भागवत ने लोगों से अपनी मातृभूमि के प्रति भक्ति, प्रेम और समर्पण रखने की अपील करते हुए कहा, "हम मातृभूमि पर विचार करते हैं। हमारी राष्ट्रीय एकता की एक ज़रूरी चीज के रूप में। हमारी 5,000 साल पुरानी संस्कृति धर्मनिरपेक्ष है... सभी 'तत्व ज्ञान' में, यही निष्कर्ष है। पूरी दुनिया एक परिवार है, यह हमारी भावना है। यह कोई सिद्धांत नहीं है... इसे जानें, महसूस करें और फिर उसके अनुसार व्यवहार करें।" भागवत ने कहा, 'भारत के अस्तित्व का एकमात्र प्रयोजन यही है। भारत केवल दुनिया का सिरमौर देश बना तो उसमें कोई गौरव की बात भारत के लिए नहीं है, दुनिया चाहे जय-जयकार करे। भारत को दुनिया को यह सिखाना है कि विविधता में एकता नहीं, एकता की ही विविधता है।'
उन्होंने कहा, 'देश में बहुत विविधता है। एक-दूसरे से मत लड़ो। अपने देश को दुनिया को यह सिखाने में सक्षम बनाओ कि हम एक हैं।'