जंतर मंतर प्रोटेस्ट पर अमित शाह के बयान की सरकार की पेशकश के बाद भी संसद के मानसून सत्र में तीन हफ्ते से जारी गतिरोध खत्म नहीं हो सका। सरकार ने विपक्ष की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए छात्र प्रदर्शनों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर लोकसभा में विस्तृत चर्चा कराने और गृह मंत्री अमित शाह से जवाब दिलाने की पेशकश की। लेकिन कांग्रेस ने सरकार की इसको पर्याप्त नहीं माना।

कांग्रेस का कहना है कि छात्रों के मुद्दे पर केवल सामान्य चर्चा या गृह मंत्री का भाषण पर्याप्त नहीं है। पार्टी की मांग है कि अमित शाह को साफ़-साफ़ बताना होगा कि 20 जुलाई को जंतर मंतर से संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और कथित तौर पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया था। इसके साथ ही कांग्रेस ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित चोरी के आरोपों पर भी संसद में चर्चा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जवाब की मांग दोहराई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि ये मुद्दे उनके लिए ‘नॉन-नेगोशिएबल’ हैं यानी इन पर कोई समझौता नहीं होगा।

सरकार ने क्या पेशकश की?

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि सरकार छात्रों और युवाओं के आंदोलनों तथा उनके खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह इस चर्चा का सरकार की ओर से जवाब देंगे और हर मुद्दे पर बिंदुवार प्रतिक्रिया देंगे। हालाँकि, सरकार ने इसके साथ एक शर्त भी रखी। रिजिजू ने कहा कि विपक्ष को चर्चा के दौरान सदन में टोकाटोकी व हंगामा नहीं करना चाहिए और गृह मंत्री का जवाब शांतिपूर्वक सुनना चाहिए।

सरकार का कहना है कि विपक्ष कई दिनों से अमित शाह के संसद में बयान की मांग कर रहा था और अब जब सरकार चर्चा के लिए तैयार है तो विपक्ष को चर्चा से भागना नहीं चाहिए। रिजिजू ने विपक्ष से कहा कि वह गृह मंत्री के जवाब के दौरान सदन में मौजूद रहे और किसी तरह का व्यवधान पैदा न करे।

कांग्रेस ने क्यों ठुकराई सरकार की पेशकश?

कांग्रेस का कहना है कि सरकार असली सवाल से बचने की कोशिश कर रही है। असली सवाल जंतर मंतर पर पुलिसिया दमन का है।

राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष की मांग यह कभी नहीं थी कि अमित शाह संसद में आकर छात्रों या युवाओं से जुड़े सामान्य मुद्दों पर भाषण दें। उनके मुताबिक, असली सवाल यह है कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई का आदेश किसने दिया।

राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि यदि गृह मंत्री ने कार्रवाई का आदेश दिया था तो इसकी जिम्मेदारी उनकी बनती है। और यदि उन्हें इस कार्रवाई की जानकारी ही नहीं थी तो यह गृह मंत्रालय की गंभीर नाकामी है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस सवाल का साफ़ जवाब देना चाहिए कि कथित गोलीबारी या पुलिस कार्रवाई को मंजूरी किसने दी थी।

कांग्रेस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया और कथित तौर पर पैलेट गन तथा आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ।

राहुल गांधी ने अमित शाह से मांगा सीधा जवाब

राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें किसी ‘फैंटेसी बातचीत’ या सामान्य बहस में दिलचस्पी नहीं है। उनका कहना है कि गृह मंत्री को संसद में आकर यह साफ़ करना चाहिए कि 'गोली चलाने का आदेश उन्होंने दिया था या नहीं।' राहुल गांधी ने यह भी कहा कि यदि अमित शाह ने आदेश दिया था तो उन्हें इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और यदि उन्होंने आदेश नहीं दिया था तो गृह मंत्रालय में किस अधिकारी ने ऐसा आदेश दिया, यह सामने आना चाहिए। कांग्रेस नेता ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी माफी की मांग की है।

कांग्रेस ने तीन मांगों को बताया ‘नॉन-नेगोशिएबल’

राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपनी तीन प्रमुख मांगें दोहराईं-
  1. पहली मांग छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से साफ़ जवाब की है।
  2. दूसरी मांग छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की है।
  3. तीसरी मांग अयोध्या के राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित चोरी के आरोपों पर संसद में चर्चा और प्रधानमंत्री के जवाब की है।
खड़गे ने कहा कि कांग्रेस इन तीनों मुद्दों पर पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर के लिए लोगों ने बड़ी श्रद्धा और विश्वास के साथ चंदा दिया था और चंदे में कथित गड़बड़ी या चोरी के आरोपों पर सरकार को जवाब देना चाहिए।

