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भागवत : भारत में मुसलिमों को डरने की ज़रूरत नहीं

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को मुसलिम नेताओं से कट्टरवाद के ख़िलाफ़ कड़ा रुख अपनाने का आह्वान किया। उनका यह बयान तब आया है जब यह बहस का मुद्दा है कि अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के क़ब्ज़े पर भारतीय मुसलमानों को क्या प्रतिक्रिया देनी चाहिए। देश में तालिबान को लेकर अलग-अलग टिप्पणियाँ आ रही हैं और उन पर विवाद हो रहा है। कभी नसीरुद्दीन शाह के बयान पर तो कभी जावेद अख़्तर के बयान पर।

दरअसल, जावेद अख़्तर ने तो एक न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में तालिबान की तुलना आरएसएस और दूसरे हिंदू संगठनों से कर दी थी। उन्‍होंने कहा था कि तालिबान बेशक बर्बर है, उसकी हरकतें भी निंदनीय हैं लेकिन, आरएसएस, विश्‍व हिंदू परिषद और बजरंग दल का समर्थन करने वाले सभी एक जैसे हैं। उन्होंने कहा था कि तालिबान एक इसलामी देश चाहता है और ये लोग एक हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं। उनके इस बयान के बाद आरएसएस का राजनीतिक संगठन बीजेपी उनके बयान का जबरदस्त विरोध कर रही है। 

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इसी बीच अब मोहन भागवत का बयान आया है। उन्होंने कहा, ‘इसलाम आक्रांताओं के साथ आया। यह एक ऐतिहासिक तथ्य है और इसे उसी रूप में बताया जाना ज़रूरी है। मुसलिम समुदाय के समझदार मुसलिम नेताओं को अतिवाद का विरोध करना चाहिए और कट्टरपंथियों के ख़िलाफ़ मज़बूती से बोलना चाहिए। इसके लिए दीर्घकालिक प्रयास और धैर्य की आवश्यकता होगी। यह हम सभी के लिए एक लंबी और कठिन परीक्षा होगी। जितनी जल्दी हम यह करेंगे, उससे समाज को उतना ही कम नुक़सान होगा।’

मोहन भागवत की यह टिप्पणी ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पॉलिसी फाउंडेशन पुणे द्वारा शहर में आयोजित एक बैठक में आई। दर्शकों में मुख्य रूप से कश्मीरी छात्र, सेवानिवृत्त रक्षा अधिकारी और आरएसएस के सदस्य शामिल थे। बैठक का विषय 'राष्ट्र प्रथम, राष्ट्र सर्वोपरि' था। 

भागवत ने फिर से एक बयान को दोहराया कि हिंदुओं और मुसलमानों के पुरखे एक ही थे और हर भारतीय ‘हिंदू’ है।

वह इस बयान को अक्सर दोहराते रहे हैं। उन्होंने कहा, 'भारत में हिंदू और मुसलमान एक ही वंश साझा करते हैं। हमारे विचार से हिन्दू शब्द का अर्थ मातृभूमि है, और वह संस्कृति जो हमें प्राचीन काल से विरासत में मिली है। हिंदू शब्द… प्रत्येक व्यक्ति को उनकी भाषा, समुदाय या धर्म के इतर दर्शाता है। हर कोई एक हिंदू है, और इसी संदर्भ में हम प्रत्येक भारतीय नागरिक को एक हिंदू के रूप में देखते हैं...।' 

उन्होंने कहा कि 'हिंदू शब्द मातृभूमि, पूर्वज और भारतीय संस्कृति के बराबर है। यह अन्य विचारों का अपमान नहीं है। हमें मुसलिम वर्चस्व के बारे में नहीं, बल्कि भारतीय वर्चस्व के बारे में सोचना है।'

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भागवत ने कहा कि भारत के चौतरफ़ा विकास के लिए सभी को मिलकर काम करना चाहिए। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत बतौर महाशक्ति किसी को डराएगा नहीं। 

कार्यक्रम में केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय के चांसलर सैयद अता हसनैन भी मौजूद थे। आरिफ मोहम्मद ख़ान ने विविधता और बहुलवाद का सम्मान करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ज़्यादा विविधता से समृद्ध समाज का निर्माण होता है और भारतीय संस्कृति सभी को बराबर समझती है। 

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