सोशल मीडिया पर एक वीडियो शनिवार सुबह से वायरल है। वीडियो में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को अपनी कार से बाहर निकले और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ संक्षिप्त बातचीत करते नज़र आ रहे हैं। दोनों नेताओं ने सौहार्दपूर्ण ढंग से कुछ शब्द कहे, और वीडियो में उन्हें पास खड़े होकर ध्यानपूर्वक बातचीत करते हुए दिखाया गया, जिसके बाद वे अपने-अपने कामों में लग गए।
हालांकि यह बातचीत संक्षिप्त थी, लेकिन सत्ताधारी बीजेपी और कांग्रेस के बीच अक्सर होने वाली तीखी राजनीतिक बयानबाजी के बीच इसने अलग ही छाप छोड़ी। इसने प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता के बीच सीधे और अनौपचारिक बातचीत की एक खास झलक पेश की। दोनों नेताओं के बोलते समय आस-पास मौजूद लोग कुछ देर के लिए रुक गए। संसद परिसर में यह एक उल्लेखनीय क्षण बन गया।
प्रधानमंत्री महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए संसद परिसर में स्थित प्रेरणा स्थल पहुंचे थे। इस अवसर पर कई वरिष्ठ नेता और राजनीतिक व्यक्ति उपस्थित थे। इन सभी ने सामाजिक न्याय, शिक्षा और हाशिए पर पड़े समुदायों के उत्थान में फुले के योगदान को श्रद्धांजलि अर्पित की।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राज्यसभा के पूर्व उपसभापति हरिवंश और अन्य नेता भी कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित थे। इस आयोजन में विभिन्न दलों के नेता एक साथ आए और फुले की विरासत को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनका कार्य समकालीन सामाजिक और राजनीतिक चर्चा में आज भी प्रासंगिक है।
मोदी और राहुल के बीच हुई संक्षिप्त बातचीत के वीडियो ऑनलाइन वायरल हो गए हैं, जिससे लोगों में दिलचस्पी और चर्चा का विषय बन गया है। एक यूजर ने लिखा, "हमारे प्रधानमंत्री को विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ गंभीर बातचीत करते देखना अच्छा लग रहा है।"

राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी के राजनीतिक रिश्ते

राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच राजनीतिक संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। 2014 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार की नीतियों, खासकर अर्थव्यवस्था, विदेश नीति और लोकतंत्र पर सवाल उठाए हैं। मोदी और भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी को अक्सर "पप्पू" या "शहजादे" कहकर तंज़ किया है। राहुल गांधी ने कभी मोदी पर व्यक्तिगत हमला नहीं करके, राजनीतिक आरोप ही लगाए हैं। हाल ही में उन्होंने प्रधानमंत्री को "कम्प्रोमाइज्ड" बताया था। संसद में दोनों के बीच तीखी बहसें हुई हैं, जहां राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने और विभाजनकारी राजनीति का आरोप लगाया है। लेकिन मोदी समेत बीजेपी के नेता राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी पर व्यक्तिगत आरोप लगाते रहे हैं। जिसमें भाषा की मर्यादा कभी नहीं रखी गई।
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कई वर्षों में यह तनाव कई घटनाओं से बढ़ा है। 2023 में राहुल गांधी को "मोदी सरनेम" मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद संसद से निलंबित किया गया, जिसे कांग्रेस और विश्लेषकों ने बीजेपी और मोदी का राजनीतिक प्रतिशोध बताया। 2024 के लोकसभा चुनावों में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्राओं ने विपक्ष को मजबूत किया, लेकिन मोदी ने विपक्ष को "परिवारवादी" और "देश विरोधी" करार दिया। हाल के वर्षों में भी राहुल गांधी ने चीन सीमा विवाद, पश्चिम एशिया संकट और अमेरिका के साथ व्यापार समझौतों पर मोदी की विदेश नीति पर हमले किए, जबकि मोदी सरकार ने इन आरोपों को निराधार ठहराया है।
राहुल गांधी ने हमेशा कहा है कि वे मोदी से नफरत नहीं करते, बल्कि उनकी विचारधारा से असहमत हैं। संसद सत्रों में आरोप-प्रत्यारोप जारी रहते हैं, लेकिन दोनों पक्ष चुनावी और संसदीय लोकतंत्र के ढांचे में ही अपनी लड़ाई लड़ते आए हैं। 2025-26 में भी पश्चिम एशिया संकट और व्यापार नीतियों पर राहुल गांधी के हमले जारी रहे, जो उनके रिश्ते की तनावपूर्ण प्रकृति को दर्शाते हैं।