सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर नोएडा में सोमवार से शुरू हुआ मज़दूर आंदोलन मंगलवार को जारी रहा। लेकिन दोनों दिन हिंसा की घटनाएं हुईं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार की रात को ही उच्चस्तरीय कमेटी में नोएडा के हालात की समीक्षा की। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक योगी ने बैठक में कहा कि मज़दूर आंदोलन के पीछे नक्सलियों का हाथ है। हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबक योगी मंत्रिमंडल के श्रम मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि नोएडा मज़दूर आंदोलन के पीछे पाकिस्तान का हाथ है। नोएडा के पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने कहा कि ये आंदोलन सुनियोजित तरीके से सोशल मीडिया के जरिए चलाया गया। लेकिन ज़मीनी हक़ीकत कुछ और है। मज़दूर आंदोलन में अकेले नोएडा, सिकंदराबाद, गाजियाबाद के मजदूर शामिल नही थे। न्यूनतम वेतन की यही मांग हरियाणा के पलवल, फरीदाबाद, गुड़गांव, बहादुरगढ़ और सोनीपत में भी की जारी है।यह अनायास फूटा मजदूर आंदोलन नहीं है। 
पीटीआई की एक रिपोर्ट में कहा गया कि नोएडा के मजदूर लंबे समय से न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे थे। हाल ही में हरियाणा सरकार ने मासिक वेतन को लगभग 14,000 रुपये से बढ़ाकर 19,000 रुपये कर दिया यानी करीब 35 प्रतिशत की छलांग। वहीं उत्तर प्रदेश में वेतन अभी भी काफी कम, करीब 13,000 रुपये पर ही अटका हुआ है। इससे क्षेत्र की विशाल औद्योगिक पट्टी में काम करने वाले मजदूरों में गहरी नाराजगी पैदा हो रही है।
नोएडा में हिंसा से ठीक एक दिन पहले जिला प्रशासन ने मजदूरों की चिंताओं को दूर करने का आश्वासन दिया था। जिला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम ने वरिष्ठ श्रम अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में ओवरटाइम पर दोगुना भुगतान, वार्षिक बोनस, साप्ताहिक छुट्टियां, कार्यस्थल पर सुरक्षा और बेहतर शिकायत दूर करने जैसे तंत्र पर चर्चा हुई। प्रशासन ने मजदूरों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से प्रभावित न होने की अपील भी की थी। फिर भी दूसरे दिन मंगलवार के प्रदर्शनों का पैमाना और तीव्रता साफ दर्शाती है कि असंतोष बहुत गहरा है। खासकर वेतन संशोधन में हो रही देरी और प्रमुख मांगों पर कथित निष्क्रियता को लेकर मजदूर नाराज हैं।

मानेसर में आंदोलन क्यों

नोएडा की घटनाएं हरियाणा के गुड़गांव जिले में हुए इसी तरह के श्रम आंदोलन के महज कुछ दिन बाद हुई हैं। आईएमटी मानेसर में मजदूरों ने वेतन और काम की स्थितियों को लेकर पिछले हफ्ते हड़ताल की थी, जो हिंसक रूप ले गई। प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और एक पुलिस वाहन को आग लगा दी। इसके जवाब में प्रशासन ने दंगा करने के आरोप में 56 लोगों को गिरफ्तार किया। मांगों की समानता और दोनों जगहों की निकटता से साफ है कि औद्योगिक क्षेत्रों में श्रम अशांति का एक बड़ा पैटर्न उभर रहा है। इसे नक्सलियों या पाकिस्तान से जोड़कर देखना अपने आप में हस्यास्पद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती महंगाई, स्थिर वेतन और सोशल मीडिया के ज़रिए मजदूरों के बीच बढ़ती जागरूकता के कारण ऐसे प्रदर्शन अब और ज्यादा हो रहे हैं। फिलहाल नोएडा प्रशासन सामान्य स्थिति बहाल करने और आगे किसी बढ़ोतरी को रोकने पर पूरा ध्यान दे रहा है। साथ ही संवाद के जरिए मजदूरों की चिंताओं को दूर करने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई जा रही है।

नोएडा में प्रदर्शन कर रहे मजदूरों का कहना है कि अब पड़ोसी हरियाणा में काम करने वाले श्रमिकों और उत्तर प्रदेश के श्रमिकों के बीच वेतन का अंतर काफी बढ़ गया है, जिसे समझाना मुश्किल है। मजदूरों ने यह भी आरोप लगाया कि कई कंपनियां केंद्र सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन नियमों का पालन नहीं कर रही हैं।

