loader

अदालत की अवमानना क़ानून को चुनौती देने वाली याचिका चंद्रचूड़-जोजफ़ की बेंच से बाहर

अदालत की अवमानना क़ानून की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका को जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस के. एम. जोजफ़ के खंडपीठ से हटा लिया गया है। 

इस याचिका पर 10 अगस्त को सुनवाई होनी थी। यह याचिका सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस जोजफ़ की बेंच में दर्ज थी। 'लाइव लॉ' ने यह ख़बर दी है। 
देश से और खबरें
मशहूर पत्रकार एन. राम, वकील प्रशांत भूषण और पूर्व मंत्री अरुण शौरी ने यह याचिका दायर की थी। इस याचिका में अदालत की अवमानना क़ानून की धारा 2 (सी) (i) की संवैधानिकता को चुनौती दी गई थी।

अदालत ने माँगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार की सुबह अधिकारियों से इस पर सफ़ाई माँगी कि यह याचिका जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच को क्यों दी गई। इसे उस बेंच को दिया जाना चाहिए था, जिसके पास इससे जुड़ा मामला पहले से ही है। 

इसके पहले प्रशांत भूषण के ख़िलाफ़ अदालत की अवमानना के मामले पर जस्टिस अरुण मिश्र की अगुआई वाली बेंच ने सुनवाई पूरी कर फ़ैसला सुरक्षित रखा था। 

प्रशांत भूषण के ख़िलाफ़ अवमानना का नोटिस जारी होने के बाद ही अवमानना क़ानून को चुनौती देने वाली याचिका दायर की गई थी। 

प्रशांत भूषण के ख़िलाफ़ दो मामले

जस्टिस अरुण मिश्र की बेंच के पास अवमानना के दो मामले हैं। एक मामला है जिसमें इस मशहूर वकील ने 2009 में 'तहलका' पत्रिका को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि 16 में से आधे मुख्य न्यायाधीश भ्रष्ट हैं। 

इस मामले में 4 अगस्त को सुनवाई पूरी कर ली गई। इस बेंच में जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी भी हैं।

दूसरा मामला है, जिसमें प्रशांत भूषण के दो हफ़्ते पहले के दो ट्वीट पर अदालत ने ख़ुद संज्ञान लेकर नोटिस जारी किया था।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि 'अवमानना की अवधारणा की जड़ औपनिवेशिक सोच में है, जिसके लिए लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है।'

प्रशांत भूषण ने अवमानना क़ानून की धारा दो (सी) (i)को यह कह कर चुनौती दी है कि यह एकतरफ़ा, अस्पष्ट है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।

अस्पष्ट

उन्होंने यह भी कहा कि इसकी व्याख्या बिल्कुल निजी स्तर पर की जा सकती है और अलग-अलग लोगों की अलग-अलग व्याख्या हो सकती है। यह इस तरह अस्पष्ट है कि अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है। 
ब्रिटेन में 2013 में अदालत की अवमानना के क़ानून को ख़त्म कर दिया गया। यह कहा गया था कि यह क़ानून अस्पष्ट है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के ख़िलाफ़ है। 

'सत्य हिन्दी'
की ताक़त बनिए

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

देश से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें