भारत-चीन के बीच बढ़ते तनाव और वास्तविक नियंत्रण रेखा के दोनों ओर हज़ारों सैनिकों की तैनाती के बीच दोनों देशों के शीर्ष नेता जल्द ही आमने-सामने होंगे। पाँच देशों के संगठन ब्रिक्स (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) की बैठक में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक- दूसरे से मुखातिब होंगे। यह बैठक वर्चुअल होगी और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी, पर दोनों नेता एक-दूसरे के सामने होंगे। यह बैठक 17 नवंबर को होगी।
रूसी राष्ट्रपति के सलाहकार और ब्रिक्स ऑर्गनाइजिंग कमिटी के कार्यकारी सचिव अंतोन कोब्याकोव ने यह जानकारी दी है। 

ब्रिक्स देशों  में सहयोग

उन्होंने कहा है कि ब्रिक्स पार्टनरशिप फ़ॉर ग्लोबल स्टैबिलिटी के नाम पर होने वाली इस बैठक का मुख्य मुद्दा सदस्य देशों के बीच कई मुद्दों पर सहयोग बढ़ाना है। 

इन 5 देशों ने तीन महत्वपूर्ण मुद्दों पर साझेदारी आगे बढ़ाने की बात की है, ये हैं, शांति व सुरक्षा, अर्थव्यवस्था व वित्त और संस्कृति व लोगों के बीच सद्भाव।

ब्रिक्स की यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब भारत और चीन की सेनाओं के बीच कमांडर स्तर की 7वीं बैठक होगी। चीन इस पर राज़ी तो हो गया है कि दोनों देशों की सेनाएं ऐसा कुछ न करें जिससे तनाव बढ़े और दोनों देश अपने सैनिक वापस बुला ले। पर चीन ज़मीनी स्तर पर अपने सैनिकों को वापस बुलाने पर तैयार नहीं हो रहा है। 

फ़िलहाल यह पता नहीं चल सका है कि दोनों देशों के नेता ब्रिक्स की बैठक के अलावा क्या आपस में भी बात करेंगे। पर्यवेक्षकों का कहना कि इसकी संभावना फ़िलहाल बहुत ही कम है।

कोव्याकोव ने पत्रकारों से कहा कि इस साल के शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स देशों के नेताओं की बैठक का विषय 'वैश्विक स्थिरता, साझा सुरक्षा और अभिनव विकास के लिए ब्रिक्स की भागीदारी' है। 

उन्होंने कहा, 'कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार के कारण मौजूदा वैश्विक स्थिति के बावजूद, 2020 में रूस की अध्यक्षता में ब्रिक्स की गतिविधियों को एक सुसंगत तरीके से आयोजित किया जा रहा है।'
इसके पहले ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक रूस की राजधानी मास्को में हुई थी। उसमें भारत का प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल कर रह थे तो चीन की तरफ से राजनयिक यांग चिएची मौजूद थे।