पलवल और फरीदाबाद में क्यों आंदोलन

हरियाणा में वेतन वृद्धि की घोषणा के बावजूद हरियाणा के पलवल और फरीदाबाद में भी सोमवार को करीब 7,500 मजदूरों ने प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन ने अब तक वेतन बढ़ोतरी को लेकर कोई आधिकारिक नोटिस जारी नहीं किया, जिससे भ्रम और अविश्वास की स्थिति बनी हुई है। सीटू (CITU) के हरियाणा महासचिव जय भगवान ने कहा, "फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से कोई सर्कुलर या नोटिस जारी नहीं किया जा रहा है, जिससे मजदूरों में अविश्वास पैदा हो रहा है।" फरीदाबाद के एक फैक्ट्री कर्मचारी चंद्रभान ने बताया कि वह पिछले छह साल से ₹9,400 मासिक वेतन पर काम कर रहे हैं। "हमारे विरोध शुरू करने के बाद ही कंपनी ने ₹15,220 न्यूनतम वेतन का नोटिस लगाया।" अधिकारियों के अनुसार, हरियाणा में विरोध प्रदर्शन की मुख्य वजह श्रमिकों और फैक्ट्री प्रबंधन के बीच संवाद की कमी और अफवाहें रहीं।
पृथला औद्योगिक बेल्ट में बड़ी संख्या में मजदूर इकट्ठा हुए और हाईवे पर बैठकर प्रदर्शन किया। इससे दिल्ली-आगरा मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया और लंबी कतारें लग गईं। प्रदर्शनकारियों में ज्यादातर निजी कंपनियों के कर्मचारी शामिल थे, जिनमें कई महिला कर्मचारी भी थीं। उन्होंने कहा कि लंबे समय से वेतन वृद्धि की मांग की जा रही थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बढ़ती महंगाई और घरेलू खर्चों को पूरा न कर पाने की वजह से मजदूर नाराज थे।

पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंची। पलवल सिटी मजिस्ट्रेट प्रीति रावत ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि सरकार की न्यूनतम वेतन अधिसूचना का सख्ती से पालन कराया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि महिला कर्मचारियों से किसी भी प्रकार की बदतमीजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस ने हाईवे को खाली कराया और यातायात बहाल किया।
फरीदाबाद और पलवल जिला प्रशासन के अनुसार, दोनों जिलों में कुल लगभग 7,500 मजदूरों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। फरीदाबाद में श्रम विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने मजदूरों को शांत कराया और उन्हें आश्वासन दिया कि 1 अप्रैल से बढ़ा हुआ वेतन मिलेगा। पलवल में पुलिस ने हाईवे खाली करा लिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि NCR में वेतन गैप, महंगाई और काम की स्थितियों को लेकर मजदूर ऐसे प्रदर्शनों में हिस्सा ले रहे हैं। नोएडा में मजदूर आंदोलन को दरअसल पलवल, फरीदाबाद, मानेसर, गुड़गांव के मज़दूर आंदोलन का विस्तार बताया जा रहा है।

पलवल और फरीदाबाद प्रशासन ने मजदूरों को आश्वासन दिया है कि वेतन वृद्धि 1 अप्रैल से लागू होगी और प्रबंधनों पर सख्ती बरती जाएगी। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। पुलिस ने कहा कि यातायात बहाल कर दिया गया है और आगे कोई अशांति नहीं होने दी जाएगी। पलवल के पृथला में 3,200+ मजदूरों ने आगरा-दिल्ली हाईवे लगभग 2 घंटे ब्लॉक किया। कुल 7,500 मजदूर (पलवल + फरीदाबाद) ने प्रदर्शन किया। फरीदाबाद, पलवल, गुड़गांव और मानेसर में हरियाणा सरकार की 35% वेतन वृद्धि तुरंत लागू करने की मांग की जा रही। ज्यादातर निजी कंपनियों के कर्मचारी, कई महिला मजदूर शामिल इन आंदोलनों में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। 

यूपी में वेतन बढ़ोतरी के बावजूद जारी प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश सरकार ने भी हालात को देखते हुए वेतन में संशोधन की घोषणा की, लेकिन इसके बावजूद नोएडा में प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। 
नई दरों के अनुसार:
  • अकुशल श्रमिकों का वेतन ₹11,313 से बढ़ाकर ₹13,690 (अंतरिम) किया गया
  • अर्ध-कुशल श्रमिकों का वेतन ₹12,445 से बढ़कर ₹15,059 (अंतरिम) हो गया
  • कुशल श्रमिकों का वेतन ₹13,940 से बढ़ाकर ₹16,868 (अंतरिम) कर दिया गया
  • लेकिन ये बढ़ोतरी हरियाणा के 35 फीसदी के मुकाबले कुछ नहीं है। हरियाणा में भी बीजेपी सरकार है।

नोएडा में पुलिस का दमनचक्र

नोएडा में मजदूरों के खिलाफ सात एफआईआर दर्ज की गई है। करीब 350 मजदूर हिरासत में लिए गए हैं। मजदूरों का आंदोलन नोएडा के आसापास के इलाकों में फैल रहा है। जिसमें सिकंदराबाद, दादरी आदि हैं।