बीजेपी और पीएम मोदी 1975 के जिस आपातकाल को लगातार कोसते रहे हैं अब उसको NCERT की किताब में पढ़ाया जाएगा। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी एनसीईआरटी ने पहली बार कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक में 1975-77 के आपातकाल को विस्तार से शामिल किया है। नई किताब में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। 

किताब में कहा गया है कि 1970 के दशक की शुरुआत में सरकार के खिलाफ बढ़ते असंतोष के बीच देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए, जिसके बाद जून 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने आपातकाल लागू किया। इस दौरान मौलिक अधिकारों पर रोक लगी, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई विपक्षी नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।

दरअसल, एनसीईआरटी की नई सामाजिक विज्ञान की पुस्तक 'अंडरस्टैंडिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियोंड' में आपातकाल पर एक अलग खंड जोड़ा गया है। इससे पहले कक्षा 9 की किताबों में इस विषय का उल्लेख नहीं था। एनसीईआरटी के अधिकारियों के अनुसार, संशोधित पाठ्यक्रम के तहत भारतीय लोकतंत्र के विकास, उसकी चुनौतियों और संस्थाओं की भूमिका को समझाने के लिए यह अध्याय शामिल किया गया है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब देश में आपातकाल की घोषणा के 50 वर्ष पूरे हो चुके हैं।
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किताब में क्या लिखा है?

पुस्तक में कहा गया है, 'भारत में लोकतंत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक 1975-77 के दौरान लगाया गया आपातकाल था। 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ जनता का असंतोष बढ़ रहा था। बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और कुप्रबंधन के आरोपों के कारण देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए।'
 
किताब आगे बताती है कि जून 1975 में 'आंतरिक अशांति' के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया गया। इसमें कहा गया है कि उस दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया, विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया, लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ा, नागरिक स्वतंत्रताएं सीमित हो गईं।

ठीक इसी अंदाज में पीएम मोदी भी आपातकाल को लेकर इंदिरा सरकार को कोसते रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को ही इस पर लंबी चौड़ी पोस्ट लिखी है और आपातकाल को लोकतंत्र पर सीधा हमला क़रार दिया है।

उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, 'संविधान हत्या दिवस आज हमें उस काले दौर की याद दिला रहा है, जब भारतीय लोकतंत्र को बुरी तरह से कुचला गया था। यह हमें लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहने को प्रेरित करता है।'

प्रधानमंत्री ने पोस्ट में कहा, 'आज हम उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने भारत के इतिहास के सबसे काले दौर में से एक, यानी 'आपातकाल' के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की मज़बूती से रक्षा की। आपातकाल हमारे संविधान पर सीधा हमला था। इस दौरान नागरिक स्वतंत्रताएँ छीन ली गईं, अभिव्यक्ति की आज़ादी पर रोक लगाई गई, राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों और समाज सेवकों को गिरफ़्तार किया गया और उन संस्थाओं पर हमला किया गया जो हमारे लोकतंत्र की नींव हैं।'
उन्होंने आगे कहा, 'साथ ही, इसने उन अनगिनत नागरिकों के असाधारण साहस को भी दिखाया जिन्होंने चुप रहने से इनकार कर दिया और हमारे संविधान में निहित आदर्शों को बनाए रखा। हम सभी के लिए हमारा संविधान 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं, अधिकारों और कर्तव्यों का प्रतीक है। हम संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराते हैं। अपने संविधान की भावना से प्रेरित होकर, हम एक ऐसा भारत बनाएंगे जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के प्रति हमेशा प्रतिबद्ध रहे।'

किताब में जयप्रकाश नारायण का भी ज़िक्र

नई किताब में लोकनायक जयप्रकाश नारायण यानी जेपी की भूमिका का भी विशेष उल्लेख किया गया है। पुस्तक के अनुसार, जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले जनआंदोलनों ने खासकर बिहार और गुजरात में छात्रों तथा आम नागरिकों को संगठित किया। किताब में कहा गया है कि 1977 में आपातकाल हटने के बाद आम चुनाव हुए और जनता ने मतदान के जरिए अपनी राय व्यक्त की। किताब कहती है, 'सत्ता में बैठी सरकार की हार ने भारतीय लोकतंत्र की ताकत और लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्व को साबित किया।'

लोकतंत्र की अन्य चुनौतियों पर भी चर्चा

एनसीईआरटी ने आपातकाल को केवल एक ऐतिहासिक घटना के रूप में नहीं बल्कि लोकतंत्र की मजबूती और कमजोरियों के संदर्भ में भी पेश किया है। नई किताब में लोकतंत्र के सामने मौजूद अन्य चुनौतियों पर भी चर्चा की गई है, जिनमें फेक न्यूज, गलत सूचना, गरीबी, क्षेत्रवाद, जातीय भेदभाव, लैंगिक असमानता और सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान शामिल हैं।

'डेमोक्रेसी एंड यू' नाम से नया खंड

पुस्तक में पहली बार 'डेमोक्रेसी एंड यू' नाम का नया भाग भी जोड़ा गया है। बताया गया है कि इसका मक़सद छात्रों को लोकतंत्र के बारे में केवल सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें सक्रिय नागरिक के रूप में अपनी भूमिका समझाना है। एनसीईआरटी का मानना है कि युवा पीढ़ी को लोकतांत्रिक मूल्यों, अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक बनाना ज़रूरी है।

मीडिया को बताया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ

नई किताब में मीडिया की भूमिका पर भी विशेष अध्याय शामिल किया गया है। पुस्तक के अनुसार मीडिया सरकार को जवाबदेह बनाता है, जनता की समस्याओं को सामने लाता है और लोकतांत्रिक विमर्श को मजबूत करता है। इसे लोकतंत्र का 'चौथा स्तंभ' बताया गया है।
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पंचायतों और मतदान प्रणाली पर भी जोर

पुस्तक में भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को समझाने के लिए पंचायत व्यवस्था, चुनाव प्रणाली और मतदाता भागीदारी पर भी चर्चा की गई है। इसके अलावा महिलाओं को मतदान का अधिकार, स्थानीय निकायों में आरक्षण, जमीनी स्तर पर लोकतंत्र की भूमिका जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है।

अब एनसीईआरटी द्वारा आपातकाल को कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में शामिल किए जाने के बाद यह विषय एक बार फिर राजनीतिक और शैक्षिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस लगातार कहती रही है कि उस दौर की घटनाओं को ऐतिहासिक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।