राम मंदिर चंदे के मुद्दे पर सरकार का जवाब

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से जब राम मंदिर के चंदे में कथित चोरी के मुद्दे पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से इस मामले की जांच के लिए एसआईटी बनाई गई है और राज्य स्तर पर कई कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार का संकेत है कि चूंकि राज्य स्तर पर जांच चल रही है, इसलिए इसे संसद में उठाने की ज़रूरत को लेकर विपक्ष की मांग स्वीकार करना जरूरी नहीं है। हालांकि, कांग्रेस इसे पर्याप्त जवाब नहीं मान रही है।

तीन सप्ताह से ज्यादा समय से संसद में गतिरोध

मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ था और शुरुआत से ही छात्र प्रदर्शन तथा पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर विपक्ष और सरकार के बीच टकराव बना हुआ है। विपक्ष लगातार गृह मंत्री अमित शाह से संसद में जवाब देने की मांग कर रहा है। इस वजह से लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित हुई है।

अमित शाह संसद परिसर में नियमित रूप से आते रहे हैं, लेकिन इस पूरे सत्र के दौरान उनके सदन में दिखाई नहीं देने को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। अब सरकार ने चर्चा और गृह मंत्री के जवाब की पेशकश की है, लेकिन कांग्रेस का कहना है कि सरकार अभी भी उसके मूल सवाल का जवाब नहीं दे रही है।

सरकार का कांग्रेस पर आरोप

कांग्रेस की मांग पर सरकार ने भी पलटवार किया है। किरेन रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और राहुल गांधी लगातार अपनी मांग बदल रहे हैं। उनका कहना है कि विपक्ष पहले गृह मंत्री के बयान की मांग कर रहा था और अब जब सरकार ने चर्चा और अमित शाह के जवाब की पेशकश की है तो विपक्ष प्रधानमंत्री से माफी और अन्य मुद्दों को सामने ला रहा है।

रिजिजू ने राहुल गांधी पर चर्चा से भागने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष आरोप लगाता है तो उसे सरकार का जवाब भी सुनना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि जब गृह मंत्री जवाब देने के लिए तैयार हैं तो राहुल गांधी सदन में उनकी बात सुनने से क्यों पीछे हट रहे हैं।

बीजेपी नेता जेपी नड्डा ने भी कांग्रेस पर संसद की कार्यवाही बाधित करने और अराजकता फैलाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जानबूझकर सदन की कार्यवाही को आगे नहीं बढ़ने दे रहे हैं।

जंतर मंतर से संसद तक पहुंचा विवाद

छात्रों का आंदोलन 20 जून को जंतर मंतर से शुरू हुआ था। आंदोलनकारी छात्र NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। आंदोलन के दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत कई मांगें उठाई गई थीं। बाद में धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया और सरकार की ओर से कुछ अन्य मांगों को स्वीकार किया गया।

25 जुलाई को 36 दिनों के बाद आंदोलन समाप्त हुआ। हालांकि, 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों द्वारा संसद की ओर किए गए मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई ने एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों का पुलिसिया दमन किया गया। यही मुद्दा अब संसद के भीतर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव का प्रमुख कारण बना हुआ है।

कानून बनाने का काम भी प्रभावित

संसद में जारी गतिरोध का असर विधायी कामकाज पर भी पड़ा है। मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होने वाला है और अब केवल कुछ ही दिन बचे हैं। ऐसे में कई अहम विधेयकों का भविष्य अनिश्चित हो गया है। महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक तथा FCRA संशोधन विधेयक जैसे अहम कानूनों पर भी अनिश्चितता बनी हुई है। लोकसभा में अब तक नौ विधेयक पारित हो चुके हैं, लेकिन उनमें से केवल दो पर ही चर्चा हो सकी। बाकी विधेयक विपक्ष के हंगामे के बीच बिना विस्तृत चर्चा के पारित किए गए।

क्या आगे भी जारी रहेगा गतिरोध?

सरकार और विपक्ष के बीच सोमवार को हुई बयानबाजी से फिलहाल यह संकेत नहीं मिला है कि संसद का गतिरोध तुरंत खत्म होने वाला है। सरकार चाहती है कि छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई पर चर्चा हो तथा अमित शाह जवाब दें। विपक्ष चाहता है कि चर्चा केवल सामान्य राजनीतिक बहस न बने, बल्कि गृह मंत्री कथित पुलिस कार्रवाई की जिम्मेदारी और आदेश को लेकर सीधा जवाब दें। इसके अलावा कांग्रेस राम मंदिर चंदे के आरोपों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जवाब की भी मांग कर रही है।

इस तरह संसद में विवाद अब केवल ‘अमित शाह बोलेंगे या नहीं’ तक सीमित नहीं रह गया है। असली टकराव इस बात पर है कि सरकार और विपक्ष छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर चंदे के आरोपों पर किस स्तर तक चर्चा करने को तैयार हैं। मानसून सत्र के बचे हुए दिनों में यही तय करेगा कि संसद में कामकाज सामान्य होता है या राजनीतिक टकराव और गहरा जाता है।