके जानकारी दी है। इसमें बाकायदा जेन ज़ी और जेन अल्फा शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित किया जा रहा है जब देश में युवा आंदोलन, परीक्षा पारदर्शिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज़ है।
हाल ही में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामले के बाद जंतर-मंतर सहित देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए थे। इस युवा आक्रोश का असर राजनीतिक गलियारों में भी दिखा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। जंतर मंतर पर बैठे जेन ज़ी की यह प्रमुख मांग थी। सरकार को झुकना पड़ा। इस आंदोलन को कॉकरोच जनता पार्टी के मंच पर शुरू करने वाले अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका रातोंरात जेन जी के हीरो बन गए। 

जेन जी के दो मोर्चे, राहुल गांधी से संघ ज्यादा परेशान

पेपर लीक के मुद्दे पर एक मोर्चा तो सीजेपी ने खोला। दूसरा मोर्चा नेता विपक्ष राहुल गांधी ने काफी दिनों से खोला हुआ है। छात्रों की गूंज नाम से उनके कार्यक्रम दिल्ल, कोटा में हो चुके हैं। उनका अगला कार्यक्रम 8 अगस्त को प्रयागराज (इलाहाबाद) में होने जा रहा है। ऐसे तमाम कार्यक्रमों में राहुल गांधी के निशाने पर आरएसएस होता है। राहुल गांधी ने हाल ही में आरोप लगाया कि संघ नहीं चाहता कि जेन ज़ी बच्चे पढ़ाई कर सकें। हाल ही में जेन अल्फा बच्चों ने यूपी के फतेहपुर में, राजस्थान के बाड़मेर और जालौर के अलावा बिहार और मध्य प्रदेश में अपने अपने स्कूलों में छोटी-छोटी समस्याओं के लिए मोर्चा खोला। इन सभी राज्यों में बीजेपी की डबल इंजन सरकारें हैं। जेन अल्फा के आंदोलन पर जंतर मंतर के आंदोलन का असर दिखा। यूट्यूबर पत्रकारों ने बच्चों से बातचीत की तो उन्होंने राहुल गांधी के बयानों का समर्थन किया। इससे आरएसएस ज्यादा परेशान हुआ। 
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संघ के नेताओं के बिगड़े बोल से जेन ज़ी नाराज़

आरएसएस और बीजेपी के कई नेताओं, के हाल ही में ऐसे बयान आए, जिससे जेन जी और जेन अल्फा बच्चे खासे नाराज़ हैं। अभी दो दिन पहले आरएसएस के सह-सरकार्यवाह अतुल लिमये ने जंतर-मंतर पर जेन-ज़ी के विरोध प्रदर्शनों को "देशद्रोही" करार देते हुए इसकी गहन जाँच की माँग की थी। केरल में संघ के बड़े नेता टीजी मोहनदास ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही महिलाओं और वामपंथी विचारधारा वाली छात्राओं को लेकर अत्यंत विवादित और हिंसक बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर उनके पास अधिकार होता, तो वे प्रदर्शनकारियों पर कर्फ्यू लगाकर गोलीबारी का आदेश देते। जंतर मंतर पर बैठी छात्राओं का रेप करवाते। टीजी मोहनदास के खिलाफ केरल में एफआईआर दर्ज हो चुकी है। दिल्ली में बीजेपी के पूर्व सांसद रमेश विधूड़ी ने और भी ज़हरीला बयान दिया। विधूड़ी ने कहा कि जंतर मंतर पर पंक्चर लगाने वालों की संख्या ज्यादा थी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आज 3 अगस्त को विधूड़ी के बयान पर आपत्ति जताई। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आरएसएस और बीजेपी नेताओं के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई।

आरएसएस को क्यों आना पड़ा मैदान में

  • 'डैमेज कंट्रोल' और छवि सुधार: संघ के नेताओं द्वारा विरोध प्रदर्शनों को देशद्रोही बताने और हिंसक बयानबाजी के बाद युवाओं के बीच उत्पन्न हुई नाराजगी को कम करने के लिए यह एक रणनीतिक पहुँच (Outreach) के रूप में देखा जा रहा है।
  • राहुल गांधी के बयानों के जरिए आरएसएस को जो नुकसान हो रहा है, उसका सामना ऐसे ही कार्यक्रमों से करने की योजना। राहुल से पहले कर्नाटक कांग्रेस के बड़े नेता और मंत्री प्रियांक खड़गे ने आरएसएस से उसका हिसाब किताब पूछकर उसे परेशान किया था।
  • जेन-ज़ी (Gen Z) से जुड़ाव की कोशिश: भारत की कुल आबादी में युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा है। पेपर लीक और रोजगार जैसे मुद्दों पर युवाओं की मुखरता को देखते हुए आरएसएस का शीर्ष नेतृत्व सीधे संवाद के जरिए उनकी सोच को समझने और राष्ट्रवादी विचारधारा से जोड़ने का प्रयास कर रहा है।
  • कड़े रुख बनाम संवाद का संतुलन: एक तरफ जहाँ संगठन के जमीनी या क्षेत्रीय नेता विरोध प्रदर्शनों के प्रति सख्त और आक्रामक रुख अपना रहे हैं, वहीं सरसंघचालक का वैश्विक शांति और भारतीय मूल्यों पर केंद्रित संबोधन संगठन के नरम और समावेशी पक्ष को पेश करने की कोशिश है। लेकिन जेन जी आरएसएस के इस झांसे में आएगा, इसमें संदेह है।

भागवत का 6 अगस्त को मुंबई में क्या कार्यक्रम है

यह कार्यक्रम 'इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस' (I.I.M.U.N.) के 15वें वार्षिक चैंपियनशिप सम्मेलन के उद्घाटन समारोह के दौरान मुंबई स्थित नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (NMACC) में आयोजित होगा। सम्मेलन में देशभर के 100 से अधिक शहरों के लगभग 2,000 हाई स्कूल छात्र (15 से 19 वर्ष की आयु) भाग लेंगे। इसका मुख्य विषय डॉ. मोहन भागवत का सत्र "द रोल ऑफ यूथ इन यूनाइटिंग द वर्ल्ड, द इंडियन वे" (भारतीय दृष्टिकोण से विश्व को जोड़ने में युवाओं की भूमिका) पर केंद्रित होगा। आरएसएस ने अपनी प्रेस रिलीज़ में जेन ज़ी और जेन अल्फा शब्द लिखे हैं।
6 अगस्त को होने वाला यह सम्मेलन यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगा कि आरएसएस अपनी पारंपरिक कार्यप्रणाली से इतर आधुनिक, डिजिटल रूप से जागरूक और वैचारिक रूप से स्वतंत्र जेन-ज़ी पीढ़ी के साथ किस प्रकार का तालमेल बिठा पाता है। हालांकि आरएसएस की शाखा में और उसके स्कूलों में बड़े पैमाने पर युवा जुड़े हुए हैं, उसके बावजूद देश में जेन जी का इतना बड़ा आंदोलन खड़ा हो गया है।