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लगातार सातवीं बार संसद का सत्र समय से पहले स्थगित क्यों?

संसद का मानसून सत्र सोमवार को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया। यह समय से चार दिन पहले ही ऐसा हुआ। यह लगातार सातवां सत्र है जो समय से पहले ही अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गया। तो सवाल है कि आख़िर इस बार समय से पहले क्यों संसद को स्थगित किया गया?

हालाँकि, इसके जवाब में संसदीय कार्य मंत्रालय ने कहा है कि दो राजपत्रित और संसदीय अवकाशों के मद्देनजर सदस्यों की मांग और आवश्यक सरकारी कामकाज पूरा होने के कारण सत्र में कटौती की गई है। बहरहाल, तय नियमों के अनुसार लोकसभा और राज्यसभा को शुक्रवार को स्थगित करना था, पर सरकार ने सोमवार को ही सदन को स्थगित कर दिया। बाक़ी के बचे चार दिन में से एक दिन मंगलवार को मुहर्रम और रक्षा बंधन के कारण गुरुवार को अवकाश है। इस तरह से केवल दो कार्य दिवस शेष थे।

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कुछ रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि कई सांसद चाहते थे कि इन त्योहारों पर सांसद अपने संसदीय क्षेत्र में जाना चाहते थे। एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि सरकार के अनुसार अधिकांश विधायी एजेंडा पूरा होने के साथ ही सत्र को कम करने के लिए सदस्यों की मांग को पूरा करने पर सहमति हुई।

हालाँकि, कुछ सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि लगातार संसद की तय कार्यवाही को कम करना एक तरह से संसद का मजाक उड़ाना है। 

तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने ट्वीट किया, 'यह लगातार सातवीं बार है संसद सत्र में कटौती की गई है। संसद का मजाक उड़ाना बंद करें। हम इसकी पवित्रता के लिए लड़ेंगे और पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह को इस महान संस्थान को गुजरात के जिमखाना में बदलने से रोकेंगे।'
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कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा के मुख्य सचेतक जयराम रमेश ने भी इस पर आपत्ति जताई। डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार जयराम रमेश ने कहा, 'सरकार के अनुरोध पर जल्दी स्थगन हुआ है। हम विधेयकों पर चर्चा के लिए तैयार थे।' 

सरकार ने 24 नए विधेयकों सहित 32 विधेयकों को पारित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा था, लेकिन लोकसभा केवल सात और राज्यसभा पांच विधेयक पारित कर सकी। सत्र के दौरान व्यक्तिगत डेटा संरक्षण पर विवादास्पद विधेयक को वापस ले लिया गया।

लोकसभा ने 44:29 घंटे या निर्धारित समय के 48% के लिए कार्य किया, जबकि राज्यसभा ने लगभग 38 घंटे (44%) के लिए कार्य किया, जबकि 47 घंटे व्यवधान में चले गए। 

सत्र के पहले दो हफ्तों में क़रीब-क़रीब कोई काम नहीं हुआ, क्योंकि विपक्ष महंगाई पर बहस के लिए अड़ा था। सरकार ने शुरू में यह कहते हुए चर्चा को रोक दिया कि वे बहस को जल्दी निर्धारित नहीं कर सकते क्योंकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कोविड पॉजिटिव थीं। हालाँकि विपक्ष ने यह भी साफ़ कर दिया था कि उनकी ओर से कोई अन्य मंत्री जवाब दे सकता है।

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गतिरोध 1 अगस्त को तब समाप्त हुआ जब लोकसभा ने इस मुद्दे पर चर्चा की और अगले दिन राज्यसभा ने की। हालाँकि इसके बावजूद सदन में कांग्रेस नेताओं के खिलाफ ईडी की कार्रवाई पर विरोध होता रहा। 

सत्र में महंगाई, प्रवर्तन निदेशालय द्वारा सोनिया गांधी से पूछताछ, लोकसभा और राज्यसभा में 27 सांसदों को निलंबित करने, कांग्रेस द्वारा केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग जैसे मुद्दों पर संसद के दोनों सदनों में गतिरोध बना रहा।

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