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एक एमसीडी की अधिसूचना जारी, केंद्र का दिल्ली पर कंट्रोल और मजबूत

केंद्र सरकार ने मंगलवार को दिल्ली में तीन नगर निगमों को एक करने के लिए दिल्ली नगर निगम (संशोधन) अधिनियम, 2022 की अधिसूचना जारी कर दी। नई एमसीडी के चुनाव जब भी होंगे, उसमें कोई भी राजनीतिक दल जीते, एमसीडी अब केंद्र सरकार के तहत काम करेगी। यानी जिस तरह दिल्ली में कानून व्यवस्था केंद्र के पास है, ठीक उसी तरह एमसीडी में भी केंद्र सरकार की चलेगी। इससे पहले तीनों एमसीडी के चुनाव टाल दिए गए थे। एक एमसीडी बनाने के पीछे जबरदस्त राजनीति हुई है। इस पर आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच टकराव भी हुआ। इस अधिनियम के मुताबिक अब पूर्वी, दक्षिणी उत्तरी नगर निगम का विलय करके इसे दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) कर दिया जाएगा। यह फिर से एमसीडी कहलाएगा।

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इन तीनों नगर निगमों की सभी देनदारियां, कर्मचारी और राजस्व स्रोत जल्द ही एमसीडी को ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। केंद्र निगम के कार्यों की देखरेख के लिए एक विशेष अधिकारी की नियुक्ति भी करेगा।
मोदी कैबिनेट ने 22 मार्च को तीनों एमसीडी के विलय के विधेयक को मंजूरी दी और विपक्ष के भारी विरोध के बीच 30 मार्च को लोकसभा में विधेयक पारित किया। केंद्र ने तीनों नगर निगमों की बढ़ी हुई वित्तीय देनदारियों का हवाला दिया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली सरकार पर एमसीडी के "सौतेले" व्यवहार का आरोप लगाया था। केंद्र ने दावा किया कि वित्तीय बाधाओं ने एमसीडी को अपने कर्मचारियों को वेतन और रिटायरमेंट लाभ का समय पर भुगतान करने में असमर्थ बना दिया है।

पिछले महीने दिल्ली चुनाव आयोग ने कानूनी सलाह मांगी थी कि क्या वह तीन नगर निगमों के लिए केंद्र से उनके एकीकरण के बाद चुनाव करा सकता है। आयोग ने इसके बाद तीनों एमसीडी में चुनाव की तारीखों की घोषणा को टाल दिया था। इसके बाद, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राजधानी में एमसीडी चुनाव होने देने का आग्रह करते हुए कहा कि चुनाव स्थगित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करता है।

अब क्या होगा

एक एमसीडी अधिसूचना के बाद, परिसीमन (डीलिमिटेशन) प्रक्रिया शीघ्र ही शुरू होने की उम्मीद है। अधिसूचना के बाद एमसीडी चुनाव भी निर्धारित किए जाएंगे।

केंद्र का नियंत्रण

दिल्ली नगर निगम संशोधन अधिनियम, 2022, केंद्र को नागरिक निकाय का पूर्ण नियंत्रण देता है। इस अधिनियम में यह भी प्रावधान है कि सीटों की संख्या 250 से अधिक नहीं होनी चाहिए जो वर्तमान में 272 है। इसका मतलब है कि परिसीमन के जरिए उसे 250 वॉर्डों में बांटा जाएगा। इससे एमसीडी चुनाव में काफी देरी होगी।

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अधिनियम की सबसे खास बात यह है कि यह दिल्ली सरकार के मुकाबले केंद्र सरकार को अधिक अधिकार देता है। 2012 में, एमसीडी को तीन हिस्सों उत्तरी दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली और पूर्वी दिल्ली नगर निगमों में बांटा गया था।

बीजेपी ने 2017 के एमसीडी चुनावों में 270 में से 181 वार्डों में पूर्ण बहुमत के साथ जीत हासिल की थी। आम आदमी पार्टी 48 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। अब आप एमसीडी में बीजेपी को कड़ी टक्कर देने की तैयारी कर रही है। पिछले दिनों उसने इस आशय के पोस्टर लगाकर भी अपनी मंशा जता दी थी।

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