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कोरोना: होटल कारोबार पर पड़ेगी नाइट कर्फ्यू की मार, कारोबारी परेशान

बुलेट ट्रेन की रफ़्तार से बढ़ रहे कोरोना के मामलों को देखते हुए देश भर में राज्य सरकारें एहतियाती क़दम उठा रही हैं। देश की राजधानी दिल्ली में भी 30 अप्रैल तक नाइट कर्फ़्यू का एलान कर दिया गया है क्योंकि बीते कई दिनों से दिल्ली में संक्रमण की रफ़्तार तेज़ हुई है। दिल्ली पुलिस और सिविल डिफ़ेंस के कर्मचारी लोगों को मास्क पहनने, सोशल डिस्टेंसिंग रखने और नाइट कर्फ्यू का कड़ाई से पालन करने के लिए कह रहे हैं। लेकिन इस नाइट कर्फ़्यू के कारण सबसे ज़्यादा परेशानी होटल कारोबार से जुड़े लोगों को होगी। 

दिल्ली में लगभग 10 हज़ार छोटे-मोटे होटल, ढाबे, रेस्तरां आदि हैं। इनमें मोटा-मोटा हिसाब लगाएं तो 10 से 15 लाख लोगों को रोज़गार मिला हुआ है। इनके कारण ही फूड डिलीवरी एप का काम तेज़ हुआ है और ये भी रोज़गार का जरिया बने हैं। लेकिन नाइट कर्फ्यू का सीधा मतलब है कि इन लाखों लोगों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो जाना। 

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दिल्ली से बाहर आप पर्वतीय राज्यों की ओर देखें तो वहां भी हज़ारों लोग होटल, रेस्तरां के काम से जुड़े हैं। कोरोना काल से पहले लोग साल में कई बार पर्वतीय राज्यों में जाते थे, इससे इन लोगों की आमदनी होती थी। लेकिन कोरोना ने पिछला पूरा साल बर्बाद कर दिया और अब यह फिर से डरा रहा है। 

कोरोना डरा इसलिए रहा है कि दिल्ली-एनसीआर की गर्मी से निजात पाने के लिए लोग अमूमन मई-जून में पर्वतीय राज्यों का रूख़ करते हैं लेकिन कोरोना संक्रमण के बढ़ने के कारण अधिकांश लोगों ने ट्रैवल बुकिंग कैंसिल करानी शुरू कर दी है। 

पर्वतीय राज्यों में सैलानी आते थे तो टूरिज्म से जुड़ी बाकी चीजें जैसे- पैराग्लाइडिंग, बोटिंग और स्थानीय उत्पादों की छोटी-मोटी दुकानों में काम रहे लोगों के हाथों को काम मिलता था लेकिन कोरोना के कारण लोग फिर से पिछले साल वाले दिनों की ओर लौट रहे हैं। क्योंकि बीते कई दिनों से काम मंदा हो चुका है। 

लोगों की जो बचत थी, वो पिछले साल ख़त्म हो गई, अब जैसे ही वे दुकान सजाकर बैठे थे, फिर से इस आफत के कारण होटलों और ट्रैवल एजेंसियों की बुकिंग धड़ाधड़ कैंसिल हो रही है। सोचिए, कि ऐसे में होटल, ट्रैवल कारोबार से जुड़ा आदमी क्या करेगा।

उत्तराखंड में नैनीताल, मसूरी, अल्मोड़ा से ख़बर है कि लोग ट्रैवल एजेंसियों और होटल्स में की गई बुकिंग को रद्द करवा रहे हैं। निश्चित रूप से यह बाक़ी पर्वतीय राज्यों या पर्यटन वाली जगहों के लोगों के लिए बुरा संकेत है। 

कोरोना को लेकर देखिए चर्चा- 
महाराष्ट्र देश की आर्थिक राजधानी है और लाखों लोगों को रोज़गार देती है। ठाकरे सरकार तमाम सख़्त क़दम उठा चुकी है और बात लॉकडाउन लगाने तक आ पहुंची है। राज्य में पहले ही नाइट कर्फ्यू लग चुका है। लॉकडाउन के डर को देखते हुए मुंबई के स्टेशनों पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी है और वे अपने प्रदेशों की ओर जा रहे हैं।
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हालात वास्तव में नाजुक हैं क्योंकि कोरोना की पहली लहर में भी हम 1 लाख मामलों तक नहीं पहुंचे थे जबकि दूसरी लहर में तो कुछ ही दिनों में 1 लाख का आंकड़ा पार कर लिया। बीते 24 घंटों में यह आंकड़ा सवा लाख से ज़्यादा का रहा और लोगों की जुबान पर सवाल यही है कि क्या सरकार फिर से लॉकडाउन लगाएगी। 

लॉकडाउन लगेगा तो दिल्ली-एनसीआर में रेहड़ी-पटरी का काम करने वाले लाखों लोग, साप्ताहिक बाज़ारों में दुकान चलाने वाले लोग बेहद परेशान हो जाएंगे। निश्चित रूप से दूसरे राज्यों में भी ऐसा ही होगा। 

न जाने कब तक हालात सामान्य होंगे और सरकार भी ऐसे वक़्त में लॉकडाउन से इनकार नहीं कर सकती क्योंकि विशेषज्ञ चेता चुके हैं कि अगर हम नहीं संभले तो हालात बेकाबू हो सकते हैं। 

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