नेपाल में अचानक बाढ़ में अब तक 289 लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 1500 लोग लापता हैं। भारत ने पुष्टि की है कि नेपाल में उसके 288 नागरिक लापता हैं। भारत सरकार लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी है।
नेपाल बाढ़ में भारतीय लापता
नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद 288 भारतीयों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। भारत सरकार ने अपने नागरिकों को लेकर यह अपडेट जारी किया है। विदेश मंत्रालय यानी एमईए ने बताया कि अब भी 288 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है, जबकि 21 भारतीयों को सुरक्षित बचा लिया गया है। भारत सरकार लगातार नेपाल प्रशासन के संपर्क में है और राहत एवं बचाव अभियान में सक्रिय सहयोग कर रही है। इस बीच भारत ने नेपाल के लिए राहत सामग्री की दूसरी खेप भी भेज दी है, जिसमें दवाइयां, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान शामिल हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस वार्ता में बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जिन 288 भारतीयों से संपर्क नहीं हो पाया है, उनमें अलग-अलग राज्यों के नागरिक शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे 73 भारतीय कर्मचारी, तमिलनाडु से यात्रा पर गए 37 व 49 लोगों के दो समूह, पश्चिम बंगाल से रसुवा जिले गए 32 लोग, केरल के 33 नागरिक और विभिन्न राज्यों के 61 भारतीय, जो एक ट्रैवल एजेंसी के जरिए नेपाल गए थे।
भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सभी लोगों का पता लगाने के लिए नेपाल सरकार और स्थानीय एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया है कि अब तक 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है। ये सभी तमिलनाडु के रहने वाले हैं और उन्हें भारत वापस लाने की प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा तिब्बत की ओर फँसे भारतीयों की भी मदद की जा रही है।
तिब्बत में भी फँसे हैं भारतीय
विदेश मंत्रालय के अनुसार 200 से अधिक भारतीय नागरिकों ने मदद मांगी है, जो तिब्बत के विभिन्न इलाकों में सुरक्षित हैं लेकिन वापस लौटने का इंतजार कर रहे हैं। इनमें करीब 95 भारतीय दारचेन में, 4 भारतीय जिलोंग शहर में, 30 भारतीय ज़ुतुलफुक क्षेत्र में और 60 से 70 अन्य भारतीय अलग-अलग स्थानों पर फँसे हैं। तिब्बत में फँसे 200 भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए भारत सरकार संबंधित अधिकारियों के साथ काम कर रही है।
नेपाल में अब तक 289 की मौत, 1500 लापता
नेपाल सरकार के मुताबिक़ अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन में अब तक 289 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 1500 लोग लापता हैं। इनमें बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की भी बताई जा रही है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल ने कहा है कि अधिकारी अभी भी बाढ़ के नुक़सान का आकलन कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि नेपाल और तिब्बत क्षेत्र में क़रीब 1500 लोग लापता हैं। इसमें 800 विदेशी शामिल हैं। मंत्री ने कहा है, 'हज़ारों परिवारों के घर तबाह हो गए हैं और वे लापता हैं। हम अभी भी तबाही का पूरा आकलन करने की कोशिश में हैं।' उनका कहना है कि मृतकों और लापता लोगों की संख्या बढ़ सकती है।
कैसे आई इतनी बड़ी तबाही?
यह बाढ़ नेपाल के रसुवा, धादिंग और नुवाकोट जिलों में सबसे ज़्यादा तबाही लेकर आई। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर के एक हिस्से के टूटने या हिमस्खलन के कारण अचानक नदी में भारी पानी आ गया। तेज बहाव सबसे पहले तिब्बत सीमा के पास रसुवागढ़ी और तिमुरे क्षेत्र में पहुँचा, जहाँ कई गांव, सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं बह गईं। इसके बाद यह पानी नीचे की ओर बहते हुए नेपाल के कई हिस्सों में फैल गया।बिहार में भी हाई अलर्ट
नेपाल में आई बाढ़ का असर भारत तक पहुँचने की आशंका के चलते बिहार सरकार ने भी हाई अलर्ट जारी किया है। नेपाल से निकलने वाली नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने सीमावर्ती जिलों के अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। हालाँकि गुरुवार सुबह वाल्मीकिनगर बैराज पर पानी का बहाव कुछ कम हुआ, जिससे तत्काल राहत मिली है।
भारत ने भेजी राहत सामग्री
भारत सरकार ने नेपाल की मदद के लिए राहत अभियान तेज कर दिया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि भारत ने राहत सामग्री की दूसरी खेप नेपाल भेजी है। इसमें 37.5 टन राहत सामग्री, दवाइयाँ, खाद्य सामग्री, आवश्यक चिकित्सा उपकरण शामिल हैं।इससे पहले भारतीय वायुसेना का सी-130जे विमान भी राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुँच चुका है। उसमें अस्थायी आश्रय, कंबल, दवाइयां, सोलर लैंप और अन्य जरूरी सामान भेजा गया था।
नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों की सहायता के लिए भारतीय दूतावास ने आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। काठमांडू में भारतीय दूतावास ने अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद और जानकारी के लिए इमरजेंसी नंबर जारी किए। इसने कहा है कि लोग +977 985 131 6807 या +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं।
सरकार ने कहा है कि किसी भी तरह की जानकारी या मदद के लिए इन नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है और सभी प्रभावित भारतीयों का पता लगाने की कोशिश जारी है।
राहत और बचाव अभियान जारी
नेपाल में सेना, पुलिस और बचाव दल लगातार राहत अभियान चला रहे हैं। हालांकि कई इलाकों में सड़कें टूट जाने और तेज बहाव के कारण राहत कार्य में मुश्किलें आ रही हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री ने भी प्रभावित इलाकों का दौरा किया है और अधिकारियों को राहत, पुनर्वास तथा लापता लोगों की तलाश तेज करने के निर्देश दिए हैं। भारत और नेपाल दोनों देशों की एजेंसियाँ मिलकर राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं ताकि फँसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकाला जा सके।