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मोदी जी, इस तरह आप कैसे जीतेंगे अल्पसंख्यकों का विश्वास?

मोदी सरकार ने अभी दुबारा सत्ता संभाली भी नहीं है लेकिन मुसलमानों पर हमले शुरू हो गए हैं। मध्य प्रदेश के सिवनी इलाक़े में महिला समेत तीन लोगों को बेरहमी से पीटते कथित गोरक्षकों के बाद हरियाणा के गुड़गाँव में एक मुसलिम युवक को धार्मिक टोपी (छोटी टोपी) उतारने को कहा गया और उसे जय श्री राम का नारा लगाने को मजबूर किया गया। इसके अलावा ख़बरों के मुताबिक़, बिहार के बेगूसराय में भी एक मुसलिम फेरीवाले को पाकिस्तान जाने को कहा गया और उसका नाम पूछने के बाद उसे गोली मार दी गई।
यह घटनाएँ तब हो रही हैं जब प्रधानमंत्री ने चुनाव जीतने के बाद संविधान को नमन करते हुए कहा कि वह अल्पसंख्यकों का विश्वास जीतने की कोशिश करेंगे। लेकिन सवाल यह उठता है कि प्रधानमंत्री जी इस तरह आप कैसे अल्पसंख्यकों का विश्वास जीतेंगे?
ताज़ा घटना गुड़गाँव के जैकबपुरा इलाक़े के सदर बाज़ार में हुई है। पीड़ित युवक का नाम मोहम्मद बरकत है और उसकी उम्र 25 साल है। शनिवार रात को लगभग 10 बजे बरकत गुड़गाँव की ज़ामा मससिद से जब नमाज पढ़कर वापस अपनी दुकान की ओर लौट रहा था तो लगभग आधा दर्जन लोगों ने उसे रोक लिया।

आरोपियों में से एक व्यक्ति ने मुझसे कहा कि इस इलाक़े में यह धार्मिक टोपी (छोटी टोपी) पहनना पूरी तरह मना है। उस आदमी ने मुझे धमकाया भी। जब मैंने उसे बताया कि मैं मसजिद से नमाज पढ़कर लौट रहा हूँ तो उसने मुझे थप्पड़ मार दिया। उसने मुझसे भारत माता की जय और जय श्री राम का नारा लगाने को कहा। जब मैंने ऐसा करने से मना किया तो उसने मुझे सुअर का मांस खिलाने की धमकी दी।


मोहम्मद बरकत, पीड़ित व्यक्ति

बरकत इस महीने की शुरुआत में ही टेलरिंग का काम सीखने के लिए गुड़गाँव आया है। बरकत ने कहा कि उस आदमी ने रॉड से उसे मारा और गालियाँ भी दीं।जब बरकत ने उस आदमी को धक्का देकर भागने की कोशिश की तो उसने बरकत की कमीज फाड़ दी। बरकत को चिल्लाते हुए देख वे लोग उसे छोड़कर भाग गए। उसमें से चार लोग मोटरसाइकिल से भाग गए और दो लोग गलियों में पैदल चले गए। बरकत के चचरे भाई मुर्तजा उसे सिविल अस्पताल ले गए। अस्पताल ने पुलिस को इस बारे में सूचित किया।
पुलिस ने धार्मिक आधार पर घृणा फैलाने, आपराधिक नीयत से हमला करने और अन्य कई आरोपों में मुक़दमा दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी शराब के नशे में धुत थे और थोड़ा-बहुत बहस हुई थी।
हरियाणा बीजेपी के प्रवक्ता रमन मलिक ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। मलिक ने कहा है कि इस तरह की हरक़तों का बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मलिक ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में पुलिस को घटना में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।इसके अलावा मध्य प्रदेश में हुई घटना में गोरक्षा के नाम पर महिला समेत तीन लोगों की बेरहमी से पिटाई करने का एक वीडियो इन दिनों वायरल हो रहा है। वीडियो में कथित गोरक्षक एक महिला समेत तीन लोगों को बंधक बनाकर बेरहमी से पीटते नज़र आ रहे हैं। यह घटना 22 मई को हुई लेकिन कार्रवाई 24 मई को तब हुई जब वीडियो ख़ासा वायरल हो गया।
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इससे पहले इसी साल हरियाणा के ही भोंडसी इलाक़े में कुछ लोगों ने होली के मौक़े पर एक मुसलिम परिवार के सदस्यों को घर में घुसकर बेरहमी से पीट दिया था। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर ख़ूब वायरल हुआ था। आरोपियों ने लाठी-डंडों, तलवारों, लोहे की छड़ों और हॉकी स्टिक से परिवार के लोगों पर हमला किया था। आरोपियों ने उन लोगों से कहा था कि वे पाकिस्तान चले जाएँ और गालियाँ दी थीं। पिछले साल दिसंबर में नोएडा सेक्टर 58 के एक पार्क में जुमे की नमाज़ पढ़ रहे मुसलमानों को रोक दिया गया था जिस पर काफ़ी हंगामा हुआ था। तब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदउद्दीन ओवैसी ने राज्य सरकार पर तीख़ा हमला बोला था। ओवैसी ने कहा था कि यूपी पुलिस कांवड़ियों पर फूल बरसाती है, लेकिन मुसलमानों के हफ़्ते में एक दिन नमाज़ पढ़ लेने से उसे शांति और सद्भाव बिगड़ने का ख़तरा लगता है।
तब योगी सरकार की किरकिरी होने के बाद प्रशासन ने सफ़ाई देते हुए कहा था कि पार्क में कर्मचारियों के नमाज़ पढ़े जाने के लिए कंपनियों को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा। प्रशासन ने कहा था कि यह आदेश सभी धर्मों पर समान रूप से लागू है, इसलिए इससे यह आशय निकालना बिल्कुल ग़लत है कि यह मुसलमानों के प्रति भेदभाव से प्रेरित है। दरअसल, प्रशासन ने जो नोटिस जारी किया था, उसमें सेक्टर 58 में काम कर रही कंपनियों से कहा गया था कि यदि उनके मुसलिम कर्मचारी पार्क में नमाज़ अदा करते हुए पाए गए तो यह उनकी ज़िम्मेदारी होगी।
अप्रैल-मई 2018 में कई हिंदूवादी संगठनों के लोगों ने गुड़गाँव में मुसलिमों को सार्वजनिक जगह पर नमाज पढ़ने से रोक दिया था। ऐसी घटनाएँ कई दिनों तक होती रहीं और इनमें बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद, शिव सेना का नाम सामने आया था।

