संसद के मानसून सत्र में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर बल प्रयोग और पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक घमासान चरम पर पहुंच गया है। इस मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर विपक्ष ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राज्यसभा में विपक्ष ने गुरुवार 30 जुलाई को इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।
संसद भवन परिसर में आज गुरुवार को विपक्षी दलों के सांसदों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसदों ने तख्तियां लेकर नारेबाजी की और संसद परिसर में "मोदी-शाह सदन में आओ" के नारे गूंज उठे। विपक्ष की मांग थी कि छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और पैलेट गन के इस्तेमाल के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद सदन में आकर जवाब दें।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा निशाना साधा। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब संसद में इतने गंभीर संवेदनशील विषय पर चर्चा हो रही है, तब गृह मंत्री सदन में मौजूद क्यों नहीं हैं? राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन आती है, इसलिए छात्रों पर बल प्रयोग की नैतिक और प्रशासनिक जवाबदेही गृह मंत्री की बनती है।
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नेता विपक्ष राहुल गांधी ने अलग से एक वीडियो जारी करते हुए लिखा है- हमारे छात्रों के खिलाफ हुई क्रूरता की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया जाना चाहिए।

राज्यसभा में पैलेट गन का मुद्दा: भारी हंगामा

राज्यसभा में आज कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। विपक्षी सांसदों ने गृह मंत्री अमित शाह की राज्यसभा में अनुपस्थिति पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि सरकार जवाबदेही से भाग रही है।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने सदन में कहा- संविधान के आर्टिकल 75 के मुताबिक मंत्रिपरिषद सदन के प्रति उत्तरदायी है। दिल्ली में छात्रों पर बर्बरता की गई, उन पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। हम बस इतना ही कह रहे हैं- गृह मंत्री अमित शाह सदन में आएं और इस मुद्दे पर जवाब दें।
कांग्रेस महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल ने तीखे सवाल किए हैं। वेणुगोपाल ने पूछा- दिल्ली में पुलिस कार्रवाई का आदेश किसने दिया? दिल्ली में छात्रों पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया? हमें भारत के गृह मंत्री से जवाब चाहिए। वे संसद से क्यों भाग रहे हैं? वे विपक्ष के नेता को भी संसद में बोलने नहीं दे रहे हैं।

राज्यसभा में और क्या-क्या हुआ

हंगामे के बीच सरकार ने जनहित और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े विधायी कार्यसूची के विधेयकों को पटल पर रखा और उन पर संक्षिप्त चर्चा कराई। 
प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली रोकने और पारदर्शिता लाने से संबंधित संशोधन विधेयक पर सदन में तीखी बहस हुई। 
  • शून्यकाल और नियम 267 के तहत नोटिस: विपक्षी सदस्यों ने देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ की स्थिति, महंगाई और रोजगार से जुड़े विषयों पर कार्यस्थगन (नियम 267) के तहत चर्चा की मांग की। सभापति द्वारा इन नोटिसों को अस्वीकार किए जाने के बाद विपक्ष ने और अधिक नारेबाजी की।
  • सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित: विपक्ष के निरंतर हंगामे और वेल (सदन के बीचों-बीच) में आकर नारेबाजी करने के कारण सभापति को सदन की कार्यवाही पहले दोपहर तक और बाद में दिनभर के लिए स्थगित करनी पड़ी।
सत्ता पक्ष के सांसदों ने विपक्ष के इन आरोपों का पुरजोर विरोध किया। भाजपा सांसदों ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पुलिस द्वारा कोई गोली या पैलेट गन नहीं चलाई गई है और विपक्ष बिना तथ्यों के झूठे आरोप लगाकर देश को भ्रमित कर रहा है। हंगामे और नारेबाजी के कारण राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।