कक्षा 8 की एनसीईआरटी (NCERT) की किताब में “न्यायिक भ्रष्टाचार” के उल्लेख पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने इसे न्यायपालिका पर “सुनियोजित और गहरे स्तर का हमला” बताया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट किसी को भी न्यायिक संस्था की साख पर सवाल उठाने या उसे बदनाम करने की अनुमति नहीं देगा।
इस संबंध में इंडियन एक्सप्रेस ने इस आशय की एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। मामले का खुद से संज्ञान लेते हुए CJI ने कहा कि उन्हें इस मुद्दे पर लगातार फोन कॉल और संदेश मिल रहे हैं, जिनमें बड़े  अदालतों के जजों और वरिष्ठ वकीलों की चिंताएँ भी शामिल हैं।
दरअसल, एनसीईआरटी की किताब के चैप्टर के बारे में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत का ध्यान बुधवार 25 फरवरी को दिलाया। कपिल सिबब्ल ने कहा कि बार के वरिष्ठ सदस्य इस बात से “बेहद व्यथित” हैं कि स्कूल की किताबों में “न्यायिक भ्रष्टाचार” शामिल किया गया है। सिब्बल ने कहा, “हम, इस संस्था के वरिष्ठ सदस्य होने के नाते, कक्षा 8 की किताबों में ‘न्यायिक भ्रष्टाचार’ चैप्टर शामिल होने से बहुत परेशान हैं।”
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कपिल सिब्बल की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए CJI ने कहा कि वे पहले से ही इस मुद्दे से अवगत हैं। उन्होंने कहा, “मुझे इस बारे में बहुत सारे फोन और संदेश मिल रहे हैं, उच्च न्यायालयों के जजों से भी।” CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मैं किसी को भी न्यायपालिका की साख को बदनाम करने या उस पर सवाल उठाने की अनुमति नहीं दूंगा।”
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि ऐसा लगता है मानो केवल एक ही संस्था को निशाना बनाया गया है, जबकि राजनेताओं, मंत्रियों या नौकरशाहों में भ्रष्टाचार का कोई उल्लेख नहीं है। सिंघवी ने पीठ से कहा, “ऐसा लगता है जैसे भ्रष्टाचार केवल न्यायपालिका में ही मौजूद है। राजनेताओं, मंत्रियों, नौकरशाहों या किसी और के बारे में एक शब्द भी नहीं है।”
उन्होंने कहा, “चयनात्मकता (सेलेक्टिव), माई लॉर्ड… चयनात्मकता। यह अन्य क्षेत्रों में भी है, लेकिन यहाँ केवल न्यायिक भ्रष्टाचार की बात की गई है।” इस पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने टिप्पणी की, “किताब में न्यायपालिका के मूल ढांचे से जुड़ी संवैधानिक अखंडता का अभाव है।” यानी जस्टिस बागची यह कहना चाहते हैं कि न्यायपालिका किसलिए बनी है, उसका आधार क्या है, इन बातों का चैप्टर में उल्लेख नहीं है।
इस पर CJI ने कहा, “यह न्यायपालिका पर सुनियोजित और गहरे स्तर का हमला लगता है। हम किसी को भी न्यायिक संस्था को निशाना बनाने की अनुमति नहीं देंगे।”
इसे सरकार और न्यायपालिका के बीच एक नए टकराव बिंदु के रूप में देखते हुए CJI ने जोर देकर कहा कि मामला चाहे कितना भी ऊपर तक क्यों न जाए, कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दोहराया कि अदालत न्यायिक संस्था पर किसी भी तरह के हमले की अनुमति नहीं देगी।

एनसीईआरटी की किताब में न्यायिक भ्रष्टाचार पर क्या कहा गया

इंडियन एक्सप्रेस (24 फरवरी 2026) की रिपोर्ट के अनुसार, एनसीईआरटी की नई कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक के अध्याय “हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका” में पहली बार “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” को एक प्रमुख चुनौती के रूप में शामिल किया गया है। किताब में कहा गया है कि न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार, मामलों का भारी लंबित बोझ और जजों की कमी जैसी समस्याएँ न्याय व्यवस्था को प्रभावित करती हैं।
किताब का चैप्टर बताता है कि जज एक आचार संहिता से बंधे होते हैं, जो अदालत के भीतर ही नहीं बल्कि बाहर उनके व्यवहार को भी नियंत्रित करती है। इसमें यह भी उल्लेख है कि शिकायतों के लिए CPGRAMS जैसी व्यवस्था मौजूद है और 2017 से 2021 के बीच 1,600 से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं। गंभीर आरोपों की स्थिति में संसद द्वारा महाभियोग की प्रक्रिया से जज को हटाने का प्रावधान भी समझाया गया है।
चैप्टर में कहा गया है कि “लोग न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार का अनुभव करते हैं” और इसका सबसे अधिक असर गरीब व वंचित वर्गों के न्याय तक पहुँच पर पड़ सकता है। इसी कारण केंद्र और राज्य स्तर पर पारदर्शिता बढ़ाने, तकनीक के उपयोग और भ्रष्टाचार के मामलों पर त्वरित कार्रवाई के प्रयासों का उल्लेख किया गया है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, किताब में अदालतों में लंबित मामलों के आँकड़े भी दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट में लगभग 81,000, हाई कोर्ट में 62.40 लाख और जिला व अधीनस्थ अदालतों में करीब 4.70 करोड़ मामले लंबित बताए गए हैं। पहले के संस्करण में न्यायपालिका की संरचना और भूमिका पर जोर था, जबकि नए संस्करण में व्यवस्था की चुनौतियों को भी शामिल किया गया है। किताब में चैप्टर का मकसद छात्रों में नागरिक समझ विकसित करना बताया गया है।