अख़लाक़, पहलू, रकबर और कई और

सितंबर 2015 में ग्रेटर नोएडा के दादरी में स्थानीय नागरिक अख़लाक़ को भीड़ ने उसके घर के गोमांस रखे होने और पकाये जाने के शक में पीट-पीट कर मार डाला था। इस बार लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान अख़लाक़ की हत्या के आरोपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंच पर भी दिखाई दिए थे।
अप्रैल 2017 में कथित गोरक्षकों ने राजस्थान के अलवर में 55 वर्षीय बुजुर्ग पहलू ख़ान की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इस घटना में घायल हुए पहलू ख़ान के बेटे इरशाद ने बताया था कि उनका डेयरी का कारोबार है और वह जयपुर से गाय और भैंस खरीदकर ले जा रहे थे लेकिन कथित गोरक्षकों ने उन्हें गोतस्कर समझ लिया और उन पर हमला कर दिया। 
अलवर में ही गोतस्करी के शक में कथित गोरक्षकों ने रकबर ख़ान की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। राजस्थान में भी तब बीजेपी की ही सरकार थी। बताया जाता है कि दूध का कारोबार करने वाले कई और मुसलिमों की कथित गोरक्षकों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।
साल 2017 में रमज़ान के दौरान 16 साल के किशोर जुनैद हाफ़िज़ ख़ान की दिल्ली से बल्लभगढ़ जा रही एक स्थानीय ट्रेन में भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। जुनैद अपने भाई हाशिम और शाकिर के साथ दिल्ली के सदर बाज़ार से ईद की ख़रीदारी करके घर लौट रहे थे। जुनैद के भाई हाशिम के मुताबिक़, भीड़ ने उनसे कहा था कि तुम मुसलमान हो, देशद्रोही हो और पाकिस्तानी हो। इतनी भयावह घटना के पीछे पुलिस ने सिर्फ़ ट्रेन में सीट के लिए झगड़ा होने का कारण बताया था।
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इतना सब कुछ होने के बाद आख़िर हमारे प्रधानमंत्री कैसे अल्पसंख्यकों को इस बात का विश्वास दिला पायेंगे कि वे देश में सुरक्षित हैं। कैसे वह उनका विश्वास जीत पायेंगे। कैसे वह उस संविधान की लाज रख पायेंगे, जिसके आगे वह शीश झुकाते हैं क्योंकि संविधान देश के हर व्यक्ति को उसकी धार्मिक आज़ादी देता है। लेकिन सिर्फ़ मुसलमान होने के कारण पीट दिया जाना या गोमांस की तस्करी के शक के कारण पीट दिया जाना आख़िर कहाँ का न्याय है। इन मामलों पर क्या कभी कड़ी कार्रवाई होगी या अख़लाक, रक़बर, पहलू से शुरू हुआ यह सिलसिला जारी रहेगा। अगर ऐसी घटनाएँ होती रहीं तो यह देश के लोकतंत्र को ख़त्म करने और संविधान की हत्या करने जैसा होगा।

हमें यह भी सोचना होगा कि हिंदू-मुसलमान के नाम पर खेला जा रहा यह खूनी 'राजनीतिक खेल' हमें दुनिया भर में सिर झुकाने को मजबूर कर देगा क्योंकि हमारी विविधता ही दुनिया भर में हमारी पहचान और गर्व से सिर ऊँचा करने का सबसे बड़ा कारण रही है। 

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