संसद का मानसून सत्र सोमवार से तूफानी होने वाला है। विपक्ष पेपर लीक, सोनम वांगचुक, राम मंदिर घोटाला, एथनॉल और विदेश नीति पर सरकार को घेरेगा। विपक्षी दलों में टूट और सांसदों के बीजेपी में जाने से सरकार मजबूत, लेकिन बहस गरम रहने की संभावना है।
महिला आरक्षण संशोधन बिल पर संसद में बहस।
संसद का मानसून सत्र आज यानी सोमवार से शुरू हो रहा है और पहले ही दिन सरकार और विपक्ष के बीच तीखे टकराव की स्थिति बनने के संकेत हैं। विपक्ष ने साफ़ कर दिया है कि वह पेपर लीक, अयोध्या राम मंदिर में कथित चंदा चोरी, सोनम वांगचुक के आंदोलन, ईंधन में एथेनॉल मिश्रण और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है।
यह सत्र तब हो रहा है जब विपक्षी खेमे की तस्वीर भी बदल चुकी है। अप्रैल में पिछला सत्र खत्म होने के बाद से चार विपक्षी दलों के कम से कम 37 सांसद बीजेपी नीत एनडीए के साथ चले गए हैं। इससे सरकार को संख्या बल बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर फोकस
विपक्ष का सबसे बड़ा हमला पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित भ्रष्टाचार को लेकर होने वाला है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले ही देहरादून में हुए ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में दावा कर चुके हैं कि पिछले दस वर्षों में 152 पेपर लीक हुए, 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए और किसी को सजा नहीं मिली।कांग्रेस इस मुद्दे को युवाओं और मध्यम वर्ग के बीच बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। विपक्ष का मानना है कि इससे बीजेपी के पारंपरिक शहरी और मध्यवर्गीय समर्थकों में असंतोष को हवा मिल सकती है।
सोनम वांगचुक के मुद्दे पर भी हंगामे के आसार
जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने सोमवार को प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च का नेतृत्व करने का ऐलान किया है, हालांकि दिल्ली पुलिस ने इस मार्च की अनुमति नहीं दी है।
राहुल गांधी ने वांगचुक को अस्पताल ले जाने की कार्रवाई की आलोचना की है। शरद पवार ने भी सरकार के रवैये को 'गैर-जिम्मेदाराना' बताया है।
राम मंदिर चंदा विवाद पर जवाब मांगेगा विपक्ष
अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित वित्तीय हेरफेर और चंदा चोरी के आरोप भी संसद में गूंज सकते हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की स्वतंत्र और व्यापक जांच कराने की मांग की है।
पत्र में कहा गया है कि लाखों श्रद्धालुओं ने अपनी मेहनत की कमाई आस्था के साथ दान की थी और अब वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। विपक्ष ट्रस्ट की नियुक्तियों और उसके संचालन को लेकर भी सवाल उठाने की तैयारी में है।एथेनॉल नीति और विदेश नीति भी बनेगी बहस का मुद्दा
हाल के दिनों में E20 एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर बड़ी बहस हुई है। कुछ वाहन मालिकों ने इंजन को नुकसान होने की शिकायतें की हैं, जबकि सरकार इस नीति को तेल आयात कम करने और प्रदूषण घटाने के लिए जरूरी बता रही है। विपक्ष इस मुद्दे को भी संसद में उठा सकता है।
इसके अलावा अमेरिका-ईरान तनाव, पश्चिम एशिया की स्थिति और भारत की विदेश नीति पर भी सरकार से जवाब मांगे जाने की संभावना है।
ऑल-पार्टी मीटिंग में विपक्ष का वॉकआउट
सत्र शुरू होने से एक दिन पहले रविवार को हुई ऑल-पार्टी मीटिंग में विपक्ष ने कुछ देर के लिए वॉकआउट किया। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार ने टीएमसी के बागी सांसदों को बैठक में बुलाकर संसदीय परंपराओं का उल्लंघन किया है।
महुआ मोइत्रा ने कहा कि जिन सांसदों के विलय पर अभी लोकसभा अध्यक्ष का फैसला लंबित है, उन्हें अलग पहचान देकर बुलाना असंवैधानिक है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, आम आदमी पार्टी, वाम दल और शिवसेना (यूबीटी) सहित कई दल इस विरोध में शामिल हुए।
परिसीमन बिल पर विपक्ष में दरार के संकेत
अप्रैल में परिसीमन के खिलाफ एकजुट दिखा विपक्ष अब बंटा हुआ नजर आ रहा है। सरकार संसद और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने तथा महिला आरक्षण कानून के क्रियान्वयन को आगे बढ़ाने वाला विधायी पैकेज फिर से लाने की तैयारी में है।
एनसीपी (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा है कि यदि सभी राज्यों में सीटों में 50 प्रतिशत की समान वृद्धि का प्रावधान किया जाता है तो उनकी पार्टी बिल का समर्थन कर सकती है। वहीं पहले परिसीमन का जोरदार विरोध करने वाली डीएमके अब अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाती दिख रही है। पार्टी नेताओं ने संकेत दिए हैं कि यदि केंद्र उनकी सिफारिशें मान लेता है तो विरोध की जरूरत नहीं पड़ेगी।सरकार फिलहाल सतर्क
सरकार ने अभी कुछ विवादित विधेयकों को आगे बढ़ाने में सावधानी बरती है। संविधान संशोधन से जुड़े एक प्रस्ताव को फिलहाल टाल दिया गया है और उच्च शिक्षा नियामक ढांचे से जुड़े ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025’ पर संयुक्त संसदीय समिति की बैठक भी स्थगित कर दी गई है। बीजेपी सूत्रों का कहना है कि सरकार संसद के भीतर की स्थिति देखकर ही आगे का कदम उठाएगी।
हंगामेदार सत्र के संकेत
विपक्ष भले ही संख्या के लिहाज से कमजोर हुआ हो, लेकिन वह पेपर लीक, शिक्षा, राम मंदिर और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे मुद्दों पर सरकार को रक्षात्मक स्थिति में लाने की कोशिश करेगा। दूसरी ओर सरकार विपक्ष की अंदरूनी टूट और बदलते राजनीतिक समीकरणों का फायदा उठाने की रणनीति पर काम कर रही है। इन परिस्थितियों में संसद का मानसून सत्र काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं और पहले ही दिन जोरदार बहस और विरोध-प्रदर्शन देखने को मिल सकते हैं।