इंडिया टुडे-सीवोटर के जनवरी 2026 'मूड ऑफ द नेशन' (MOTN) सर्वे के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सबसे पसंदीदा नेता बने हुए हैं। सर्वे में 55 फीसदी लोगों ने उन्हें अगला प्रधानमंत्री बनाने के लिए सबसे उपयुक्त बताया। यह अगस्त 2025 के 52 फीसदी और अगस्त 2024 के 49 फीसदी से ऊपर है। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस दौड़ में मजबूती दर्ज की है, जिन्हें 27 फीसदी समर्थन मिला है, यह अगस्त 2025 के 25 फीसदी से अधिक और जनवरी 2022 के मुकाबले 7 फीसदी से लगभग चार गुना है।

यह सर्वे बताता है कि पिछले चार वर्षों में राहुल गांधी की लोकप्रियता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, लेकिन मोदी की लोकप्रियता में स्थिर बढ़ोतरी के साथ नेतृत्व का अंतर अभी भी काफी चौड़ा है। मोदी की व्यक्तिगत अपील भाजपा की मजबूती का मुख्य आधार बनी हुई है।

आज चुनाव हो तो भाजपा को कितनी सीटें मिलेंगी

अगर आज लोकसभा चुनाव कराए जाएं, तो सर्वे के अनुमान अनुसार भाजपा को 287 सीटें मिल सकती हैं। यह अगस्त 2025 के अनुमान से 27 अधिक और 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली 240 सीटों से काफी बेहतर है। कांग्रेस को 80 सीटों का अनुमान है, जो अगस्त 2025 से 17 कम और 2024 की 99 सीटों से नीचे है। अन्य पार्टियों को 176 सीटें मिलने की संभावना है, जो 10 कम हैं। इससे एनडीए की कुल सीटें 352 तक पहुंच सकती हैं, जो बहुमत से काफी ऊपर है और भाजपा अकेले सरकार बनाने की स्थिति में दिख रही है। (यहां यह बताना जरूरी है कि देश की सवा सौ करोड़ की आबादी में यह कुछ लोगों की राय पर आधारित सर्वे है। देश की राय नहीं है। मूड ऑफ द नेशनल लिखने से उसे देश की राय मानना या बताना गलत है। यह रिपोर्ट इंडिया टुडे के सर्वे पर आधारित है।)


मोदी सरकार का काम कैसा है

मोदी सरकार के प्रदर्शन पर जनता की राय में 57 फीसदी ने इसे 'अच्छा' बताया (अगस्त 2025 के 58 फीसदी और अगस्त 2024 के 59 फीसदी से मामूली कम), 16 फीसदी ने 'औसत' और 24 फीसदी ने 'खराब' माना। पिछले एक वर्ष में इस रेटिंग में ज्यादा बदलाव नहीं आया है। ध्यान रहे ये कुछ लोगों की राय है। भारत के सभी लोगों की राय नहीं है।


सर्वे से साफ है कि राहुल गांधी राष्ट्रीय स्तर पर एक विकल्प के रूप में उभर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस को संगठनात्मक कमजोरियों और गठबंधन की चुनौतियों के कारण इसका चुनावी लाभ नहीं मिल पा रहा है। 2026 के विभिन्न विधानसभा चुनावों और भविष्य के लोकसभा परिदृश्य से पहले यह रुझान महत्वपूर्ण संकेत देता है।

इंडिया टुडे का दावा है कि MOTN सर्वे वर्तमान जनमत का संकेत देता है लेकिन अंतिम चुनाव नतीजे विभिन्न कारणों पर निर्भर करते हैं। लेकिन कुछ लाख या हज़ारों लोगों की राय कभी जनमत का संकेत नहीं होता है।