टेलीग्राफ अखबार की रिपोर्ट में एक BJP नेता के हवाले से कहा गया कि पीएम मोदी के बर्थडे जश्न पर आम लोगों की प्रतिक्रिया बहुत उत्साहजनक नहीं दिखाई दी। पार्टी को आशंका है कि बड़े आयोजनों ने प्रधानमंत्री की छवि को मजबूत करने के बजाय उलटा सवाल खड़ा कर दिया।
अमित शाह गुजरात में मोदी के जन्मदिन पर आरती करते हुए। फाइल फोटो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन यानी 17 सितंबर को भारतीय जनता पार्टी और कई BJP शासित राज्यों ने बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित किए। जगह-जगह दीये जलाए गए, लाइट शो हुए, बाइक रैलियां निकाली गईं और मोदी के लंबे जीवन तथा उनके 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन को लेकर कार्यक्रम हुए। लेकिन अब इन भव्य आयोजनों को लेकर BJP के भीतर से ही सवाल उठने लगे हैं।
‘द टेलीग्राफ’ की 21 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि जिस बड़े जनसमर्थन और स्वतःस्फूर्त भागीदारी की उम्मीद की गई थी, वह दिखाई नहीं दी। पार्टी के अंदर इसे लेकर चिंता है कि अत्यधिक बड़े पैमाने पर किए गए जन्मदिन समारोहों का असर उलटा पड़ सकता है।
BJP नेता ने माना- आम लोगों का उत्साह कम रहा
रिपोर्ट में एक BJP नेता के हवाले से कहा गया है कि आम लोगों की प्रतिक्रिया बहुत उत्साहजनक नहीं दिखाई दी। पार्टी का उद्देश्य मोदी के देशसेवा के संदेश और उनकी भूमिका को सामने रखना था, लेकिन पार्टी के कुछ लोगों को आशंका है कि बड़े आयोजनों ने प्रधानमंत्री की छवि को मजबूत करने के बजाय उलटा सवाल खड़ा कर दिया।BJP के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, कई जगहों से ऐसी रिपोर्ट आई कि राज्य सरकारों ने बड़े स्तर पर लाइट शो आयोजित किए, लेकिन आम लोग बड़ी संख्या में अपने घरों से निकलकर मोदी के लिए दीये जलाते नहीं दिखे।
‘आशीर्वाद का दीया’ अभियान पर उम्मीद के मुताबिक प्रतिक्रिया नहीं
इस बार BJP ने ‘आशीर्वाद का दीया’ अभियान शुरू किया था। पार्टी ने लोगों से 17 सितंबर की शाम कम से कम एक मिट्टी का दीया जलाकर प्रधानमंत्री मोदी के लंबे जीवन के लिए शुभकामना देने की अपील की थी। BJP अध्यक्ष नितिन नबीन समेत पार्टी नेताओं ने इस अभियान को बड़े स्तर पर चलाया। पार्टी के भीतर इसे कुछ हद तक कोविड काल के उन अभियानों से जोड़कर देखा गया, जब प्रधानमंत्री की अपील पर बड़ी संख्या में लोगों ने थाली बजाई या घरों की लाइटें बंद करके दीये जलाए थे। लेकिन इस बार पार्टी के कुछ नेताओं के मुताबिक वैसा स्वतःस्फूर्त जनउत्साह दिखाई नहीं दिया।पहले जन्मदिन पर ‘सेवा’ कार्यक्रम होते थे
रिपोर्ट के अनुसार, BJP लंबे समय से 17 सितंबर को मोदी के जन्मदिन पर अपेक्षाकृत कम दिखावे वाले ‘सेवा’ कार्यक्रम आयोजित करती रही है। इनमें रक्तदान शिविर और लोगों से जुड़े दूसरे कल्याणकारी कार्यक्रम शामिल होते थे। इस बार पार्टी ने इसका पैमाना काफी बढ़ा दिया। कई राज्यों में सरकारी इमारतों और BJP कार्यालयों को रोशन किया गया तथा अलग-अलग जगहों पर दीया जलाने और लाइट शो के कार्यक्रम हुए।उज्जैन में भव्य लाइट शो
मध्य प्रदेश के उज्जैन में क्षिप्रा नदी के किनारे बड़े स्तर पर लाइट शो आयोजित किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, यह इस अभियान के सबसे भव्य आयोजनों में शामिल था। कार्यक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर भी प्रसारित किए गए। BJP के कुछ वर्गों ने हालांकि ऐसे आयोजनों की राजनीतिक जरूरत और खर्च को लेकर सवाल उठाए।बिहार में दीये जले, लेकिन बाढ़ को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल
बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में पटना में गंगा किनारे दीया जलाने का कार्यक्रम हुआ। लेकिन सोशल मीडिया पर इस आयोजन को लेकर सवाल भी उठे। आलोचकों ने बिहार के बाढ़ प्रभावित ग्रामीण इलाकों की स्थिति का हवाला देते हुए पूछा कि जब राज्य के कई हिस्से बाढ़ से जूझ रहे थे, तब जन्मदिन के बड़े आयोजन पर संसाधन खर्च करने का क्या औचित्य है।इसके अगले दिन BJP अध्यक्ष नितिन नबीन ने बिहार के बाढ़ राहत कोष में राज्यसभा सांसद के रूप में तीन महीने का वेतन यानी ₹6.35 लाख देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बिहार की बाढ़ की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और सरकार राहत के लिए तैयार है।
मोदी के पुराने ‘तेल बचाने’ संदेश से भी तुलना
जन्मदिन समारोहों पर खर्च को लेकर BJP के भीतर उठ रहे सवालों में प्रधानमंत्री की अपनी पहले की अपीलों का भी जिक्र हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, मई में पश्चिम एशिया में युद्ध और वैश्विक ऊर्जा कीमतों के दबाव के बीच मोदी ने लोगों से ईंधन की बचत करने, अनावश्यक विदेशी यात्राओं से बचने और खाना पकाने के तेल की खपत कम करने जैसी अपीलें की थीं। ऐसे में पार्टी के कुछ लोगों ने बड़े पैमाने पर आयोजित जन्मदिन समारोहों और इन अपीलों के बीच कथित विरोधाभास की ओर ध्यान दिलाया।1,366 किलोमीटर की बाइक रैली
जन्मदिन समारोह के तहत सैकड़ों नई मोटरसाइकिलों के साथ रैलियां भी निकाली गईं। इनका उद्देश्य मोदी के लोकसभा क्षेत्र वाराणसी से उनके जन्मस्थान वडनगर तक और फिर वापस यात्रा करते हुए उनके 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन और ‘सेवा’ का संदेश पहुंचाना था। वाराणसी और वडनगर के बीच दूरी करीब 1,366 किलोमीटर है। इन रैलियों को BJP नेतृत्व ने बड़े स्तर पर प्रचारित किया।BJP शासित राज्यों में अलग-अलग कार्यक्रम
मोदी के जन्मदिन को लेकर कई BJP शासित राज्यों ने बड़े कार्यक्रम किए। गुजरात में करीब 88 लाख दीये 18,500 स्थानों पर जलाने की योजना बनाई गई थी। उत्तर प्रदेश में गांवों और ग्राम पंचायतों तक अभियान पहुंचाने के लिए कई कार्यक्रम घोषित किए गए। दिल्ली में भी ‘आशीर्वाद का दीया’ अभियान चलाया गया और सरकार ने करीब ₹13,800 करोड़ की परियोजनाओं के उद्घाटन या शिलान्यास को अभियान से जोड़ा। ओडिशा में लोगों से घर, मंदिर या सार्वजनिक स्थान पर दीया जलाकर फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर डालने की अपील की गई। हरियाणा में ‘नमो मैराथन’ आयोजित की गई, जबकि राजस्थान और मिजोरम समेत कई राज्यों में रक्तदान शिविर, प्रतियोगिताएं, सेवा कार्यक्रम और सरकारी योजनाओं से जुड़े अभियान आयोजित किए गए।सवाल सिर्फ विपक्ष ने नहीं उठाए
जन्मदिन समारोहों पर विपक्ष ने सरकारी मशीनरी और सार्वजनिक धन के कथित इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए थे। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि सरकारी अधिकारियों, स्कूलों और शिक्षकों समेत सरकारी संस्थानों को कार्यक्रमों में भाग लेने के निर्देश दिए गए। लेकिन ‘द टेलीग्राफ’ की रिपोर्ट का मुख्य बिंदु यह है कि अब ऐसे सवाल BJP के भीतर भी चर्चा का विषय बन रहे हैं- खासकर तब, जब पार्टी के अपने आकलन में आम लोगों की भागीदारी अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही।BJP के सामने अब असली सवाल क्या?
इस पूरे घटनाक्रम ने BJP के भीतर एक राजनीतिक सवाल जरूर खड़ा किया है- क्या प्रधानमंत्री के इर्द-गिर्द बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों और वास्तविक जनभागीदारी के बीच अंतर बढ़ रहा है? ‘द टेलीग्राफ’ की रिपोर्ट में पार्टी के कुछ नेताओं की चिंता यही बताती है कि जिस अभियान का उद्देश्य मोदी के प्रति जनसमर्थन और लोकप्रियता को प्रदर्शित करना था, उसमें कई जगह सरकारी और पार्टी स्तर का आयोजन तो बड़ा दिखा, लेकिन स्वतःस्फूर्त आम भागीदारी अपेक्षाकृत सीमित नजर आई।