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अस्थाना को सीबीआई निदेशक बनाना चाहती है सरकार, फ़ैसला टला

सीबीआई के जिस विशेष निदेशक राकेश अस्थाना पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे और निदेशक आलोक वर्मा से लड़ाई की ख़बर सुर्खियोें में छाई थी, उन्हें सरकार केंद्रीय जाँच ब्यूरो का प्रमुख बनाने की जुगत में है। गुरुवार को चयन समिति की बैठक में जिन 12 उम्मीदवारों के नामों पर विचार किया गया, उनमें अस्थाना भी हैं। चयन समिति के सदस्य और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने तमाम उम्मीदवारों पर विचार के लिए और समय माँगा। इसलिए फ़ैसला अगली बैठक तक के लिए टाल दिया गया।  
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घर हुई बैठक में चयन समिति के सदस्य ख़ुद मोदी और मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई भी थे। गोगोई और खड़गे ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सीबीआई निदेशक के चयन मे जल्दबाज़ी न की जाए, इस बार कोई विवाद न हो। 
सरकार ने 1992-85 बैच के 12 आईपीएस अफ़सरों की एक शॉर्टलिस्ट बनाई थी, उसमें राकेश अस्थाना भी शामिल हैं। सरकार की मंशा साफ़ है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभी फ़ाइलों के अध्ययन के लिए और समय माँगा।
उन्होंने यह भी कहा कि 12 उम्मीदवारों के बदले सबसे वरिष्ठ 5-6 अफ़सरों की सूची होनी चाहिए थी। 

वाई.सी.मोदी सबसे मजबूत दावेदार

अगली बैठक में एनआईए के महानिदेशक वाई.सी. मोदी, मुंबई पुलिस कमिश्नर सुबोध जायसवाल और गुजरात के डीजीपी शिवानंद झा के नाम पर चर्चा होगी। इसके अलावा सीबीआई निदेशक की दौड़ में बीएसएफ़ महानिदेशक रजनीकांत मिश्रा और सीआईएसएफ़ महानिदेशक राजेश रंजन भी शामिल हैं। झा 2021 में रिटायर हो जाएँगे। पर्यवेक्षकों का कहना है कि उनके रिटायर होने के बाद सरकार राकेश अस्थाना को एक बार फिर इस पद पर लाने की कोशिश कर सकती है। लेकिन वाई. सी. मोदी को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। इसकी वजह यह है कि वे सीबीआई में लंबे समय तक काम कर चुके हैं और गुजरात दंगोें की जाँच के लिए बनी विशेष टीम में थे। इसके आलावा वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नज़दीक समझे जाते हैं। आरके मिश्रा की भी दावेदारी मजबूत मानी जाती है क्योंकि वह प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव निपेंदर मिश्रा के नज़दीक समझे जाते हैं। 
आलोक वर्मा और सीबीआई के पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच विवाद बढ़ जाने के बाद सरकार ने पिछले साल दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेज दिया था। वर्मा ने इसके ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी जिसके बाद कोर्ट ने वर्मा को बहाल कर दिया था। लेकिन चयन समिति ने उन्हें उनके पद से हटा दिया था। 

वर्मा ने कहा था कि उन्होंने संस्थान की विश्वसनीयता बचाए रखने की भरपूर कोशिश की, लेकिन कुछ लोग इसे बर्बाद करने पर तुले हुए थे। केंद्र सरकार ने वर्मा की जगह नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक नियुक्त किया गया था।

गुरुवार को सीबीआई के अंतरिम निदेशक एम. नागेश्वर राव की नियुक्ति के ख़िलाफ़ दायर याचिका पर सुनवाई से जस्टिस ए. के. सीकरी ने ख़ुद को अलग कर लिया था। पहले गोगोई ने इस मामले में सुनवाई से ख़ुद को अलग कर लिया था। 

सीबीआई में तब ख़ासा हंगामा हुआ था जब जस्टिस ए. के. पटनायक ने कहा था कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने जो रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी थी, उससे वह सहमत नहीं थे। कांग्रेस ने यह आरोप लगाया था कि सीबीआई निदेशक ने जब रफ़ाल सौदे की फ़ाइल मँगाई तो उन्हें पद से हटा दिया गया था। 

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