अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को निमंत्रण था, लेकिन केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन का प्रतिनिधिमंडल जाएगा। 4 से 9 जुलाई तक सुपुर्द-ए-खाक कार्यक्रम होंगे।
ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जगह विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन जाएंगे। एएनआई ने ईरान के सरकारी सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री मोदी को खामेनेई के अंतिम संस्कार में आने का निमंत्रण दिया था। लेकिन भारत सरकार ने दो प्रतिनिधियों को भेजने का फ़ैसला किया है।
ईरान में जारी राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिका के साथ चल रही बातचीत के बीच अली खामेनेई के लिए होने वाले इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के शामिल होने की संभवाना है। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ जैसे राष्ट्र प्रमुखों को आमंत्रित किया गया। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार पीएम मोदी की जगह अब भारत की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल के कार्यक्रम में जाने की ख़बर है। ऐसा तब हो रहा है जब ईरान युद्ध शुरू होने से कुछ दिन पहले नरेंद्र मोदी इसराइल के दौरे पर चले गए थे। पीएम मोदी पर अयातुल्ला खामेनेई की हत्या की निंदा तक नहीं करने का आरोप लग रहा है। इसके साथ ही पीएम मोदी ने ईरान के पड़ोसी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर ईरानी हमलों की निंदा की थी।
अंतिम संस्कार का कार्यक्रम
खामेनेई के अंतिम संस्कार का कार्यक्रम 4 जुलाई से शुरू होगा और 9 जुलाई को उनके जन्मस्थान वाले शहर मशहद में दफन किये जाने के साथ ख़त्म होगा। 7 जुलाई को पवित्र शहर क़ोम में भी विशेष कार्यक्रम होगा। तेहरान, क़ोम और मशहद में बड़े-बड़े समारोह आयोजित किए जाएंगे। खामेनेई 86 साल के थे। 28 फरवरी को इसराइल और अमेरिका के हवाई हमलों के पहले दिन तेहरान में उनकी हत्या कर दी गई थी। उन्होंने 36 साल तक ईरान की इस्लामिक रिपब्लिक के सर्वोच्च नेता के रूप में देश का नेतृत्व किया।
लाखों लोग होंगे शामिल
ईरानी मीडिया के अनुसार, इस अंतिम संस्कार में क़रीब 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। अगर इतने लोग आए तो यह संख्या 1989 में अयातुल्ला खुमैनी के अंतिम संस्कार में आए लोगों की संख्या से भी बड़ी होगी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत कई देशों के नेता भी कार्यक्रमों में शामिल होने वाले हैं।खामेनेई के बेटे मुजतबा होसैनी खामेनेई मार्च महीने से ईरान के नए सर्वोच्च नेता हैं। लेकिन उनके स्वास्थ्य और ठिकाने को लेकर सवाल अभी भी उठ रहे हैं। अमेरिका के कुछ बड़े अधिकारियों ने दावा किया है कि वे कोमा में हैं। लेकिन ईरान ने बार-बार कहा है कि वह स्वस्थ हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता
यह अंतिम संस्कार तब हो रहा है जब ईरान और अमेरिका के बीच लंबे संघर्ष के बाद शांति समझौता हो गया है। राष्ट्रपति पेजेश्कियन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डिजिटल समझौतों पर दस्तखत किए हैं। स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के बीच लंबी बातचीत भी चल रही है। इस संघर्ष की वजह से पूरे पश्चिम एशिया में संकट आया था और दुनिया भर में ईंधन और ऊर्जा की कमी हुई थी।
ईरान पर भारत की नीति क्या?
भारत की विदेश नीति चाबहार बंदरगाह, ऊर्जा आयात, कनेक्टिविटी को देखते हुए ईरान के साथ संतुलन बनाए रखने की कोशिश करती रही है। लेकिन इसराइल, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और अमेरिका के साथ मजबूत संबंधों के कारण कुछ पेचीदगियाँ हैं। यही वजह है कि अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गरेटा के शामिल होने की ख़बरें हैं। यह इसराइल और खाड़ी देशों के साथ संबंधों को ध्यान में रखकर सावधानी भरा कदम माना जा रहा है।युद्ध से पहले मोदी का इसराइल दौरा
प्रधानमंत्री मोदी 25-26 फरवरी 2026 को इसराइल गए और 28 फरवरी को अमेरिका-इसराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए। इसमें खामेनेई मारे गए। विपक्ष ने समय-समय पर सवाल उठाए और पूछा कि जब युद्ध जैसे हालात बन रहे थे तब पीएम मोदी इसराइल के दौरे पर क्यों गए? इसके साथ ही इसराइल के साथ संबंध मज़बूत रहे।
खामेनेई की हत्या की निंदा नहीं!
खामेनेई की हत्या पर भारत ने शुरुआत में चुप्पी साधी। बाद में विदेश सचिव ने शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। मोदी ने मुख्य रूप से यूएई, सऊदी, बहरीन आदि पर ईरान के जवाबी हमलों की निंदा की और आम नागरिकों तथा ऊर्जा सुविधाओं पर हमलों को 'अस्वीकार्य' बताया। उन्होंने तनाव कम करने और बातचीत की अपील की।
संयुक्त राष्ट्र और बयानों में ईरान की आलोचना
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने उन कुछ प्रस्तावों का समर्थन किया जिसमें खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों की आलोचना थी। विदेश मंत्रालय के बयानों में बार-बार ईरान के जवाबी हमलों पर जोर रहा, जबकि शुरुआती अमेरिका-इसराइल हमलों पर नपा-तुला हुआ जवाब रहा।भारत पूरी तरह 'ईरान विरोधी' नहीं है, बल्कि वह अपने हितों को प्राथमिकता दे रहा है। ईरान के साथ भी संपर्क जारी है। विपक्ष इसे 'अमेरिका-इसराइल की ओर झुकाव' कहता है, जबकि सरकार 'रणनीतिक स्वायत्तता' बताती है।
बहरहाल, भारत सरकार ने खामेनेई के निमंत्रण का सम्मान करते हुए यह प्रतिनिधिमंडल को भेजने का फ़ैसला किया है। विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ईरान में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरे जोरों पर हैं और दुनिया भर से मेहमान पहुँच रहे हैं। यह ईरान के लिए बहुत बड़ा और भावुक क्षण माना जा रहा है।